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कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसा: शहीद नायक गुरसेवक को अंतिम विदाई, आर्मी यूनिफार्म पहने बेटे ने किया आखिरी सैल्यूट

Sun, 12 Dec 2021 11:43 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 12 Dec 2021 11:43 AM IST
सार

नायक गुरसेवक के बेटे गुरफतेह ने शहीद पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले शहीद की शवयात्रा निकाली गई। बुजुर्ग पिता काबल सिंह अपनी बहू, बेटों और बेटियों को ढांढस बंधाते नजर आए।

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Mortal remains of Naik Gursewak Singh being taken to his residence from Amritsar Air Force station
तरनतारन में शहीद नायक गुरसेवक सिंह का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हुए तरनतारन के गांव दोदे सोढिया के नायक गुरसेवक सिंह का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव पहुंचा।  जहां सैन्य सम्मान से उनका अंतिम संस्कार किया गया। आर्मी की यूनिफॉर्म पहने 4 साल के गुरफतेह ने जब अपने शहीद पिता की अर्थी को आखिरी सैल्यूट किया तो वहां मौजूद सभी लोगों का कलेजा फट पड़ा। पूरा इलाका भारत माता की जय, गुरसेवक सिंह अमर रहे के नारों से गूंज उठा।

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गुरफतेह को यह यूनिफॉर्म शहीद पिता ने डेढ़ महीने पहले दिलाई थी। उस समय वे छुट्टी पर आए थे। यही उनका बेटे के लिए आखिरी तोहफा था और यही आखिरी मौका भी था, जब बेटे ने पिता को देखा था। उसके बाद पिता अब आए, वो भी तिरंगे में लिपट कर।
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तमिलनाडु में हेलिकॉप्टर हादसे में जान गवाने वाले भारतीय सेना के नायक गुरसेवक सिंह का पार्थिव शरीर लेकर रविवार को सेना की टुकड़ी गांव दोदे सोढ़िया पहुंची। जिसे देखते ही ग्रामीणों ने भारत माता की जय, गुरसेवक सिंह अमर रहे के नारे लगाए। दोपहर साढ़े 12 बजे के आसपास गुरसेवक सिंह का शव दोदे गांव पहुंचा। वहां पहुंचते ही लोगों ने आर्मी के ट्रक को घेर लिया और शहीद को सलाम करने लगे। 
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गुरसेवक सिंह के घर के मेनगेट पर पिता काबल सिंह अपने बेटे का इंतजार कर रहे थे। पार्थिव शरीर को आर्मी के ट्रक से उतारकर घर में रखा गया तो पत्नी जसप्रीत कौर ने पति के आखिरी दर्शन करने की इच्छा जताई मगर आर्मी अफसरों ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए इसकी अनुमति न देने की मजबूरी बताई। इसके बाद शहीद के शव को सम्मान सहित गांव के श्मशान घाट तक ले जाया गया। 

इस मौके पर खेमकरण के विधायक सुखपाल सिंह भुल्लर, डीसी कुलवंत सिंह, पूर्व विधायक विरसा सिंह वल्टोहा, आप के स्वर्ण सिंह धुन्न, गुरसेवक सिंह औलख के अलावा सेना के अधिकारियों ने फूल मालाओं से गुरसेवक सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्मशान घाट में आर्मी ने सलामी देते हुए अंतिम क्रियाओं को पूरा करवाया। 

शहीद गुरसेवक सिंह का गांव के ही श्मशान घाट में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बेटे गुरफतेह ने शहीद पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले शहीद की शवयात्रा निकाली गई। बुजुर्ग पिता काबल सिंह अपनी बहू, बेटों और बेटियों को ढांढस बंधाते नजर आए। उन्होंने शहीद बेटे को हाथ जोड़कर आखिरी नमन भी किया। तीन मासूम बच्चे भी अपने पिता को पुकारते आंसू बहा रहे थे। इस मौके पर काबल सिंह अपने बेटे के पार्थिव शरीर वाले ताबूत पर लेटकर आवाजें लगाते कह रहे थे कि ‘सेवका तूं बोलदा क्यों नहीं। आह वेख लो लोको मेरा पुत्तर आपने देश दे लेखे लग गया।’ 


सरपंच गुरबाज सिंह ने पंचायत की और से सैनिक नायक गुरसेवक सिंह के पार्थिव शरीर पर चादर चढ़ाई। डीसी कुलवंत सिंह ने कहा कि देश भर को बुरी तरह से झंझोड़ने वाले हादसे को पूरी जिंदगी भुलाया नहीं जा सकता। गुरसेवक सिंह के पार्थिव शरीर को लेकर पहुंची सेना की टुकड़ी ने बताया कि जनरल बिपिन रावत के पीएसओ गुरसेवक सिंह बहुत बहादुर और खुश तबीयत वाले योद्धा थे।

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