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पुलिस के चेहरे पर कई दाग लगा गया यह साल
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 30 Dec 2013 01:24 PM IST
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वर्ष 2013 में ऐसे कई मामले आए जिससे पुलिस विभाग विवादों में रहा। साल की शुरुआत आईजी आरपी उपाध्याय के आने से हुई। साल के अंत में एसएसपी नौनिहाल सिंह गए और नए एसएसपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल ने ज्वाइन किया।
लेकिन कई ऐसे मामले रहे जिन्हें पुलिस सुलझा नहीं पाए। इस साल नाबालिगों के गायब होने का सिलसिला जारी रहा। अब तक पुलिस 253 अपहरण के मामले दर्ज कर चुकी है।
साल 2013 में ये वारदातें रहीं चर्चा में
जनवरी माह में पांच साल की बच्ची हरमेनी का अपहरण सेक्टर-22 के होटल में हुआ। अपहरणकर्ताओं ने एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। पुलिस ने बाद में बच्चे को बरामद कर लिया था।
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फरवरी में सीबीआई ने आयकर विभाग के अधिकारी राकेश कुमार जैन को 50 हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया। यह रिश्वत प्रापर्टी डीलर से ली गई थी।
पुलिस पर लगे आरोप
मार्च में हाईकोर्ट में एक वकील के साथ हेड कांस्टेबल की हाथापाई हुई। इसे लेकर वकीलों ने प्रदर्शन किया
अप्रैल में सब इंस्पेक्टर अमनजोत पर सेक्टर-20 के प्रापर्टी डीलर ने आरोप लगाए थे। उसका कहना था कि एसआई ने हाथापाई की और दुकान की चाबियां ले गया। आरोप था कि प्रापर्टी डीलर ने सब इंस्पेक्टर की 10 लाख रुपये की राशि देनी थी। इस पर अमनजोत के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था।
मई में गोल्फ क्लब में हुए विवाद में पुलिस ने पूर्व एथलीट मिल्खा सिंह, पंजाब के विधायक और एक पूर्व आर्मी अधिकारी पर मामला दर्ज किया था। बाद में पुलिस को यह एफआईआर खारिज करनी पड़ी
जून में बर्खास्त कांस्टेबल ने इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह की हत्या की। पुलिस ने सुच्चा सिह को शहीद घोषित किया लेकिन अभी तक उनके बेटे को एएसआई की नौकरी नहीं दिलवा पाई है।
जुलाई में सेक्टर-17-18 की विभाजक सड़क पर एक ऑडी ने दो छात्रों सहित एक चालक को टक्कर मार दी जिससे गाजियाबाद निवासियों की मौत हो गई थी। पुलिस ने टवेरा सवार मृतकों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। इसके बाद एसएसपी ने तत्कालीन थाना प्रभारी राम गोपाल को लाइन हाजिर कर दिया था।
नवंबर में‘सूद का खेल, पुलिस का मेल’ मामला बेहद चर्चित रहा। पंचकूला के गायब हुए व्यापारी विक्रम धीमान ने सब इंस्पेक्टर सेखों दपंति पर आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में सुरक्षा की अपील की।
याचिका के अनुसार विक्रम ने सेखों दपंति से ढाई करोड़ रुपये की राशि 6 प्रतिशत ब्याज पर ली थी। इस केस के बाद ही यह बात सामने आई कि शहर के कई और पुलिस अधिकारियों ने भी विक्रम को लाखों रुपये की राशि ब्याज पर दी हुई है।
दिसंबर में पलसौरा बेबी मर्डर केस में पुलिस की जमकर किरकिरी हो रही है क्योंकि अभी तक आरोपियों का सुराग नहीं लग पाया है।
नवंबर से लेकर दिसंबर माह तक आधा दर्जन से ज्यादा नाबालिग ऐसे हैं जिनके गायब होने के बाद पुलिस अभी तक उनका सुराग नहीं लगा पाई है। इस केस के दौरान ही पूर्व एसएसपी नौनिहाल सिंह शहर से गए और नए एसएसपी ने ज्वाइन किया।
दिसंबर में ही पूर्व एसएसपी नौनिहाल पर उनके ही दोस्त जसविंदर वालिया ने गंभीर आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अरजी दाखिल की। वालिया ने जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा मांगी थी।
दिसंबर में ही सेक्टर-8 के डिस्को के बाहर नशे में बेसुध पड़ी युवती को पुलिस अस्पताल ले जाने की बजाय पुलिस थाने ले गई। इस मामले में एसआई को लाइन हाजिर कर दिया गया था।
दिसंबर माह जाते जाते भी पुलिस की वर्दी पर दाग लगा गया। पांच कांस्टेबलों पर छात्रा के साथ गैंगरेप का आरोप लगा। इस मामले की जांच के लिए लिए पुलिस ने एसआईटी की टीम का गठन किया।
कई अच्छे कदम भी उठाए
जनवरी माह में सेक्टर-25 में शूटिंग रेंज का उद्घाटन हुआ
पुलिस कंपलेंट अथॉरिटी का नए सिरे से गठन हुआ जिसमें पूर्व सलाहकार केके शर्मा को चेयरमैन नियुक्त किया गया।
‘केस का स्टेटस जानो’ अभियान की शुरुआत हुई।
पुलिस की ओर से सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के साथ मिलकर कार्यक्रम किया गया
पुलिस विभाग ने पारदर्शिता बरतने के लिए वेबसाइट को नए सिरे से बनाया जिसमें विभाग की सभी अहम जानकारियों को डाला गया।
आईजी ने लोगों से सीधा संपर्क करने के लिए अपनी ई-मेल बनाई जिस पर लोग अब किसी भी समय शिकायत कर सकते है
उपलब्धियां नहीं बता पाई पुलिस
किरकिरी से बचने के लिए पुलिस विभाग ने अब साल के अंत में उपलब्धियां बताने के लिए प्रेसवार्ता बंद कर दी है। यह पिछले दो साल से बंद है।
हालांकि पुलिस का कहना है कि इस साल अब तक 88 लुटेरों को दबोचा गया। वहीं 132 को डकैती, 127 को स्नैचिंग और 451 को अन्य चोरी की वारदातों में गिरफ्तार किया गया।
कुल 3.37 लाख रुपये का लूट का सामान, 13 लाख स्नैचिंग का सामान, डकैती के 62 लाख रुपये और 98 लाख का चोरी का सामान बरामद किया गया है।
इन पुराने मामलों को नहीं सुलझा पाई
पिछले तीन-चार सालों में भी कई ऐसी वारदातें हुई हैं जिनका पुलिस सुराग नहीं लगा पाई है। इनमें शाम मॉल के मालिक की हत्या, नेहा हत्याकांड और इंस्पेक्टर कश्मीरा सिंह की हत्या शामिल है।
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लेकिन कई ऐसे मामले रहे जिन्हें पुलिस सुलझा नहीं पाए। इस साल नाबालिगों के गायब होने का सिलसिला जारी रहा। अब तक पुलिस 253 अपहरण के मामले दर्ज कर चुकी है।
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साल 2013 में ये वारदातें रहीं चर्चा में
जनवरी माह में पांच साल की बच्ची हरमेनी का अपहरण सेक्टर-22 के होटल में हुआ। अपहरणकर्ताओं ने एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। पुलिस ने बाद में बच्चे को बरामद कर लिया था।
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फरवरी में सीबीआई ने आयकर विभाग के अधिकारी राकेश कुमार जैन को 50 हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया। यह रिश्वत प्रापर्टी डीलर से ली गई थी।
पुलिस पर लगे आरोप
मार्च में हाईकोर्ट में एक वकील के साथ हेड कांस्टेबल की हाथापाई हुई। इसे लेकर वकीलों ने प्रदर्शन किया
अप्रैल में सब इंस्पेक्टर अमनजोत पर सेक्टर-20 के प्रापर्टी डीलर ने आरोप लगाए थे। उसका कहना था कि एसआई ने हाथापाई की और दुकान की चाबियां ले गया। आरोप था कि प्रापर्टी डीलर ने सब इंस्पेक्टर की 10 लाख रुपये की राशि देनी थी। इस पर अमनजोत के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था।
मई में गोल्फ क्लब में हुए विवाद में पुलिस ने पूर्व एथलीट मिल्खा सिंह, पंजाब के विधायक और एक पूर्व आर्मी अधिकारी पर मामला दर्ज किया था। बाद में पुलिस को यह एफआईआर खारिज करनी पड़ी
जून में बर्खास्त कांस्टेबल ने इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह की हत्या की। पुलिस ने सुच्चा सिह को शहीद घोषित किया लेकिन अभी तक उनके बेटे को एएसआई की नौकरी नहीं दिलवा पाई है।
जुलाई में सेक्टर-17-18 की विभाजक सड़क पर एक ऑडी ने दो छात्रों सहित एक चालक को टक्कर मार दी जिससे गाजियाबाद निवासियों की मौत हो गई थी। पुलिस ने टवेरा सवार मृतकों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। इसके बाद एसएसपी ने तत्कालीन थाना प्रभारी राम गोपाल को लाइन हाजिर कर दिया था।
नवंबर में‘सूद का खेल, पुलिस का मेल’ मामला बेहद चर्चित रहा। पंचकूला के गायब हुए व्यापारी विक्रम धीमान ने सब इंस्पेक्टर सेखों दपंति पर आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में सुरक्षा की अपील की।
याचिका के अनुसार विक्रम ने सेखों दपंति से ढाई करोड़ रुपये की राशि 6 प्रतिशत ब्याज पर ली थी। इस केस के बाद ही यह बात सामने आई कि शहर के कई और पुलिस अधिकारियों ने भी विक्रम को लाखों रुपये की राशि ब्याज पर दी हुई है।
दिसंबर में पलसौरा बेबी मर्डर केस में पुलिस की जमकर किरकिरी हो रही है क्योंकि अभी तक आरोपियों का सुराग नहीं लग पाया है।
नवंबर से लेकर दिसंबर माह तक आधा दर्जन से ज्यादा नाबालिग ऐसे हैं जिनके गायब होने के बाद पुलिस अभी तक उनका सुराग नहीं लगा पाई है। इस केस के दौरान ही पूर्व एसएसपी नौनिहाल सिंह शहर से गए और नए एसएसपी ने ज्वाइन किया।
दिसंबर में ही पूर्व एसएसपी नौनिहाल पर उनके ही दोस्त जसविंदर वालिया ने गंभीर आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अरजी दाखिल की। वालिया ने जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा मांगी थी।
दिसंबर में ही सेक्टर-8 के डिस्को के बाहर नशे में बेसुध पड़ी युवती को पुलिस अस्पताल ले जाने की बजाय पुलिस थाने ले गई। इस मामले में एसआई को लाइन हाजिर कर दिया गया था।
दिसंबर माह जाते जाते भी पुलिस की वर्दी पर दाग लगा गया। पांच कांस्टेबलों पर छात्रा के साथ गैंगरेप का आरोप लगा। इस मामले की जांच के लिए लिए पुलिस ने एसआईटी की टीम का गठन किया।
कई अच्छे कदम भी उठाए
जनवरी माह में सेक्टर-25 में शूटिंग रेंज का उद्घाटन हुआ
पुलिस कंपलेंट अथॉरिटी का नए सिरे से गठन हुआ जिसमें पूर्व सलाहकार केके शर्मा को चेयरमैन नियुक्त किया गया।
‘केस का स्टेटस जानो’ अभियान की शुरुआत हुई।
पुलिस की ओर से सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के साथ मिलकर कार्यक्रम किया गया
पुलिस विभाग ने पारदर्शिता बरतने के लिए वेबसाइट को नए सिरे से बनाया जिसमें विभाग की सभी अहम जानकारियों को डाला गया।
आईजी ने लोगों से सीधा संपर्क करने के लिए अपनी ई-मेल बनाई जिस पर लोग अब किसी भी समय शिकायत कर सकते है
उपलब्धियां नहीं बता पाई पुलिस
किरकिरी से बचने के लिए पुलिस विभाग ने अब साल के अंत में उपलब्धियां बताने के लिए प्रेसवार्ता बंद कर दी है। यह पिछले दो साल से बंद है।
हालांकि पुलिस का कहना है कि इस साल अब तक 88 लुटेरों को दबोचा गया। वहीं 132 को डकैती, 127 को स्नैचिंग और 451 को अन्य चोरी की वारदातों में गिरफ्तार किया गया।
कुल 3.37 लाख रुपये का लूट का सामान, 13 लाख स्नैचिंग का सामान, डकैती के 62 लाख रुपये और 98 लाख का चोरी का सामान बरामद किया गया है।
इन पुराने मामलों को नहीं सुलझा पाई
पिछले तीन-चार सालों में भी कई ऐसी वारदातें हुई हैं जिनका पुलिस सुराग नहीं लगा पाई है। इनमें शाम मॉल के मालिक की हत्या, नेहा हत्याकांड और इंस्पेक्टर कश्मीरा सिंह की हत्या शामिल है।