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झटकाः हाइकोर्ट ने सरकार को लगाया साढ़े 11 लाख जुर्माना, जानिए क्यों?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Oct 2016 09:28 AM IST
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कोर्ट
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को साढ़े 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए बड़ा झटका दिया है। मामला भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक सौ से अधिक याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए बार-बार समय मांगने का है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को सबक सिखाते हुए 10 हजार रुपये प्रति याचिका के हिसाब से जुर्माना लगाया है। जुर्माने की यह राशि भूमि अधिग्रहण कलेक्टरों से वसूलने का आदेश दिया गया है।
कुरुक्षेत्र, सोनीपत, रोहतक व अन्य जिलों में भूमि अधिग्रहण से संबंधित करीब 115 याचिकाओं पर हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हो रही थी। बुधवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की डिविजन बेंच ने मामले में हरियाणा सरकार के जवाब तलब किया था, लेकिन काफी समय से हरियाणा सरकार के वकील प्रत्येक सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के लिए और समय लेकर चले जाते थे।
हरियाणा सरकार के इस व्यवहार से क्षुब्ध हाईकोर्ट की बेंच ने इसे भूमि मालिकों और सरकार के अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनने की वजह माना। कहा कि इसी वजह से सार्वजनिक उद्देश्य से किए गए भूमि के अधिग्रहण और अधिग्रहण के एवज में मालिकों को पैसा बांटने के कई सालों बाद भी सरकार ने अधिग्रहण की गई भूमि को अपने कब्जे में नहीं लिया है।
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डिविजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने फैसले में कहा है कि काफी समय से हाईकोर्ट के अनेक बेंच हरियाणा सरकार और हरियाणा एडवोकेट जनरल ऑफिस को बार-बार ताकीद करते रहे हैं कि सरकार अदालती केसों पर ध्यान दे और समय पर जवाब भी दाखिल करे, ताकि अदालतों का समय व्यर्थ न जाए।
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कुरुक्षेत्र, सोनीपत, रोहतक व अन्य जिलों में भूमि अधिग्रहण से संबंधित करीब 115 याचिकाओं पर हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हो रही थी। बुधवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की डिविजन बेंच ने मामले में हरियाणा सरकार के जवाब तलब किया था, लेकिन काफी समय से हरियाणा सरकार के वकील प्रत्येक सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के लिए और समय लेकर चले जाते थे।
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हरियाणा सरकार के इस व्यवहार से क्षुब्ध हाईकोर्ट की बेंच ने इसे भूमि मालिकों और सरकार के अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनने की वजह माना। कहा कि इसी वजह से सार्वजनिक उद्देश्य से किए गए भूमि के अधिग्रहण और अधिग्रहण के एवज में मालिकों को पैसा बांटने के कई सालों बाद भी सरकार ने अधिग्रहण की गई भूमि को अपने कब्जे में नहीं लिया है।
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डिविजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने फैसले में कहा है कि काफी समय से हाईकोर्ट के अनेक बेंच हरियाणा सरकार और हरियाणा एडवोकेट जनरल ऑफिस को बार-बार ताकीद करते रहे हैं कि सरकार अदालती केसों पर ध्यान दे और समय पर जवाब भी दाखिल करे, ताकि अदालतों का समय व्यर्थ न जाए।
यह है मामला
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : फाइल फोटो
डिविजन बेंच के समक्ष साल 2014 से अब तक दायर हुई 115 अलग-अलग याचिकाओं में भूमि मालिकों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में पारदर्शिता तथा उचित मुआवजे के अधिकार संबंधी अधिनियम, 2013 का हवाला देते हुए अधिग्रहण की गई उनकी भूमि लौटाने की मांग की है। याची का कहना है कि उनकी भूमि का अधिग्रहण काफी समय पहले किया गया था।
कुछ मामलों में तो अधिग्रहण 90 के दशक में किया गया था, लेकिन अवार्ड घोषित करने के पांच साल से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो संबंधित अधिकारियों ने अधिग्रहण की गई भूमि पर कब्जा लिया है, न ही भूमि मालिकों ने अवार्ड राशि ही स्वीकार की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि साल 2013 के अधिनियम के तहत अब उनकी भूमि उन्हें लौटाई जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्थापन में पारदर्शिता व उचित मुआवजे के अधिकार संबंधी अधिनियम, 2013 के सेक्शन 24 में यह प्रावधान है कि अवार्ड घोषित किए जाने के बाद अगर भूमि का कब्जा नहीं लिया गया या भूमि मालिक को अधिग्रहण की गई भूमि का मुआवजा नहीं चुकाया गया तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्त्रिस्या स्वत: ही रद हो जाएगी।
कुछ मामलों में तो अधिग्रहण 90 के दशक में किया गया था, लेकिन अवार्ड घोषित करने के पांच साल से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो संबंधित अधिकारियों ने अधिग्रहण की गई भूमि पर कब्जा लिया है, न ही भूमि मालिकों ने अवार्ड राशि ही स्वीकार की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि साल 2013 के अधिनियम के तहत अब उनकी भूमि उन्हें लौटाई जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्थापन में पारदर्शिता व उचित मुआवजे के अधिकार संबंधी अधिनियम, 2013 के सेक्शन 24 में यह प्रावधान है कि अवार्ड घोषित किए जाने के बाद अगर भूमि का कब्जा नहीं लिया गया या भूमि मालिक को अधिग्रहण की गई भूमि का मुआवजा नहीं चुकाया गया तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्त्रिस्या स्वत: ही रद हो जाएगी।