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बांझपन के आधे मामलों में पुरुष होते हैं जिम्मेदार

Fri, 15 Nov 2013 02:02 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 15 Nov 2013 02:02 AM IST
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men is Responsible for infertility case

समाज में बांझपन के लिए अक्सर महिलाओं को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन पीजीआई का दावा कुछ और है। पीजीआई का कहना है कि बांझपन के आधे मामलों में पुरुष जिम्मेदार होते हैं।

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पुरुष बांझपन का इलाज पीजीआई में उपलब्ध है। यहां पर असिस्टेड रिप्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) से पुरुष बांझपन का इलाज किया जाता है।

यूरोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार पीजीआई में जितने भी केस आते हैं उनमें बांझपन के लिए महिलाएं और पुरुष दोनों जिम्मेदार होते हैं।

एक तिहाई मामलों में महिलाएँ, एक तिहाई में पुरुष और शेष एक तिहाई मामलों में दोनों जिम्मेदार होते हैं। पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि पुरुष बांझपन के लिए कई कारण होते हैं।
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इनमें से कई कारणों को एआरटी से दूर किया जा रहा है। संस्थान में हाल ही इस तकनीक से इलाज शुरू हुआ है। इस इलाज में काफी कम खरचा आता है और इसका लाभ कोई भी उठा सकता है।
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पेनाइल प्रासेस पर लाइव वर्कशाप
पीजीआई के यूरोलाजी विभाग 23 वीं एनुअल कांफ्रेंस का आयोजन शुक्रवार से शुरू हो रहा है। इसमें पहले दिन सीएमई और लाइव आपरेटिव वर्कशाप का आयोजन होगा।

इसमें पेनाइल प्रासेस का लाइव वर्कशाप का आयोजन होगा। इसके एक मरीज के अंदर पेनाइल प्रासेस डाला जाएगा। इसमें नेशनल व इंटरनेशनल के करीब 500 डेलीगेट हिस्सा लेंगे।


कार्यक्रम में पीजीआई के डीन प्रोफेसर अमोद गुप्ता मुख्य अतिथि होंगे। इसमें यूपी, हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व चंडीगढ़ के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।

पुरुष बांझपन के मुख्य कारण
1. ज्यादा धूम्रपान
2. मोबाइल पर ज्यादा बात करना
3. ज्यादा शराब पीना
4. पेस्टीसाइड का प्रभाव
5. अंडकोश में रुकावट
6. कुछ हद तक प्रदूषण भी

पुरुषों में इनफर्टीलिटी के बहुत से कारण सामने आए हैं। इनके आधार पर इस समस्या का इलाज संभव है। पीजीआई में हर हफ्ते ऐसे पांच से दस मामले आते हैं।
-संतोष कुमार, कंसलटेंट, यूरोलॉजी, पीजीआई

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