गठबंधन टूटने के बाद मोहाली नगर निगम चुनाव में होगी शिअद और भाजपा की पहली अग्निपरीक्षा
- दोनों दलों के अलग होने से निगम चुनाव के बदले सभी समीकरण
- दोनों दलों के पास 50 वार्ड में उतारने के लिए नहीं हैं अच्छे उम्मीदवार
- इस बार चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भी होंगे नई चुनौती
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अकाली दल-बीजेपी की राहें जुदा होने के साथ ही मोहाली की राजनीति पूरी तरह से गर्मा गई। इतना ही नहीं दोनों के अलग होने के बाद सबसे पहले होने वाले नगर निगम चुनाव की राह भी आसान नहीं है। नगर निगम चुनाव में दोनों दलों की ही अग्नि परीक्षा होगी। क्योंकि इनके अलग होने से निगम चुनाव के सभी समीकरण बदल गए हैं। हालात यह हैं कि दोनों दलों को सभी वार्डों पर 50-50 उम्मीदवार उतारना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
वहीं, राजनीति विशेषज्ञों के अनुसार ताजा समीकरण से दोनों ही दलों को नुकसान होने की आंशका है। वहीं, इस बार चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भी सभी दलों के लिए नई चुनौती होंगे। लेकिन सभी दल अपने आपको मजबूत होने का दावा कर रहे हैं। अकाली दल और बीजेपी काफी समय से एकजुट होकर शहर में चल रहे थे। इतना ही नहीं गत नगर निगम चुनाव अकाली दल और बीजेपी ने मिलकर लड़ा था।
चुनाव में बीजेपी ने 6 और अकाली दल ने 17 सीटें जीतीं थी। इसके साथ ही सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आए थे। हालांकि मेयर नहीं बना सके थे। इस दौरान पहले आजाद ग्रुप के साथ मिलकर कांग्रेस ने मेयर बनाया था। इसके बाद मेयर ने पास बदल कर अकाली दल ज्वाइन कर लिया था। लेकिन ताजा समीकरण के हालत ऐसे बन गए हैं कि दोनों दलों के पास 50 वार्ड पर उतारने के लिए चेहरे तक नहीं है।
सूत्रों के अनुसार अकाली दल और बीजेपी दोनों के लिए यह स्थिति बनी हुई है। वहीं, कुछ नेता इस मौके का पूरा फायदा उठाने में जुटे हुए हैं। वह दोनों दलों में हाथपांव मार रहे हैं। इस मामले में अकाली दल के सीनियर नेता एवं पूर्व पार्षद सुखदेव सिंह पटवारी का मानना है कि उनके हिसाब से मौजूदा हालात में अकाली दल और बीजेपी दोनों का नुकसान है।
दूसरी तरफ अकाली दल ने बीजेपी को छोड़ने में देरी की है। कृषि कानूनों से बीजेपी से व्यापारी और आढ़ती वर्ग भी खिसका है। इसी तरह बीजेपी के सीनियर नेता एवं पूर्व पार्षद अरुण शर्मा भी मानते हैं कि दोनों दलों के अलग होने से दोनों का नुकसान है। हालांकि उनका कहना है कि अकाली दल का जो वोटर निराश है, वह उनके पास ही आएगा। दूसरा उनका कहना है कि वह पूरी तैयारी से मैदान में जुटेंगे। जैसे पार्टी हाईकमान के आदेश होंगे, वैसे ही काम किया जाएगा। काफी समय उनके कार्यकर्ता मैदान में जुटे हुए हैं।
सीनियर कांग्रेसी नेता एवं पूर्व पार्षद कुलजीत सिंह बेदी का कहना है कि पंजाब के लोग अकाली दल व बीजेपी दोनों दलों की कार्य गुजारी अच्छी तरह जानते हैं। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ही जीतेगी। हमने इलाके में काम किए। आम आदमी पार्टी के नेता विनीत वर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता लोगों के बीच काम कर रहे हैं। वहीं, उनकी पार्टी भी निगम की सारी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
बीजेपी वाले पांच साल करते रहे संघर्ष
शहर में अकाली दल और बीजेपी नेताओं की अंदर खाते रिश्तों में ज्यादा मधुरता नहीं रही है। जबकि अकाली दल ने अपना शहर में मेयर बनाया तो समझौते के मुताबिक सीनियर डिप्टी मेयर बीजेपी के खाते में आता था। लेकिन इस पद पर कांग्रेस का ही पूरे पांच साल कब्जा रहा। बीजेपी वाले काफी समय तक इसके लिए संघर्ष करते रहे। लेकिन उनको कहीं सफलता नहीं मिली।