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जवान बेटे का अंतिम संस्कार हो रहा था, अचानक हुआ कुछ ऐसा, देख परिवार में मच गया हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 07 Sep 2018 03:27 PM IST
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जवान बेटे का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, अचानक कुछ ऐसा हो गया कि हड़कंप मच गया। लोगों को समझ ही नहीं आया, क्या करें क्या न करें। मामला हरियाणा के महेंद्रगढ़ का है। सड़क हादसे में पुत्र की मौत के बाद परिजन श्मशान में उसकी चिता के पास खड़े थे। तभी सूचना मिली कि घायल मां ने भी दम तोड़ दिया है।
इसके बाद परिजन घर पहुंचकर मां की दाह संस्कार की प्रक्रिया में जुट गए। कुछ समय बाद बेटे के बगल में ही मां का भी अंतिम संस्कार कर दिया गया। दोनों में गहरा प्यार था। परिजनों के अनुसार घर पर बेटा तनिक भी देरी से पहुंचता तो मां की चिंता बढ़ जाती थी। दोनों ने कभी नहीं सोचा होगा उनकी मौत भी एक साथ होगी।
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इसके बाद परिजन घर पहुंचकर मां की दाह संस्कार की प्रक्रिया में जुट गए। कुछ समय बाद बेटे के बगल में ही मां का भी अंतिम संस्कार कर दिया गया। दोनों में गहरा प्यार था। परिजनों के अनुसार घर पर बेटा तनिक भी देरी से पहुंचता तो मां की चिंता बढ़ जाती थी। दोनों ने कभी नहीं सोचा होगा उनकी मौत भी एक साथ होगी।
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पति सेना से रिटायर्ड थे
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गांव आदलुपर बस स्टैंड के पास कार खड़े डंपर से टकरा गई थी। शांति देवी बवानी खेड़ा जिला हिसार की रहने वाली थी। उसके देवर मुंशी सिंह का परिवार कई वर्षों से महेंद्रगढ़ रह रहा था। शांति देवी का पति मान सिंह आर्मी से सेवानिवृत्त थे। उनके कोई संतान होने के कारण देवर मुंशी सिंह के बेटे भंवर सिंह को गोद लिया था।
मान सिंह फौजी की मौत पहले ही हो चुकी थी। पत्नी शांति बवानी खेड़ा में रहती थी। एक वर्ष से महेंद्रगढ़ में दत्तक पुत्र भंवर सिंह के पास ही रहती थी। भंवर सिंह ड्राइवर था। वह अपनी ही गाड़ी चलता था। भंवर सिंह के तीन बेटों में सबसे छोटे बेटे की मौत नौ माह पहले जनवरी में बीमारी से हो गई थी। उसका एक बेटा फौज में है जबकि दूसरा बेटा ड्राइवर है।
मान सिंह फौजी की मौत पहले ही हो चुकी थी। पत्नी शांति बवानी खेड़ा में रहती थी। एक वर्ष से महेंद्रगढ़ में दत्तक पुत्र भंवर सिंह के पास ही रहती थी। भंवर सिंह ड्राइवर था। वह अपनी ही गाड़ी चलता था। भंवर सिंह के तीन बेटों में सबसे छोटे बेटे की मौत नौ माह पहले जनवरी में बीमारी से हो गई थी। उसका एक बेटा फौज में है जबकि दूसरा बेटा ड्राइवर है।