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मिलिए, बिन भाइयों की बेटियों के अनोखे 'मामा' से

Mon, 08 Dec 2014 02:19 PM IST
सतीश सैनी/अमर उजाला, नारनौल
सतीश सैनी/अमर उजाला, नारनौल Updated Mon, 08 Dec 2014 02:19 PM IST
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Meet to Unique Uncle of Girls who has no Brother

भांजा या भांजी की शादी में मामा भात लेकर आते है। यह देश की परंपरा व संस्कृति है। ऐसे में अगर भांजा या भांजी के मामा ही न हो तो शादी की रस्म अधूरी रह जाती है।

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इसी अहसास को समझते हुए शहर के एक समाजसेवी सुरेश सैनी ने अनूठी पहल की है। उन्होंने फैसला लिया है कि क्षेत्र में अगर किसी भी बहन के भाई नहीं है तो वह उनके दरवाजे पर आकर गुड़ की भेली (भात भरवाने का न्यौता) रख दे।
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उस महिला का भात अपनी बहन के भात की तरह भरा जाएगा। इस पहल की पहली शुरूआत उन्होंने शहर के मोहल्ला चौधरीयान से की।

समाजसेवी कार्यों में आगे रहते हैं ये

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सुरेश सैनी क्षेत्र में समाजसेवी के लिए काफी प्रसिद्ध है। इसी समाजसेवा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह अनूठी पहल शुरू की है। इस पहल की शुरूआत समाजसेवी ने मोहल्ला चौधरीयान से की। यहां ममता देवी नामक महिला की बेटी की शादी आज थी।

आपको बता दें कि ममतादेवी के कोई भाई नहीं है। माता-पिता का भी देहांत हो चुका है। इसी के चलते अपनी बड़ी बेटी की शादी में भात भरने की टेंशन उसे परेशान कर रही थी।

ममता देवी को समाजसेवी की सोच के बारे में पता चला तो वह 2 नवंबर को उनके घर गई और गुड़ की भेली (भात भरने का न्यौता) देकर आई। उनके द्वारा बताए गए सामान की लिस्ट तैयार की गई और समाजसेवी पहुंच गए अपनी बहन का भात भरने।

पांच आभूषण समेत 11 हजार की दी राशि

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भात भरने की रस्म अदा की जा रही थी। इस भात में भाती बने सुरेश सैनी ने परिवार व रिश्तेदारों को रस्म के तहत कपड़े व रुपये दिए। इसमें लड़की के कपड़े और पांच आभूषण भी दिए। इसके बाद थाली में भात के नाम पर 11 हजार रुपये भी रखे।

इस मौके पर वरिष्ठ नागरिक संगठन के प्रधान पीके चौधरी, सुभाष संघी, बाबा कुशाल, सुरेश जांगड़ा, रामकरण, सुभाष, सुनील, दिनेश, दयानंद, अशोक, राजेंद्र व डा. राजकुमार भी मौजूद थे। इसके अलावा सुरेश सैनी की पत्नी सोनू सैनी भी परिवार के अन्य सदस्य के साथ पहुंची।

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जब तक जीऊगां, निभाऊंगा परंपरा

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इस पहल के बारे में ‘अमर उजाला’ से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान की कृपा से पैसों की कमी नहीं है। वैसे भी खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है।

अगर इस बहाने कमाई का कुछ हिस्सा इस तरह के काम में लगाएंगे तो परंपरा भी जीवित रहेगी। इसी सोच के चलते उन्होंने यह प्रण लिया है कि क्षेत्र में अगर किसी बहन के भाई नहीं है या फिर भाई भात भरने में समक्ष नहीं है तो वह उनके हुडा सेक्टर में स्थित मकान नं. 254 में आए और भात का न्यौता दे।

चाहे वह किसी गांव या शहर की हो या फिर किसी भी जाति की। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। बस, यह है कि शादी-ब्याह में यह परंपरा जीवित रहनी चाहिए।

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