{"_id":"2ba1770142746225002c8788ba2236aa","slug":"mis-management-in-pgi-affected-robotic-surgery","type":"story","status":"publish","title_hn":"PGI में अव्यवस्था ऐसी कि रोबोट भी हार गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
PGI में अव्यवस्था ऐसी कि रोबोट भी हार गया
आशीष वर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 04 May 2014 12:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग की रोबोटिक सर्जरी का इंतजार बढ़ता जा रहा है। बीस करोड़ रुपये की सर्जरी का सामान आए करीब आठ महीने बीत गए हैं।
विज्ञापन
सारा सामान निर्माणाधीन ओटी के बाहर पड़ा हुआ है, लेकिन अब तक आपरेशन थिएटर (ओटी) ही तैयार नहीं हो पाया। ओटी और सर्जरी का सामान इंस्टाल होने में कम से कम अभी छह महीने का समय और लगेगा।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक रोबोटिक सर्जरी साल 2013 के आखिरी महीने में शुरू होनी थी। ओटी को तैयार करने में कई फर्म काम कर रही हैं।
काम पूरा करने की डेडलाइन खत्म हुए चार महीने भी बीत चुके हैं। धीमी गति से कम करने पर पीजीआई की ओर से इन एजेंसियों पर कोई कार्रवाई भी नहीं की जा रही है।
विज्ञापन
इसलिए आ रही देरी :
नेहरू हास्पिटल की दूसरी मंजिल में रोबोटिक सर्जरी के लिए ओटी का निर्माण चल रहा है। निर्माणाधीन ओटी के साथ ही पब्लिक हेल्थ की अंडरग्राउंड निकासी के लिए पाइपलाइन गई है। इनमें कुछ में लीकेज थी। रोबोटिक सर्जरी पर कोई प्रभाव न पड़े, इसलिए सभी नौ पाइप लाइन को बाहर शिफ्ट करने का फैसला लिया।
नवंबर 2013 में इन्हें शिफ्ट करने का काम शुरू हो गया था। अब तक छह ही पाइपलाइन शिफ्ट की गई है। तीन पाइप लाइन को शिफ्ट करने में करीब तीन महीने का समय और लगेगा।
उसके बाद आपरेशन थिएटर का काम शुरू होगा। फिर एसी की फिटिंग होगी और फिर सिविल वर्क। आखिर में रोबोट मशीन का इंस्टालेशन होगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब छह महीने का समय और लगेगा।
मरीजों का यह होता फायदा :
रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को काफी फायदा मिलेगा। पहले पेट की सर्जरी में काफी लंबा चीरा लगाना पड़ता था, लेकिन इसमें दो से तीन छोटे-छोट छेद किए जाएंगे। रोबोटिक सर्जरी में खून बहुत कम बहेगा। जब खून कम निकलेगा तो मरीज जल्दी ठीक होगा। दो से तीन घंटे बाद उसे घर भी भेजा जा सकेगा।
दवाइयों का खर्च काफी कम होगा। इस रोबोट से प्रोस्टेट, नेफ्रेक्टॉमी किडनी और अन्य सर्जरी की जा सकेंगी। लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन के दौरान डाक्टरों को ज्यादा समय तक ऑपरेट करना पड़ता था। इससे डॉक्टरों के पैर, गर्दन व स्पाइन में दर्द होने लगता था, लेकिन रोबोटिक में ऐसा नहीं होगा।
कोट
रोबोटिक सर्जरी के लिए आपरेशन थिएटर तैयार हो रहा है। इतने बड़े प्रोजेक्ट में कुछ बाधाएं आती हैं, लेकिन हमारी कोशिश है कि इसे जल्द से जल्द तैयार कर दिया जाए।
-मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई