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Chandigarh: महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी हो रहे घरेलू हिंसा के शिकार, महिला थाने के आंकड़े दे रहे गवाही

Mon, 22 May 2023 07:53 AM IST
निवेदिता वर्मा परीक्षित सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
परीक्षित सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 22 May 2023 07:53 AM IST
सार

घरेलू हिंसा से परेशान होकर कई बार पुरुष बेबसी में आत्महत्या जैसा कदम उठाने को भी मजबूर हो जाते हैं। वहीं महिलाओं के पास कानून का सहारा है, जिसका दुरुपयोग भी बढ़ रहा है। इस बात को अब स्वीकार भी किया जा रहा है।

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Men are becoming victims of domestic violence according to statistics of women station of Chandigarh Police
सांकेतिक - फोटो : Social Media

विस्तार

समाज में यह एक आम धारणा बनी है कि पुरुष या पति कभी घरेलू हिंसा का शिकार नहीं हो सकता है। घरेलू हिंसा जैसा शब्द सिर्फ महिलाओं के साथ जुड़ सकता है, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। यह हम नहीं कह रहे आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं। 
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चंडीगढ़ पुलिस के महिला थाने के आंकड़े बताते हैं कि घरेलू हिंसा का शिकार सिर्फ महिलाएं ही नहीं ही बल्कि पुरुष भी हो रहे हैं। साल 2022 अप्रैल 2023 तक 56 लोगों ने पत्नियों से प्रताड़ित हो खुद को बचाने के लिए महिला थाने में गुहार लगाई है।
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पुलिस आंकड़ों की बात करें तो चंडीगढ़ महिला पुलिस थाने में साल 2022 में 1421 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं बीते सालों की पेंडिंग शिकायतों को मिलाकर कुल 3796 पारिवारिक विवाद और दहेज उत्पीड़न समेत अन्य घरेलू हिंसा से संबंधित मामले महिला थाने में पहुंचे हैं। इनमें 39 पुरुषों ने महिला थाने में अपने साथ घर में हो रही प्रताड़ना की शिकायत पुलिस को दी है। 
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इसी तरह साल 2023 की बात की जाए तो पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के तहत अप्रैल माह तक 17 पुरुषों ने थाने में अपने साथ हो रही हिंसा की शिकायत दी है। जबकि थाने में महिलाओं की ओर से पेंडिंग शिकायतों को मिलाकर कुल 1393 शिकायतें पुलिस के पास की गई। जिनमें से 843 कि जांच पूरी करने के बाद उन पर बनती कार्रवाई कर दी गई है, जबकि 550 पेंडिंग शिकायतें कि जांच चल रही है।

पिछले कुछ दिनों से ऐसे मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसमें पुरुषों को घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है और पुरुषों को इस बात को लेकर मलाल है कि उनकी इन शिकायतों का न तो कहीं निपटारा हो रहा है और न ही समाज उनकी इन शिकायतों को स्वीकार कर रहा है।


आत्महत्या जैसा कदम उठाने से भी नहीं करते गुरेज
घरेलू हिंसा से परेशान होकर कई बार पुरुष बेबसी में आत्महत्या जैसा कदम उठाने को भी मजबूर हो जाते हैं। वहीं महिलाओं के पास कानून का सहारा है, जिसका दुरुपयोग भी बढ़ रहा है। इस बात को अब स्वीकार भी किया जा रहा है। छोटे शहरों में घरेलू हिंसा के शिकार पुरुषों को अपनी शिकायत रखने के लिए कोई मौका तक नहीं मिलता है। हालांकि चंडीगढ़ पुलिस के महिला थाना के एसएचओ उषा रानी का कहना है कि जिस तरह से महिलाओं की शिकायतें सुनी जाती हैं। उसी तरह से पुरुषों के शिकायत भी सुनते हुए उनका निपटारा करवाने की कोशिश की जाती है।
 
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