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Chandigarh News: मतदान से तीस मिनट पहले टला मेयर चुनाव, पार्षदों का हंगामा, अब 6 फरवरी को मतदान
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चंडीगढ़। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव वीरवार को मतदान से कुछ देर पहले टाल दिया गया। सुबह 11 बजे मतदान शुरू होना था लेकिन आधा घंटा पहले ही एक आदेश जारी कर कहा गया कि पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत खराब हो गई है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षद चुनाव के लिए निगम पहुंच गए थे। जानकारी मिलने पर उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव हार रही थी, इसलिए चुनाव ही टलवा दिया। उधर, डीसी ने शाम को आदेश जारी कर चुनाव की नई तिथि छह फरवरी घोषित कर दी। मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने पहली बार गठबंधन कर भाजपा के खिलाफ ताल ठोकी है। नगर निगम की ओर से घोषणा की गई थी कि वीरवार (18 जनवरी) सुबह 11 बजे मेयर चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी। गठबंधन के प्रत्याशी कुलदीप कुमार टीटा और भाजपा प्रत्याशी मनोज सोनकर के बीच मेयर पद पर मुकाबला था। वर्तमान में गठबंधन के पास 20 वोट हैं जबकि भाजपा के पास 15। कोई उलटफेर नहीं होता तो गठबंधन का मेयर बनना तय था।
चुनाव में हिस्सा लेने के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सभी पार्षद रोपड़ से सुबह करीब 10:30 बजे नगर निगम कार्यालय पहुंचे। उन्हें वहां पहुंचकर पता चला कि मेयर चुनाव टाल दिया गया है। इससे आप और कांग्रेस के सभी पार्षद आग-बबूला हो उठे। सभी ने नारेबाजी करते हुए कहा कि भाजपा देश से चुनाव खत्म करना चाहती है। यह उदाहरण है कि भाजपा अगर कहीं भी हार रही होगी तो वह चुनाव ही नहीं कराएगी। इस मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों ने कहा कि अगर मेयर चुनाव नहीं होना है तो भी उन्हें नगर निगम कार्यालय में जाना है लेकिन पुलिस ने नहीं जाने दिया।
निगम के गेट पर बैठकर पार्षदों ने की नारेबाजी
पार्षदों को पुलिस ने निगम के अंदर नहीं जाने दिया। कुछ पार्षदों ने पुलिस अधिकारियों से बात की और कहा कि वह निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। जनता ने उन्हें वोट दिया है और नगर निगम उनका हाउस है। वह हाउस में जाने से नहीं रोक सकते लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी। इसके बाद गठबंधन के पार्षदों ने नगर निगम के गेट पर ही बैठकर प्रदर्शन किया और अपना रोष जाहिर किया। पार्षद गुरप्रीत गाबी ने कहा कि चुनाव टालकर भाजपा ने साबित कर दिया है कि वह बुरी तरह से डरे हुए हैं। यह राजनीति का सबसे निचला स्तर है। सचिन गालव ने कहा कि दो राज्यों की राजधानी का यह हाल है, जहां एक चुनाव नहीं कराया जा रहा। ये लोकतंत्र के लिए काला दिन है।
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पहले व्हाट्सएप पर आया मैसेज, फिर जारी हुआ आदेश
मेयर चुनाव न होने का मैसेज पहले पार्षदों के व्हाट्सएप ग्रुप में आया। उसके काफी देर बाद नगर निगम की संयुक्त आयुक्त की तरफ से आदेश जारी किया गया। सभी पार्षदों को लिखे मैसेज में कहा गया कि ''अनिल मसीह के खराब स्वास्थ्य के संबंध में एक टेलीफोन संदेश प्राप्त हुआ है, जिन्हें चंडीगढ़ नगर निगम (प्रक्रिया और व्यवसाय का संचालन) विनियमन 1996, विनियम 6(1) के साथ पठित 60 (ए) के तहत मेयर पद के लिए 18 जनवरी को होने वाली बैठक के लिए पीठासीन प्राधिकारी के रूप में नामित किया गया है। उपरोक्त के मद्देनजर, अगले आदेश प्राप्त होने तक नगर निगम कार्यालय न पहुंचें।''
गिरफ्तारी के डर से पार्षदों को भेजा पंजाब सीएम आवास
चुनाव टलने की जानकारी मिलने के बाद कुछ देर तक पार्षदों ने अपना रोष जाहिर किया और भाजपा व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। धीरे-धीरे पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया। राजनीति दलों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेना शुरू कर दिया। पार्षदों को लगा कि पुलिस उन्हें भी गिरफ्तार कर लेगी। कुछ पार्षदों ने कहा कि यह भाजपा की साजिश है। उन्हें गायब कर चुनाव में लाभ लेने की कोशिश की जा सकती है इसलिए कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के सभी पार्षद मौके से हट गए और अलग-अलग गाड़ियों में उन्हें पंजाब मुख्यमंत्री आवास भेज दिया गया।
नगर निगम कार्यालय के आसपास घूमते रहे सभी पार्टियों के समर्थक
पुलिस ने नगर निगम को छावनी में तब्दील कर दिया था। करीब 600 पुलिस जवानों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स तैनात रही। आईटीबीपी के जवानों को भी मोर्चे पर लगाया गया था। सुबह नौ बजे से नगर निगम की तरफ आने-जाने वाले सभी रास्तों पर नाके लगा दिए गए थे। इसके बावजूद सभी पार्टियों के समर्थक नगर निगम कार्यालय के आसपास घूमते रहे। आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता प्लाजा तो कुछ अर्बन पार्क में मौजूद रहे। कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता होटल शिवालिक के पास नजर आए। भाजपा के कार्यकर्ता भी कई पार्किंग में कारों में बैठे दिखे।
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चुनाव में हिस्सा लेने के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सभी पार्षद रोपड़ से सुबह करीब 10:30 बजे नगर निगम कार्यालय पहुंचे। उन्हें वहां पहुंचकर पता चला कि मेयर चुनाव टाल दिया गया है। इससे आप और कांग्रेस के सभी पार्षद आग-बबूला हो उठे। सभी ने नारेबाजी करते हुए कहा कि भाजपा देश से चुनाव खत्म करना चाहती है। यह उदाहरण है कि भाजपा अगर कहीं भी हार रही होगी तो वह चुनाव ही नहीं कराएगी। इस मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों ने कहा कि अगर मेयर चुनाव नहीं होना है तो भी उन्हें नगर निगम कार्यालय में जाना है लेकिन पुलिस ने नहीं जाने दिया।
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निगम के गेट पर बैठकर पार्षदों ने की नारेबाजी
पार्षदों को पुलिस ने निगम के अंदर नहीं जाने दिया। कुछ पार्षदों ने पुलिस अधिकारियों से बात की और कहा कि वह निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। जनता ने उन्हें वोट दिया है और नगर निगम उनका हाउस है। वह हाउस में जाने से नहीं रोक सकते लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी। इसके बाद गठबंधन के पार्षदों ने नगर निगम के गेट पर ही बैठकर प्रदर्शन किया और अपना रोष जाहिर किया। पार्षद गुरप्रीत गाबी ने कहा कि चुनाव टालकर भाजपा ने साबित कर दिया है कि वह बुरी तरह से डरे हुए हैं। यह राजनीति का सबसे निचला स्तर है। सचिन गालव ने कहा कि दो राज्यों की राजधानी का यह हाल है, जहां एक चुनाव नहीं कराया जा रहा। ये लोकतंत्र के लिए काला दिन है।
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पहले व्हाट्सएप पर आया मैसेज, फिर जारी हुआ आदेश
मेयर चुनाव न होने का मैसेज पहले पार्षदों के व्हाट्सएप ग्रुप में आया। उसके काफी देर बाद नगर निगम की संयुक्त आयुक्त की तरफ से आदेश जारी किया गया। सभी पार्षदों को लिखे मैसेज में कहा गया कि ''अनिल मसीह के खराब स्वास्थ्य के संबंध में एक टेलीफोन संदेश प्राप्त हुआ है, जिन्हें चंडीगढ़ नगर निगम (प्रक्रिया और व्यवसाय का संचालन) विनियमन 1996, विनियम 6(1) के साथ पठित 60 (ए) के तहत मेयर पद के लिए 18 जनवरी को होने वाली बैठक के लिए पीठासीन प्राधिकारी के रूप में नामित किया गया है। उपरोक्त के मद्देनजर, अगले आदेश प्राप्त होने तक नगर निगम कार्यालय न पहुंचें।''
गिरफ्तारी के डर से पार्षदों को भेजा पंजाब सीएम आवास
चुनाव टलने की जानकारी मिलने के बाद कुछ देर तक पार्षदों ने अपना रोष जाहिर किया और भाजपा व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। धीरे-धीरे पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया। राजनीति दलों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेना शुरू कर दिया। पार्षदों को लगा कि पुलिस उन्हें भी गिरफ्तार कर लेगी। कुछ पार्षदों ने कहा कि यह भाजपा की साजिश है। उन्हें गायब कर चुनाव में लाभ लेने की कोशिश की जा सकती है इसलिए कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के सभी पार्षद मौके से हट गए और अलग-अलग गाड़ियों में उन्हें पंजाब मुख्यमंत्री आवास भेज दिया गया।
नगर निगम कार्यालय के आसपास घूमते रहे सभी पार्टियों के समर्थक
पुलिस ने नगर निगम को छावनी में तब्दील कर दिया था। करीब 600 पुलिस जवानों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स तैनात रही। आईटीबीपी के जवानों को भी मोर्चे पर लगाया गया था। सुबह नौ बजे से नगर निगम की तरफ आने-जाने वाले सभी रास्तों पर नाके लगा दिए गए थे। इसके बावजूद सभी पार्टियों के समर्थक नगर निगम कार्यालय के आसपास घूमते रहे। आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता प्लाजा तो कुछ अर्बन पार्क में मौजूद रहे। कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता होटल शिवालिक के पास नजर आए। भाजपा के कार्यकर्ता भी कई पार्किंग में कारों में बैठे दिखे।