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Chandigarh News: पेंशन पर सुप्रीम व्यवस्था को दरकिनार नहीं कर सकती मंत्रालय की नीति
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने पंचकूला स्थित सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पेंशन पर मंत्रालय की नीति सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था को दरकिनार नहीं कर सकती।
तरसेम सिंह 21 मार्च, 1969 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और 22 वर्ष 11 माह की सेवा के बाद 31 मार्च, 1991 को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद 9 नवंबर 1991 को वे डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स में शामिल हो गए। सेवानिवृत्ति की आयु तक उन्होंने 14 वर्षों तक सेवा दी।
पेंशन के लिए पात्र होने के लिए 15 वर्ष की सेवा की आवश्यकता होती है। तरसेम सिंह की सेवा 343 दिन कम थी और इसी आधार पर पेंशन के लिए उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया। न्यायाधिकरण ने कमी को माफ कर दिया और उन्हें पेंशन प्राप्त करने की अनुमति दी। इस निर्णय को चुनौती देते भारत सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। केंद्र सरकार ने 20 जून, 2017 की रक्षा मंत्रालय की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि अधिसूचना में ऐसा खंड शामिल है, जो स्पष्ट रूप से डिफेंस सिक्योरिटी कोर्प्स (डीएससी) के तहत दूसरी सेवा पेंशन के लिए न्यूनतम सेवा अवधि में माफी को अस्वीकार्य बनाता है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यूनियन ऑफ इंडिया बनाम सुरेंदर सिंह परमार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक वर्ष तक की सेवा की कमी के लिए माफी दी जा सकती है। तरसेम सिंह की सेवा अवधि केवल 343 दिन कम थी, इसलिए उन्होंने तर्क दिया-माफी वैध थी। न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय की 2017 की नीति पर हाईकोर्ट ने कहा कि नीति पत्र लाकर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से बरकरार रखे गए सिद्धांतों को रद्द नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट 14 साल से अधिक सेवा वाले कर्मियों के लिए माफी की अनुमति दे चुका है।
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तरसेम सिंह 21 मार्च, 1969 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और 22 वर्ष 11 माह की सेवा के बाद 31 मार्च, 1991 को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद 9 नवंबर 1991 को वे डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स में शामिल हो गए। सेवानिवृत्ति की आयु तक उन्होंने 14 वर्षों तक सेवा दी।
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पेंशन के लिए पात्र होने के लिए 15 वर्ष की सेवा की आवश्यकता होती है। तरसेम सिंह की सेवा 343 दिन कम थी और इसी आधार पर पेंशन के लिए उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया। न्यायाधिकरण ने कमी को माफ कर दिया और उन्हें पेंशन प्राप्त करने की अनुमति दी। इस निर्णय को चुनौती देते भारत सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। केंद्र सरकार ने 20 जून, 2017 की रक्षा मंत्रालय की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि अधिसूचना में ऐसा खंड शामिल है, जो स्पष्ट रूप से डिफेंस सिक्योरिटी कोर्प्स (डीएससी) के तहत दूसरी सेवा पेंशन के लिए न्यूनतम सेवा अवधि में माफी को अस्वीकार्य बनाता है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यूनियन ऑफ इंडिया बनाम सुरेंदर सिंह परमार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक वर्ष तक की सेवा की कमी के लिए माफी दी जा सकती है। तरसेम सिंह की सेवा अवधि केवल 343 दिन कम थी, इसलिए उन्होंने तर्क दिया-माफी वैध थी। न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय की 2017 की नीति पर हाईकोर्ट ने कहा कि नीति पत्र लाकर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से बरकरार रखे गए सिद्धांतों को रद्द नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट 14 साल से अधिक सेवा वाले कर्मियों के लिए माफी की अनुमति दे चुका है।