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मैंगों मेला में देखने को मिली आम की विभिन्न प्रजातियां, लो शुगर आम की रही चर्चा

Sun, 08 Jul 2018 10:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिंजौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिंजौर Updated Sun, 08 Jul 2018 10:50 AM IST
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 Many varietes of mango found in mango fair
मैंगो मेला
यादविंद्रा गार्डन में दो दिवसीय 27वें मैंगो मेले के प्रथम दिन विदेशों से निर्यात होने वाली किस्मों के अलावा देश-विदेश में अपने स्वाद का डंका बजाने वाली विभिन्न किस्में प्रदर्शित की गई। एक तरफ जहां चार किलो वजन का हाथी चिंघाड़ था, तो वहीं दूसरी ओर पांच ग्राम का अंगूरलता आम भी मैंगो मेले में देखने को मिला।
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अपनी खूबसूरती और स्वाद के लिए हुस्नआरा आम भी था तो दूसरी ओर शुगर के मरीजों के लिए लो शुगर आम भी मेले में प्रदर्शित किया गया। मैंगो मेले में पहुंचने वालों को हैरानी तब होती है जब पूरे देश से आई आमों की विभिन्न किस्मों को एक साथ देखते हैं और विशेष कर वो किस्में जो उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखी। 
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इन प्रजातियों पर रही खास नजर

 Many varietes of mango found in mango fair
अंबिका आम की प्रजाति
अंबिका: आम की हाइब्रिड किस्म और स्वाद के लिए पसंद की जा रही है। इसका फ्लेवर भी लाजवाब है।
टामी एंटकिन: स्वाद के साथ-साथ इसमें लो शुगर होने के चलते इसे डायबिटीज के मरीज भी स्वाद से खाते हैं। इसके अलावा इस पर फ्रूट फ्लाई का असर भी कम होता है। सामान्य आमों की तुलना में इस आम को 10 से 15 दिनों तक स्टोर किया जा सकता। इसकी लो शुगर और स्वाद के कारण इसे विदेशों से भी निर्यात किया जाता है।
  
अंबिका: इसकी मिठास अच्छी व टीटीएस वैल्यू के चलते एक्सपोर्ट क्वालिटी है। इसका टीटीएस आम तौर पर 24 होता है। जैसे-जैसे आम पकने लगता है इसकी खूबसूरती और रंग पर और निखार आता जाता है।

 पूसा अरुणिमा: आम की यह किस्म जुलाई के अंत में तैयार होती है जिस वजह से इसका किसानों को अच्छा मूल्य मिलता है।
  हाथी चिंघाड़: बड़ा आम जिसका वजन चार किलो तक होता है।
अंगूर लता: यह आम अंगूर की तरह होता है जिसका वजन पांच ग्राम तक हो सकता है।

 

मेले में आम के पौध की भी कर सकते हैं खरीददारी

 Many varietes of mango found in mango fair
मैंगो मेला में प्रदर्शित आम की प्रजाति
मैंगो मेले में आम के पौधे को बेचने के लिए भी रखा गया, जिसमें आमों की विभिन्न किस्में मौजूद थी। फ्रूट एक्सपर्ट राकेश कुमार ने बताया कि जहां पहले आम के पेड़ों की विभिन्न किस्मों की ऊंचाई और चौड़ाई अधिक होती थी। वहीं, दूसरी ओर आम की फसल कम आती थी। लेकिन अब आम की विभिन्न किस्में और हाइब्रिड तैयार हो चुकी हैं जिनमें कम समय में ही आम की फसल आ जाती है।

राकेश ने बताया कि यहां से खरीद कर ले जा रहे तकरीबन सभी आम के पौधों में तीन साल में ही आम आने शुरू हो जाते हैं और समय के साथ-साथ हर साल पेड़ पर आम लगने की क्षमता बढ़ती जाती है। आजकल आम के बौने पौधे भी आ रहे हैं। आम की अब ऐसी किस्में भी आई हैं जिसमें आम हर साल आते हैं जबकि पहले एक सीजन में आम अधिक आते थे तो दूसरे सीजन में या तो आते ही नहीं थे या बहुत कम आते थे।
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