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Hindi News ›   Chandigarh ›   Mealybug Entered in Chandigarh, Dangerous for Trees and Human Being

हरियाली के दुश्मन ‘मिलीबग’ की चंडीगढ़ में दस्तक, पेड़ों के लिए खतरा, इंसान के लिए भी हानिकारक

Sat, 29 Feb 2020 03:01 PM IST
खुशबू गोयल अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 29 Feb 2020 03:01 PM IST
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हरियाली का दुश्मन कहे जाने वाले ‘मिलीबग’ ने सिटी ब्यूटीफुल में दस्तक दे दी है। सेक्टर- 44 के कई पेड़ों में यह बग लगा हुआ है। इससे ग्रीन सिटी की हरियाली को खतरा पैदा हो गया है। मिलीबग पेड़ों के पोषक तत्वों को चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है, जिससे उनके गिरने और सूखने का खतरा पैदा हो जाता है। चंडीगढ़ में लगभग 14 लाख से अधिक पेड़ हैं।
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इनमें 1,65,000 पेड़ों की देखरेख नगर निगम करता है। यूटी प्रशासन के पास 22 हजार पेड़ों की देखरेख का जिम्मा है। इसके अलावा लगभग 50 हजार पेड़ लोगों के घरों में लगे हुए हैं, जिनकी देखरेख लोग स्वयं करते हैं। 10 लाख से अधिक पेड़ों की देखरेख वन विभाग करता है। शहर में लगे पेड़ों को चंडीगढ़ की आधारशिला रखे जाने के बाद 1952 में रोपित किया गया था।
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60 दशकों के बाद शहर की हरियाली के कारण ही वर्ष शहर को वर्ष 2017 में ग्रीन एंड क्लीन सिटी का अवार्ड मिला था। यह अवार्ड केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नगर निगम चंडीगढ़ की तत्कालीन मेयर आशा जायसवाल को महाराष्ट्र में आयोजित हुए एक समारोह के दौरान दिया था। सेक्टर- 44 के कई एल्स्टोनिया पेड़ों में यह बग देखा गया है।
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आसपास रहने वाले लोगों के घरों में भी यह घुस रहा है। इससे लोग खासे परेशान हैं। उद्यान विभाग और प्रशासन की अनदेखी के बाद लोग स्वयं इस बग से छुटकारा का प्रयास कर रहे हैं।

कैसा होता है मिलीबग

मिलीबग बारीक सफेद बेलनाकार कीट है। यह अधिकांश फलदार वृक्षों की टहनियों पर चिपक कर पौधे का रस चूस जाता है। इन कीटों की संख्या इतनी अधिक होती है कि दो से छह इंच लंबी डाली पर चारों ओर से इस तरह से चिपक जाते हैं कि वह फफूंद जैसा दिखाई देने लगता है। इसके प्रकोप से पौधा धीरे धीरे से सूखने लगता है। साथ ही पेड़ पर लगे फल भी नष्ट हो जाते हैं।

ये पेड़ भी हो रहे शिकार
चंडीगढ़ में मिलीबग एल्स्टोनिया और सिल्वर ओक में भी देखा गया है। आमतौर पर यह बग फलदार पेड़ों के साथ कपास के वृक्षों में ही लगता है। चंडीगढ़ में आम, लोकाट, अमरुद, शहतूत, जामुन, चीकू, लीची, चकोतरा, नींबू, कटहल, कीन्नू आदि फलों के वृक्ष हैं।

शहर के पेड़ों में मिलीबग की समस्या है। उद्यान विभाग इस पर नियंत्रण के लिए प्रयास कर रहा है। सेक्टर- 44 में लगे पेड़ों का जल्द ही ट्रीटमेंट कराया जाएगा।
- प्रभारत किरन, उद्यान विभाग, यूटी

चंडीगढ़ में कई सालों से मिलीबग पेड़ों में लग रहा है। कई बार नगर निगम, प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं।
- राहुल महाजन, उद्यान विशेषज्ञ, चंडीगढ़

नियंत्रण के उपाय

जैविक: हल्के से भी संक्रमण होने पर कीट लगे स्थान पर तेल या स्पिरिट लगा दें। इसके साथ ही प्रभावित स्थान को गर्म पानी तथा डिटर्जेंट, पेट्रोलियम तेल या कीटनाशक साबुन से भी धो सकते हैं। इन्हें फैलने से रोकने के लिए समीवर्ती पौधों पर नीम के तेल का छिड़काव भी किया जा सकता है।

रासायनिक: हालांकि मिलीबग का रासायनिक उपचार कठिन है। इसके पीछे का कारण ये कीट प्रतिकूल वातावरण से मोम की परतों तथा रेशों के कारण सुरक्षित रहता है। इसके बाद भी इमिडाक्लोप्रिड, एसिटामिप्रिड और क्लोरपायरिफ्रोस कीटनाशक के स्प्रे किया जा सकता है।
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