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हरियाणा: बारिश से भीगा प्रदेश की मंडियों पड़ा 2.89 लाख मीट्रिक टन धान, खेतों में खड़ी फसल लेटीं

Mon, 18 Oct 2021 03:15 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़/करनाल
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़/करनाल Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 18 Oct 2021 03:15 AM IST
सार

रविवार को बूंदाबांदी के कारण हरियाणा की मंडियों में खुले में पड़ा लाखों मीट्रिक टन धान भीग गया। खेतों में खड़ी फसल बारिश के कारण जमीन पर गिरने से किसानों की चिंता बढ़ गई। मंडियों में फसल बचाने के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था न होने के कारण किसान खुद ही अनाज को बचाव में जुटे दिखे।

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Millions of tonnes of paddy soaked in rain in the mandis of Haryana
बारिश से गिरी धान की फसल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के कई जिलों में हुई बारिश से मंडियों में खुले में पड़ा लाखों मीट्रिक टन धान भीग गया। साथ ही खेतों में खड़ी फसल बारिश के कारण जमीन पर गिरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। रविवार को बूंदाबांदी के कारण धान की खरीद और उठान भी बाधित हुआ।

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अंबाला में 19 और गुरुग्राम-यमुनानगर में 10-10 एमएम बारिश दर्ज की गई। मंडियों में फसल बचाने के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था नहीं दिखी। किसान खुद ही बचाव में जुटे दिखे। बारिश से अब किसानों को और परेशानी झेलनी पड़ेगी, क्योंकि इस बार पहले से ही धान में नमी है और अब कई दिन तक उनको खरीद के लिए इंतजार करना होगा। 
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प्रदेश की करीब 200 अनाज मंडियों में 2.89 लाख मीट्रिक टन धान की फसल पड़ी है। अब तक 29.60 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है, जबकि इसमें से 26.71 लाख एमटी की खरीद हो चुकी है। रविवार को करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर और पानीपत में खरीद न के बराबर हुई। हालांकि, मौसम के चलते उठान भी कम हो पाया। कुछ इसी प्रकार के हालात, हिसार और रोहतक जोन के रहे। 
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मंडियों में नहीं तिरपाल की व्यवस्था
कमेटी के नियमों के अनुसार, किसानों की फसल को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी आढ़ती की होती है। जब आढ़ती को लाइसेंस जारी किया जाता है तो उस समय आढ़ती को सुनिश्चित करना होता है कि उसके पास तिरापल की व्यवस्था है। लेकिन आढ़ती तिरपाल नहीं खरीदते हैं और किसानों को फसल बचाने के लिए खुद ही व्यवस्था करनी होती है।

आज भी बारिश के आसार
रविवार को अंबाला में 19, गुरुग्राम, यमुनानगर और पानीपत में 10-10 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि अन्य जिलों में दिनभर बूंदाबांदी जारी रही। आगामी 24 घंटों में भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वापस जाते मानसून के कारण बारिश की संभावना है। उधर, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश से धान की फसल को नुकसान है। एक तो मंडियों में पड़े धान में नमी बढ़ जाएगी, दूसरे खेतों में खड़ी फसल की कटाई में और समय लगेगा और इससे फसल गिरने की भी आशंका रहती है। 


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      जिला       बारिश (एमएम)

  • अंबाला         19
  • गुरुग्राम        10
  • यमुनानगर    10
  • पानीपत        10 
  • हिसार           1.0
  • करनाल         0.5
  • रोहतक          2.0
  • फतेहाबाद      1.0
  • कैथल           0.5
  • कुरुक्षेत्र         1.5
  • पंचकूला        1.5
  • सोनीपत        0.5

धान खरीद को लेकर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। उठान का कार्य तेजी से चल रहा है। बारिश और बूंदाबांदी से कुछ असर पड़ा है। जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। -जेपी दलाल, कृषि मंत्री।

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