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‘मेलो’ ने जीता दिल, ‘तंदूर’ ने जमाया रंग
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Nov 2013 09:48 AM IST
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पंजाबी रंगमंच के सम्राट गुरशरण सिंह की जरा सी अभिव्यक्ति ही किसी को सोचने पर मजबूर कर सकती है। घटनाओं को मंच पर उतारने की उनकी लाजवाब कला अभी भी सबका दिल जीत लेती है।
उनके दो नाटक ‘तंदूर’ और ‘मेलो’ भी कुछ ऐसे ही हैं। सच्ची घटनाओं पर आधारित इन नाटकों के साथ ही शुरू हुआ पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में गुरशरण सिंह के नाटकों का सिलसिला जो चार दिन चलेगा।
सुचेतक रंग मंच मोहाली के चार दिवसीय वार्षिक उत्सव की शुरुआत पंजाब कला भवन में हुई। इसमें तंदूर नाटक पच्चीस मिनट और मेलो पचास मिनट तक चला।
ये नाटक ‘थड़ा शैली’ पर आधारित रहे। नाटक का मंचन चंडीगढ़ स्कूल ऑफ ड्रामा की ओर से किया गया। इसका निर्देशन इकहत्तर सिंह ने किया।
तंदूर नाटक नैना कांड से प्रेरित है जिसे तीन कलाकारों ने पेश किया। यह नाटक एक देशभक्त पिता (हरविंदर सिंह औजला) और उनके दामाद देविंदर सिंह (कुलबीर सिंह लकी) के इर्द गिर्द घूमता है।
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इन दोनों के विचारों को नाटक के केंद्र में रखा गया। राजनीति में होने वाले भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों का पर्दाफाश इसमें किया गया। देविंदर की पत्नी के रूप में शियोल दीप कौर की भूमिका एक दृढ़ नारी की रही। वह अपने पिता के देशभक्त होने पर गर्व करती है।
दूसरा नाटक मेलो रहा जिसकी कहानी इतिहास में नहीं है। गुरशरण सिंह ने एक अस्पताल की सच्ची घटना को नाटक का विषय बनाया।
यह गांव के ऐसे अस्पताल की कहानी है जिसमें शहर के डाक्टर टिकते ही नहीं। इसकी वजह से भ्रष्ट लोग अस्पताल में आने वाली सुविधाएं खुद इस्तेमाल कर लेते हैं।
एक नया और शरीफ डाक्टर आता है और गांव की समस्याओं को दूर करने के साथ ही अस्पताल की सुविधाओं को बेहतर कर देता है। नाटक में मेलो नामक दाई की अहम भूमिका है।
मेलो की भूमिका सुखविंदर कौर ने अदा की। इसके अतिरिक्त मलकीत सिंह रौणी, कुलबीर सिंह लकी और हरविंदर सिंह औजला ने भूमिका निभाई। इस नाट्य उत्सव में पेश किए जाने वाले सभी नाटक किसी ऐतिहासिक दौर की घटनाओं की याद दिलाएंगे।
कलाकारों को सम्मानित किया
पंजाब आर्ट्स काउंसिल के वाइस चेयरमैन एसएस विरदी और पंजाबी साहित्य अकादमी हरियाणा के सुखचैन मिस्त्री ने इस उत्सव से काफी समय से जुड़े लोगों को सम्मानित किया। इनमें गुरप्रीत कौर भंगू, रमन ढिल्लों, जसबीर ढिल्लों, दिलावर सिद्धू, अवतार, आरएम सिंह, संगीत शामिल रहे।
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उनके दो नाटक ‘तंदूर’ और ‘मेलो’ भी कुछ ऐसे ही हैं। सच्ची घटनाओं पर आधारित इन नाटकों के साथ ही शुरू हुआ पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में गुरशरण सिंह के नाटकों का सिलसिला जो चार दिन चलेगा।
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सुचेतक रंग मंच मोहाली के चार दिवसीय वार्षिक उत्सव की शुरुआत पंजाब कला भवन में हुई। इसमें तंदूर नाटक पच्चीस मिनट और मेलो पचास मिनट तक चला।
ये नाटक ‘थड़ा शैली’ पर आधारित रहे। नाटक का मंचन चंडीगढ़ स्कूल ऑफ ड्रामा की ओर से किया गया। इसका निर्देशन इकहत्तर सिंह ने किया।
तंदूर नाटक नैना कांड से प्रेरित है जिसे तीन कलाकारों ने पेश किया। यह नाटक एक देशभक्त पिता (हरविंदर सिंह औजला) और उनके दामाद देविंदर सिंह (कुलबीर सिंह लकी) के इर्द गिर्द घूमता है।
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इन दोनों के विचारों को नाटक के केंद्र में रखा गया। राजनीति में होने वाले भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों का पर्दाफाश इसमें किया गया। देविंदर की पत्नी के रूप में शियोल दीप कौर की भूमिका एक दृढ़ नारी की रही। वह अपने पिता के देशभक्त होने पर गर्व करती है।
दूसरा नाटक मेलो रहा जिसकी कहानी इतिहास में नहीं है। गुरशरण सिंह ने एक अस्पताल की सच्ची घटना को नाटक का विषय बनाया।
यह गांव के ऐसे अस्पताल की कहानी है जिसमें शहर के डाक्टर टिकते ही नहीं। इसकी वजह से भ्रष्ट लोग अस्पताल में आने वाली सुविधाएं खुद इस्तेमाल कर लेते हैं।
एक नया और शरीफ डाक्टर आता है और गांव की समस्याओं को दूर करने के साथ ही अस्पताल की सुविधाओं को बेहतर कर देता है। नाटक में मेलो नामक दाई की अहम भूमिका है।
मेलो की भूमिका सुखविंदर कौर ने अदा की। इसके अतिरिक्त मलकीत सिंह रौणी, कुलबीर सिंह लकी और हरविंदर सिंह औजला ने भूमिका निभाई। इस नाट्य उत्सव में पेश किए जाने वाले सभी नाटक किसी ऐतिहासिक दौर की घटनाओं की याद दिलाएंगे।
कलाकारों को सम्मानित किया
पंजाब आर्ट्स काउंसिल के वाइस चेयरमैन एसएस विरदी और पंजाबी साहित्य अकादमी हरियाणा के सुखचैन मिस्त्री ने इस उत्सव से काफी समय से जुड़े लोगों को सम्मानित किया। इनमें गुरप्रीत कौर भंगू, रमन ढिल्लों, जसबीर ढिल्लों, दिलावर सिद्धू, अवतार, आरएम सिंह, संगीत शामिल रहे।