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पोतों ने बनवाई दादा की फर्जी वसीयत
अमर उजाला, मोगा
Updated Sun, 24 Aug 2014 09:58 PM IST
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गांव घल्लकलां के किसान की फर्जी वसीयत तैयार करने के आरोप में थाना एनआरआई पुलिस ने उसके दो पोतों समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मृतक किसान करीब 108 एकड़ जमीन का मालिक था और उसने तीन विवाह किए थे। 10 साल पहले उसकी मौत हो गई थी।
स्थानीय डीएसपी एनआरआई विंग कंवरपाल सिंह बाजवा ने बताया कि एनआरआई अमरजीत सिंह (नीला) गांव घल्लकलां ने आईजी एनआरआई विंग मोहाली को शिकायत की थी कि उसका पिता किशन सिंह 108 एकड़ जमीन का मालिक था और उसने तीन शादियां की थी।
उसके पिता ने अपने जीते-जी तीनों पत्नियों के तीनों बेटों अमरजीत सिंह, परमजीत सिंह और चरनजीत सिंह को 30 -30 एकड़ जमीन बांट दी थी और 18 एकड़ जमीन अपने पास रख ली थी। पीड़ित की शिकायत के मुताबिक उसके भाई परमजीत सिंह की मौत हो गई थी। दूसरे भाई चरनजीत सिंह के उसके पिता के साथ अच्छे संबंध नहीं थे और वह उनकी देखभाल भी नहीं करता था।
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किशन सिंह को अगवा करने के आरोप में 13 जुलाई 2002 को फरीदकोट के अंतर्गत थाना सादिक में चरनजीत सिंह पर केस दर्ज हुआ और इसके बाद उसको अगवा के अलावा मारपीट करने के आरोप में थाना सदर, मोगा में 2 सितंबर 2003 को चरनजीत सिंह पर केस दर्ज किया गया।
इस दौरान किशन सिंह ने 24 जुलाई 2003 को अपने हिस्से की 18 एकड़ जमीन अमरजीत सिंह के नाम कर दी लेकिन किसी कारण माल रिकार्ड में इंतकाल नहीं हो सका। 18 जून 2004 को किशन सिंह की मौत हो गई।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसके भाई चरनजीत सिंह ने अपने बेटों सिमरनजीत सिंह और बलप्रीत सिंह के हक में फर्जी वसीयत तैयार कर माल विभाग के पास इंतकाल दर्ज करवा दिया।
पीड़ित के मृतक भाई परमजीत सिंह की पत्नी राजिंदर कौर और उसके बेटे जगदीप सिंह ने इस इंतकाल पर एतराज किया लेकिन एसडीएम ने 27 सितंबर 2010 को उसके पिता की संपत्ति का विरासत इंतकाल सिमरनजीत सिंह और बलप्रीत सिंह के हक में कर दिया था।
इस के बाद पीड़ित ने इंतकाल अपने नाम करवाने के लिए सिविल कोर्ट में केस दायर कर दिया था। उसने आरोप लगाया कि पहले भी एनआरआई विंग के पास शिकायत की थी लेकिन उसको इंसाफ नहीं मिला।
आईजी एनआरआई विंग मोहाली गुरप्रीत दियो ने पीड़ित एनआरआई अमरजीत सिंह की शिकायत की प्राथमिक जांच एसपी एनआरआई विंग बठिंडा, अलका मीना को सौंपी थी। इस वसीयत के फर्जी होने के बारे में 19 जून को फारेंसिक साइंस लैब ने एनआरआई विंग को रिपोर्ट दी थी।
थाना एनआरआई पुलिस ने इस मामले में मृतक किसान के पोते सिमरनजीत सिंह, बलप्रीत सिंह के अलावा वसीयत लिखने वाले यादविंदर सिंह, गवाह भूपिंदरपाल सिंह, जसविंदर सिंह गांव घल्लकलां खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में गवाह परमजीत सिंह पुत्र प्रताप सिंह गांव हसन भट्टी की मौत हो गई है। थाना एनआरआई मुखी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच के दौरान जो भी मुलजिम कसूरवार होगा उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी।
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स्थानीय डीएसपी एनआरआई विंग कंवरपाल सिंह बाजवा ने बताया कि एनआरआई अमरजीत सिंह (नीला) गांव घल्लकलां ने आईजी एनआरआई विंग मोहाली को शिकायत की थी कि उसका पिता किशन सिंह 108 एकड़ जमीन का मालिक था और उसने तीन शादियां की थी।
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उसके पिता ने अपने जीते-जी तीनों पत्नियों के तीनों बेटों अमरजीत सिंह, परमजीत सिंह और चरनजीत सिंह को 30 -30 एकड़ जमीन बांट दी थी और 18 एकड़ जमीन अपने पास रख ली थी। पीड़ित की शिकायत के मुताबिक उसके भाई परमजीत सिंह की मौत हो गई थी। दूसरे भाई चरनजीत सिंह के उसके पिता के साथ अच्छे संबंध नहीं थे और वह उनकी देखभाल भी नहीं करता था।
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किशन सिंह को अगवा करने के आरोप में 13 जुलाई 2002 को फरीदकोट के अंतर्गत थाना सादिक में चरनजीत सिंह पर केस दर्ज हुआ और इसके बाद उसको अगवा के अलावा मारपीट करने के आरोप में थाना सदर, मोगा में 2 सितंबर 2003 को चरनजीत सिंह पर केस दर्ज किया गया।
इस दौरान किशन सिंह ने 24 जुलाई 2003 को अपने हिस्से की 18 एकड़ जमीन अमरजीत सिंह के नाम कर दी लेकिन किसी कारण माल रिकार्ड में इंतकाल नहीं हो सका। 18 जून 2004 को किशन सिंह की मौत हो गई।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसके भाई चरनजीत सिंह ने अपने बेटों सिमरनजीत सिंह और बलप्रीत सिंह के हक में फर्जी वसीयत तैयार कर माल विभाग के पास इंतकाल दर्ज करवा दिया।
पीड़ित के मृतक भाई परमजीत सिंह की पत्नी राजिंदर कौर और उसके बेटे जगदीप सिंह ने इस इंतकाल पर एतराज किया लेकिन एसडीएम ने 27 सितंबर 2010 को उसके पिता की संपत्ति का विरासत इंतकाल सिमरनजीत सिंह और बलप्रीत सिंह के हक में कर दिया था।
इस के बाद पीड़ित ने इंतकाल अपने नाम करवाने के लिए सिविल कोर्ट में केस दायर कर दिया था। उसने आरोप लगाया कि पहले भी एनआरआई विंग के पास शिकायत की थी लेकिन उसको इंसाफ नहीं मिला।
आईजी एनआरआई विंग मोहाली गुरप्रीत दियो ने पीड़ित एनआरआई अमरजीत सिंह की शिकायत की प्राथमिक जांच एसपी एनआरआई विंग बठिंडा, अलका मीना को सौंपी थी। इस वसीयत के फर्जी होने के बारे में 19 जून को फारेंसिक साइंस लैब ने एनआरआई विंग को रिपोर्ट दी थी।
थाना एनआरआई पुलिस ने इस मामले में मृतक किसान के पोते सिमरनजीत सिंह, बलप्रीत सिंह के अलावा वसीयत लिखने वाले यादविंदर सिंह, गवाह भूपिंदरपाल सिंह, जसविंदर सिंह गांव घल्लकलां खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में गवाह परमजीत सिंह पुत्र प्रताप सिंह गांव हसन भट्टी की मौत हो गई है। थाना एनआरआई मुखी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच के दौरान जो भी मुलजिम कसूरवार होगा उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी।