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विजय सिंगला को झटका: अदालत ने खारिज की जमानत याचिका, कहा- लगे आरोप संगीन हैं
Fri, 10 Jun 2022 10:09 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 10 Jun 2022 10:09 PM IST
सार
सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी ने स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए अपनी निजी सहायक के जरिए दो प्रतिशत कमीशन मांगा था। स्वास्थ्य विभाग के एसई ने इसकी शिकायत की है।
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डॉ. विजय सिंगला।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)
विस्तार
भ्रष्टाचार के केस में जेल में बंद पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला को जिला अदालत ने झटका दिया है। जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि मुकदमे में लगी धाराएं एवं आरोप संगीन हैं इसलिए गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि इस दौरान पहले पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के वकीलों ने उनकी साफ-सुथरी छवि से लेकर कई चीजों के तर्क अदालत में दिए। अब उनके वकील जमानत के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण लेंगे।
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24 मई को पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पर सरकारी टेंडरों में कमीशन मांगने के आरोप लगे थे। उसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार रोको कानून के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। अदालत में उनके वकीलों ने दायर जमानत याचिका में कहा गया कि विजय सिंगला इलाके में काफी समाजसेवा के काम करते हैं। इलाके में उनकी साफ-सुथरी छवि है। इस कारण ही आम आदमी पार्टी ने 2022 के चुनाव में उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था। अपनी छवि के कारण 63 हजार मतों से जीते थे।
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उनकी छवि को देखते हुए ही पंजाब सरकार ने उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया था लेकिन उन्हें इस मुकदमे में गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने तीन दिन के पुलिस रिमांड में जांच एजेंसी को अपना पूरा सहयोग किया है। फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है, जो जांच का विषय है। इसके लिए उन्होंने जांच एजेंसियों को अपनी आवाज के नमूने भी दे दिए हैं। मुकदमे में उनके किसी प्रकार की कोई रिश्वत लेने का कोई साक्ष्य नहीं है।
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वहीं सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी ने स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए अपनी निजी सहायक के जरिए दो प्रतिशत कमीशन मांगा था। स्वास्थ्य विभाग के एसई ने इसकी शिकायत की है। 41 करोड़ रुपये निर्माण कार्य की पेमेंट के लिए मार्च के महीने में उनकी तरफ से यह रकम मांगी गई थी। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस को सुनकर टिप्पणी की है कि आरोपी पर लगे आरोप गंभीर हैं। ऐसे में जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।