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चंडीगढ़: नियमों से परेशान सदस्य बोले- कोऑपरेटिव सोसायटीज की मुहिम को खत्म करने में जुटा प्रशासन

Sat, 25 Sep 2021 04:09 PM IST
Trainee Trainee रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 25 Sep 2021 04:09 PM IST
सार

मनजीत ने कहा कि रजिस्ट्री का खर्च और 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना पड़ता है। सभी सोसायटियों ने फ्लैट्स का निर्माण खुद कराया है। फिर प्रशासन किस चीज का लाभ मांग रहा है। अब प्रशासन की नजर इन्हीं सोसायटियों पर हैं । आरडब्ल्यूए-48 के प्रधान जेजे सिंह ने बताया कि प्रशासन वर्ष 1997 में आवंटित किए गए सोसाइटियों के मकानों को लेकर भी उनके साथ काफी अन्याय कर रहा है।
 

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Members of cooperative societies enraged by chandigarh administrations rules
चंडीगढ़ प्रशासन। - फोटो : DEMO

विस्तार

सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में करीब 108 कोऑपरेटिव सोसायटियां हैं, लेकिन इनमें रहने वाले लोग इन दिनों प्रशासन के कई नियमों से खासे परेशान हैं। सदस्यों का आरोप है कि अनअर्जित लाभ की वसूली, लीज डीड पर जीएसटी समेत कई नियम लगाकर प्रशासन कोऑपरेटिव सोसायटीज की मुहिम को खत्म करने में जुटा है। समर्थन करने के बजाय प्रशासन इसे लाभ कमाने का जरिया बना रहा है।

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सेक्टर-50 स्थित सरगोधा सोसायटी के सदस्य मनजीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मनजीत सिंह ने कहा कि जिस समय चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने सोसायटियों को जमीनें आवंटित की थी, तब वे काफी सस्ते रेट पर दी थी। अब कीमतें बढ़ गई हैं, तो वे इससे पैसा कमाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ महीने पहले नए और पुराने रेट के अंतर पर एक तिहाई अनर्जित लाभ का कानून बना दिया।
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प्रशासन किस चीज का मांग रहा लाभ
अनर्जित लाभ के नाम पर 8 से 18 लाख रुपये तक भरने पड़ते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री का खर्च और 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना पड़ता है। सभी सोसायटियों ने फ्लैट्स का निर्माण खुद कराया है। विकास से जुड़े काम भी खुद कराए हैं, फिर प्रशासन किस चीज का लाभ मांग रहा है। उनका कहना है कि कोऑपरेटिव सोसायटी मुहिम की शुरुआत की गई थी, ताकि लोग एक-दूसरे की मदद करके अपना विकास कर सकें और एक ऐसे समाज की स्थापना हो, जहां लोग एक-दूसरे के सहयोग से रह सकें। अब प्रशासन की नजर इन्हीं सोसायटियों पर हैं और वह हर एक चीज से पैसा कमाने की फिराक में हैं। प्रशासन की नीयत इस मुहिम को तोड़ने की है।
 
लीज होल्ड को फ्री होल्ड करने के लिए फ्लोर अनुसार शुल्क
आरडब्ल्यूए-48 के प्रधान जेजे सिंह ने बताया कि प्रशासन वर्ष 1997 में आवंटित किए गए सोसाइटियों के मकानों को लेकर भी उनके साथ काफी अन्याय कर रहा है। लीज होल्ड से फ्री होल्ड के लिए प्रत्येक फ्लोर के अनुसार शुल्क मांगा जा रहा है, जो सरेआम लूट है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 200 गज की जमीन पर बने ग्राउंड, फर्स्ट और सेकेंड फ्लोर फ्लैट से अलग-अलग 200-200 गज के अनुसार शुल्क मांगा जा रहा है। सीएचबी 200 गज की जमीन से 600 गज के जितना शुल्क वसूल रहा है। उनकी मांग है कि 200 गज को तीनों फ्लोर पर रहने वाले मालिकों के बीच बांटकर शुल्क लेना चाहिए। जेजे सिंह ने बताया कि ये मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में भी पहुंच चुका है और सुनवाई चल रही है।

 
लीज डीड और अनअर्जित लाभ पर जीएसटी
सरगोधा सोसायटी के सदस्य मनजीत सिंह ने कहा कि सीएचबी जीएसटी के नियमों के विपरीत जाकर काम कर रहा है। सोसायटी के लीज डीड और अनअर्जित लाभ पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूला जा रहा है। जबकि बोर्ड की सोसायटियों पर ऐसा कोई कानून नहीं है। सीएचबी गैरकानूनी काम कर रहा है, जिसे तुरंत रोकने की जरूरत है।
 
सब कुछ खुद किया, फिर भी दे रहे टैक्स
सोसायटियों में फ्लैटों के लिए वर्ष 1997 में 750 रुपये प्रति स्क्वेयर यार्ड के अनुसार लोगों ने पैसे चुकाए हैं। इसमें 500 रुपये जमीन और 250 रुपये इलाके को विकसित करने के लिए वसूले गए। सड़क, बिजली, पानी, साफ सफाई समेत बाउंड्री के अंदर सभी तरह के काम सोसायटी खुद देखती है, बावजूद इसके नगर निगम की ओर से सभी शुल्क लिए जा रहे हैं। सोसायटी के सदस्यों ने खुद खरीदकर मीटर लगवाए हैं, लेकिन नगर निगम हर बिल में मीटर रेंटल भी वसूलता है। आप नेता संदीप भारद्वाज ने कहा कि सोसायटी के अंदर स्ट्रीट लाइटों के व्यावसायिक बिजली शुल्क वसूले जा रहे हैं। सड़कों और स्ट्रीट लाइटों का काम नगर निगम को देखना चाहिए।
 
एक नजर में कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटीज

  • कुल सोसायटी - 108
  • कुल फ्लैट्स - साढ़े 12 हजार
  • कुल जनसंख्या - करीब 40 हजार
  • मुख्य सेक्टर- 48, 49, 50, 51
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