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दवाओं पर बैन ने बढ़ाई टेंशन, 3 की बजाय 9 गोलियां खानी पड़ेंगी

Tue, 22 Mar 2016 09:35 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 22 Mar 2016 09:35 AM IST
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medicine - फोटो : File
फिक्स डोज कॉम्बिनेशन की 344 दवाओं पर रोक संबंधी अचानक आदेश के बाद से लोगों और डॉक्टर दोनों की परेशानी बढ़ गईं हैं। इन दवाओं में एंटी-डायबिटिक, कफ, एंटी-इन्फ्लैमटोरी मेडिसिन शामिल हैं। हालांकि कुछ कंपनियां रोक के विरोध में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची हुईं हैं, लेकिन कुछ कंपनियों ने अपनी कॉम्बिनेशन की दवाएं वापस लेना शुरू कर दी हैं। इससे सबसे ज्यादा दिक्कतें डायबिटिक पेशेंट को आ रहीं हैं, क्योंकि कॉम्बिनेशन की सबसे ज्यादा दवाएं एंटी-डायबिटिक हैं।
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इस तरह बढ़ गई परेशानी
फिक्स डोज कॉम्बिनेशन की एंटी डायबिटिक दवाएं बंद होने से मरीजों को अब अलग-अलग दवाएं खानी पड़ेंगी। मान लीजिए कि एक मरीज को दिन में तीन गोलियां खानी पड़ रही थी। अब उन्हें दिन में नौ गोलियां खानी पड़ेंगी। क्योंकि सभी प्रकार की कांप्लिकेशन की दवाएं अब अलग-अलग खानी पड़ेंगी। एक मरीज के लिए अचानक से इतनी गोलियां खाना मुश्किल होता है। अब उन्हें फिर से मॉनिटर करना पड़ेगा। उनके शुगर के स्तर को जांचना होगा कि कौन से दवाएं उन्हें सूट कर रही हैं और कौन सी नहीं।
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कंपनी को दवा वापस लेने के निर्देश
चंडीगढ़ के ड्रग कंट्रोलर के मुताबिक रोक संबंधी आदेश जारी होने के बाद सभी कंपनियों को अपनी दवाएं वापस करने के निर्देश जारी हो गए हैं। कुछ कंपनियों ने कॉम्बिनेशन की अपनी दवाएं वापस लेनी शुरू भी कर दी हैं। विभाग की ओर से जांच भी की जा रही है। इस बारे में सर्कुलर भी जारी किए जा रहे हैं। जो भी सेंटर से आदेश आएंगे, उसी के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
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पेशेंट फोन करके पूछ रहे हैं कि इस समस्या का क्या हल है? उन्हें बताया जा रहा है कि अब उन्हें हर दिक्कत की अलग-अलग मेडिसिन खानी होगी। इस हिसाब से उनकी गोलियां भी बढ़ेंगी।

- डॉ. संजय बडाडा, एडिशनल प्रोफेसर पीजीआई इंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट

दवाएं बंद होने से मरीजों को परेशानी आएगी। खासकर उन मरीजों को जिनकी उम्र 50 साल से ऊपर है। उन्हें अब खुराक ज्यादा खानी पड़ेगी। कई मरीज ऐसे हैं, जो रंगों से गोलियों की पहचान करते हैं। जब गोलियां बढ़ेंगी तो उन्हें पहचानना भी मुश्किल होगा। सरकार को चाहिए था कि वे कुछ समय देते, जिससे मरीज को भी आसानी होती।
- डा. संजीव भाटिया, डायरेक्टर ग्लोबल हेल्थ केयर

 
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