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चावल कारोबारियों को झटका: हरियाणा में बारीक धान खरीद पर मार्केट फीस बढ़ी, करनी होगी 2.5 फीसदी शुल्क की अदायगी

Fri, 25 Jun 2021 01:42 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल/कैथल (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल/कैथल (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Fri, 25 Jun 2021 01:42 AM IST
सार

मार्केट फीस में फिर वृद्धि से हरियाणा का बासमती धान पड़ोसी राज्यों दिल्ली और पंजाब में बिकेगा। दिल्ली में मार्केट फीस व एचआरडीसी केवल एक फीसदी है, जबकि पंजाब में दो फीसदी है। हरियाणा में अब यह 2.50 फीसदी हो गई है। एचआरडीएफ में भी डेढ़ प्रतिशत की बढ़ोतरी का पत्र किसी भी समय जारी हो सकता है। जिससे यह कुल चार फीसदी हो जाएगी।

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Market fee increased on procurement of fine paddy in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

धान खरीद के सीजन से पहले ही हरियाणा सरकार ने राइस मिलर्स, राइस एक्सपोर्टर्स और अन्य धान खरीदारों को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने लॉकडाउन के दौरान घटाई मार्केट फीस को एक बार फिर 0.5 प्रतिशत से 2.0 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि अभी एचआरडीएफ को बढ़ाने का आदेश जारी नहीं किया गया है। 

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मार्केट कमेटी सचिव रोशन लाल ने बताया कि इस संबंध में बुधवार को ही आदेश प्राप्त हुए हैं। बारीक धान की खरीद पर अब खरीदारों को 1.00 प्रतिशत के स्थान पर 2.50 प्रतिशत शुल्क अदा करना होगा। इसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले धान की कीमत पर पड़ेगा।
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साथ ही चावल निर्यातकों और चावल के अन्य खरीददारों की लागत बढ़ेगी। प्रतिस्पर्धा में हरियाणा का चावल अन्य राज्यों की तुलना में महंगा हो जाएगा। हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन ने फैसले पर रोष जताया है और सीएम से मिलकर फिर से इसे पिछले साल की भांति करने की मांग की जाएगी।
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यह है व्यवस्था
हरियाणा की अनाज मंडियों में बारीक धान आदि की खरीदारी पर 2 प्रतिशत मार्केट शुल्क और 2 प्रतिशत हरियाणा रूरल डेवलेपमेंट फंड (एचआरडीएफ) देना होता था। सरकार ने महामारी और लॉकडाउन को देखते हुए सितंबर-2020 में बारीक धान पर मार्केट फीस को 0.5 प्रतिशत व एचआरडीएफ को भी 0.5 प्रतिशत कर दिया था, इससे व्यापारी को कुल 1.00 प्रतिशत शुल्क ही देना होता था।

कोरोना की दूसरी लहर के अवसान पर स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड पंचकूला के मुख्य प्रशासक विनय सिंह ने 22 जून को नोटिफिकेशन जारी कर मार्केट फीस को एक बार 0.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.0 प्रतिशत कर दिया है। इससे अब बारीक धान खरीदने वालों को 0.5 प्रतिशत एचआरडीएफ और 2.0 प्रतिशत मार्केट फीस कुल 2.5 प्रतिशत शुल्क की अदायगी करनी होगी। 

चावल निर्यात पर सीधा प्रभाव
जो मोटा धान सरकार एमएसपी पर खरीदती है, उस पर तो कोई प्रभाव नहीं होगा लेकिन जो धान एमएसपी पर नहीं खरीदा जाता, जैसे बासमती, उसकी अन्य किस्में 1509, डुप्लीकेट बासमती, 1121, मोछल, सरबती आदि कई किस्म के धान की खरीद पर इसका 2.5 प्रतिशत शुल्क देना होगा। खासकर जो चावल बाजार में महंगे भाव बिकता है या फिर जो बेहतर गुणवत्ता का चावल एक्सपोर्ट किया जाता है, उस पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।

पिछले साल एचआरडीएफ और मार्केट कमेटी फीस को कम करके आधा-आधा प्रतिशत कर दिया था। इससे हरियाणा के चावल निर्यातकों और अन्य खरीददारों को राहत मिली थी और उन्होंने अपनी बचत का कुछ हिस्सा किसानों को बढ़ी कीमत के रूप में दिया था। अब उनकी लागत बढ़ेगी, इससे कैथल से करीब डेढ़ लाख टन चावल के लिए निर्यातकों की लागत बढ़ेगी तो पंजाब और दूसरे राज्यों के निर्यातक इस बात का फायदा उठाएंगे। इस फैसले का किसानों, आढ़तियों, मिलर्स और निर्यातकों पर काफी गंभीर असर होगा। इस संबंध में जल्द ही एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम मनोहर लाल से मिलेगा। - अमरजीत छबड़ा, प्रधान, हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन।

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