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Chandigarh News: मोबाइल की लत, बिगड़ती नींद और बढ़ता तनाव

Mon, 12 Oct 2026 01:56 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 01:56 AM IST
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Mobile addiction, worsening sleep, and rising stress
सुखमन 2026 में वास्तविक जीवन के अनुभवों से समझाया मानसिक स्वास्थ्य का महत्व, नशे, चिंता, अवसाद और दिव्यांग बच्चों के परिजनों की चुनौतियों पर भी हुई चर्चा
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चंडीगढ़। मोबाइल पर बढ़ता समय, बिगड़ती नींद, रिश्तों में दूरी और लगातार तनाव मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में किसी के व्यवहार में बदलाव या अकेले रहने की इच्छा को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी बात सुनना और जरूरत पड़ने पर मदद के लिए आगे आना जरूरी है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर कलगीधर ट्रस्ट की ओर से आयोजित सुखमन 2026 कार्यक्रम में वास्तविक जीवन के अनुभवों, नाट्य प्रस्तुति और विशेषज्ञों के संवाद के जरिये मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में डिजिटल लत, नशे से उबरने, चिंता, अवसाद और दिव्यांग बच्चों की देखभाल करने वाले परिजनों की भावनात्मक चुनौतियों पर चर्चा हुई।
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मोबाइल की लत का नींद और रिश्तों पर असर

मंथन ग्रुप की नाट्य प्रस्तुति में दिखाया गया कि सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नींद, रिश्तों और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। कार्यक्रम में अप्रैल 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया कि अमेरिका में टिकटॉक इस्तेमाल करने वाले 37 प्रतिशत किशोरों ने माना कि इस प्लेटफॉर्म से उनकी नींद पर नकारात्मक असर पड़ा। विशेषज्ञों ने स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाने और अपनों के साथ समय बिताने पर जोर दिया।
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नशे से उबरने की कहानी ने दिया हौसला

नशे की लत और उससे उबरने की चुनौतियों पर वीडियो प्रस्तुति दिखाई गई। इसके बाद नशे से उबर चुके पूर्व रोगी, मार्गदर्शक और लेखक विक्रम सेठी ने गीत प्रस्तुत कर अपनी उपचार और पुनर्वास यात्रा साझा की। अकाल मनोरोग एवं नशा मुक्ति केंद्रों के निदेशक डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह ने कहा कि हर मानसिक स्वास्थ्य समस्या या नशे की लत के पीछे एक इंसान और उसकी कहानी होती है, जिसे सुना जाना चाहिए। उपचार के साथ सम्मान, समझ और परिवार व समाज का सहयोग भी जरूरी है।



तनाव से निपटने के तरीके बताए

विशेष शिक्षक जगदीप सिंह ने तनाव, चिंता और अवसाद पर संवाद किया। ट्रस्ट की मनोवैज्ञानिक सिमरनजीत कौर ने तनाव कम करने और मन को शांत रखने की व्यावहारिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। सोरेम स्कूल की प्रिंसिपल संगीता जैन ने दिव्यांग व्यक्तियों और उनके देखभालकर्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की। ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे के एक देखभालकर्ता ने परिवार की जिम्मेदारियों और भावनात्मक चुनौतियों के अनुभव साझा किए।



पीजीआई के प्रोफेसर डॉ. तरनदीप सिंह ने मानसिक मजबूती और सामुदायिक कल्याण में आध्यात्मिकता, सेवा और करुणा की भूमिका बताई। गुरबाणी हीलिंग के संस्थापक सरदार हरदियाल सिंह ने आंतरिक शक्ति, जीवन के उद्देश्य और सार्थक मानवीय संबंधों को बेहतर जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया।


थ्राइव बोर्ड पर लिखे बेहतर जीवन के संदेश



कार्यक्रम में लगाए गए थ्राइव बोर्ड पर लोगों ने बेहतर जीवन जीने के तरीके साझा किए। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी पुस्तकों और चढ़दीकला स्टूडियो के स्टॉल भी लगाए गए। सोरेम स्कूल के स्टॉल पर विशेष जरूरतों वाले बच्चों की बनाई हस्तनिर्मित वस्तुएं प्रदर्शित की गईं।
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