{"_id":"884f28b77a441e1c821bbd2880580330","slug":"mirchpur-scandal-hearing-postponement-in-high-court-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिर्चपुर कांड की सुनवाई स्थगित, सरकार ने मांगा समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिर्चपुर कांड की सुनवाई स्थगित, सरकार ने मांगा समय
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 28 Jan 2016 09:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के जिला हिसार के गांव मिर्चपुर में सवर्णों की दबंगई से गांव छोड़ने पर मजबूर हुए दलित परिवारों के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दोबारा शुरू हुई सुनवाई के बाद राज्य सरकार ने वीरवार को एक बार फिर जवाब के लिए समय मांगा। अदालत ने सरकार को समय देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी है।
विज्ञापन
पीड़ित परिवार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को मामले में पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। इसी मामले में स्व संज्ञान लेते हुए जस्टिस एसके मित्तल व जस्टिस एमएस चौहान की डिवीजन बेंच ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
विज्ञापन
दलितों पर अत्याचार के मामले में हाईकोर्ट ने निपटारा करते हुए उचित मुआवजे का निर्देश जारी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ पीड़ित जसवंत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी कि न तो दलितों की उचित सुरक्षा पर कोई निर्देश दिया गया और न ही हाईकोर्ट से पीड़ितों के पुनर्वास पर कोई निर्देश जारी हुआ। यह दो मुख्य मांगें पूरी होनी चाहिएं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल जसवंत सिंह की एसएलपी पर उसकी दलीलों को सही ठहराया था कि पुनर्वास और सुरक्षा पर याचिकाकर्ता व अन्य दलित परिवारों को पूर्ण इंसाफ नहीं मिल पाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन तथ्यों के साथ यह मामला हाईकोर्ट को वापस भेज दिया था और निर्देश दिया था कि पीड़ितों के पुनर्वास, उनकी सुरक्षा के मुद्दे और दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित बनाने पर उचित फैसला लिया जाए।
उल्लेखनीय है कि मामूली सी बात को लेकर हिसार के मिर्चपुर गांव में जातीय हिंसा भड़क गई थी। सवर्ण जाति के लोगों ने दलितों पर खासा कहर बरपाया था और इस स्थिति में गांव के दलित परिवार पलायन कर गए थे।