Haryana News: ई-टेंडरिंग पर वार्ता बेनजीता, मंत्री ने खड़े किए हाथ, सरपंच बोले- फिर बुलाया क्यों
करीब डेढ़ माह से सरपंच ई-टेंडरिंग के विरोध में आंदोलन कर रहे थे। सरपंचों के आंदोलन के बीच यह अहम बैठक मानी जा रही थी। अब तक सरकार ने सरपंचों के साथ कोई बैठक नहीं की थी।
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ई-टेंडरिंग और राइट टू रिकॉल समेत अन्य मांगों को लेकर सरंपच एसोसिएशन और प्रदेश सरकार के बीच हुई पहली बैठक में कोई सहमति नहीं पाई और बैठक बेनतीजा रही। यहां हरियाणा निवास में करीब तीन घंटे तक चली बैठक में विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली ई-टेंडरिंग के फायदे गिनाते रहे, जबकि सरपंच एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंत्री के सरपंचों को लेकर बोले शब्दों की निंदा करते रहे।
मांगों को मानने को लेकर मंत्री ने कहा कि उनके हाथ में कुछ नहीं है। वह ये मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। इस पर सरपंच बिफर गए और कहा कि जब मंत्री के हाथ में कुछ है नहीं तो फिर बैठक के लिए क्यों बुलाया? इसके बाद सरपंच बैठक से निकल लिए। सरपंचों ने सरकार को मंगलवार दोपहर 12 बजे तक का अल्टीमेटम दिया है। मांगें नहीं मानी गईं तो सरपंच बुधवार को पंचूकला में एकजुट होंगे और कूच करते हुए चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
दोपहर 12 बजे शुरू हुई बैठक तीन बजे तक चली। सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर सिंह के नेतृत्व में 27 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में पहुंचा। सरपंचों ने सरकार को अपनी 14 मांगों का ज्ञापन दिया, जिसे मंत्री ने पूरा करने में हाथ खड़े कर दिए। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। मंत्री ई-टेंडरिंग और नई व्यवस्था के फायदे गिनाते रहे, जबकि सरपंचों ने इसके नुकसान गिनाए। सहमति नहीं बनी बनने पर सबसे पहले सरंपच बाहर निकले और बाद में मंत्री। बैठक में पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल मलिक, पंचायत विभाग के महानिदेशक संजय जून समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
सरपंच बोले- आपने गलत शब्द क्यों बोले, मंत्री का जवाब- कोई क्लिपिंग दिखाओ
बैठक की शुरुआत में सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर सिंह समैण ने मंत्री के सरंपचों की नीयत को लेकर दिए गए बयान की निंदा की। साथ ही मंत्री से सवाल किया कि उन्होंने ऐसे शब्दों का प्रयोग क्यों किया। जवाब में मंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा कोई शब्द नहीं बोला, अगर कहा है तो कोई क्लिपिंग दिखाओ। हालांकि, सरपंच भी पीछे नहीं हटे और उन्होंने कहा कि ऐसी एक नहीं कई क्लिपिंग दिखा देंगे।
मंत्री की पीसी के दौरान सरपंचों की नारेबाजी
मंत्री देवेंद्र बबली जब मीडिया के बातचीत कर रहे थे तो हरियाणा निवास के बाहर सरपंच मंत्री और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
ये हैं मांगें
- संविधान के 73वें संशोधन के अनुसार पंचायतों को 29 अधिकार पूर्ण रूप से दिए जाएं
- राइट टू रिकॉल एक्ट रद्द किया जाए
- 50 लाख रुपये से ऊपर के कार्यों पर ही ई-टेंडरिंग लागू की जाए
- सरपंचों का मानदेय 30 हजार और पंचों का 5 हजार रुपये हो
- पूर्व सरपंचों को पेंशन सुविधा दी जाए
- सरपंचों का प्रदेश में टोल फ्री हो
- मनरेगा की मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन हो और ऑनलाइन हाजिरी बंद की जाए
- मनरेगा का भुगतान हर तीन माह बाद ब्लाक स्तर हो
- पंचायतों के लिए ऑपरेटर नियुक्त हों
- पंचायतों के प्रस्ताव में विधायकों का दखल बंद किया जाए
सरपंचों के लगातार फोन आ रहे थे, इसलिए उनको बुलाया था और फीडबैक लिया। सरपंचों की मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा, क्योंकि ई-टेंडरिंग का फैसला सरकार का है। अगर संभव हुआ तो कल मुख्यमंत्री के साथ सरपंच एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की बैठक कराई जाएगी। हमने सरपंचों ने अनुरोध किया है कि वह ई-टेंडरिंग प्रणाली को लागू करके काम करके देखें, अगर कोई दिक्कत हैं तो इस पर विचार कर लिया जाएगा। - देंवेंद्र बबली, विकास एवं पंचायत मंत्री।
बैठक में किसी भी मांग पर सहमति नहीं बन पाई। मंत्री केवल ई-टेंडरिंग का गुणगान करने आए थे। मांगों को लेकर उन्होंने कहा कि उनके हाथ में कुछ नहीं है, मुख्यमंत्री के सामने मामला रखेंगे। सरपंचों का आंदोलन जारी रहेगा। मांगें पूरी होने तक सरपंच पीछे हटने वाले नहीं हैं। यह लड़ाई ई-टेंडरिंग की नहीं, बल्कि ग्राम पंचायतों के मान-सम्मान और अधिकार की है। -रणबीर सिंह समैण, प्रदेशाध्यक्ष, सरपंच एसोसिएशन।
पंचायत मंत्री के साथ 12 बिंदुओं पर बातचीत हुई। बड़ा मसला ई-टेंडरिंग का था। हम ई-टेंडरिंग व अन्य मुद्दों पर तुरंत कार्रवाई चाह रहे हैं। सरकार को मंगलवार दोपहर 12 बजे तक का समय दिया गया है। अगर सरकार मांगें मान लेती है तो ठीक, अन्यथा एक मार्च को सीएम आवास का घेराव किया जाएगा। -चंद्रमोहन पोटलिया, प्रदेश प्रवक्ता, सरपंच एसोसिएशन।