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हरियाणा में बंद होने की कगार पर कई इंजीनियरिंग संस्थान, ये है बड़ा कारण

Mon, 04 Sep 2017 09:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 04 Sep 2017 09:26 AM IST
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Many Engineering institutions shutting down in Haryana
- फोटो : File Photo
हरियाणा के तमाम इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थान बंद होने की कगार पर हैं। भेड़चाल में शिक्षा के ठेकेदारों ने इंजीनियरिंग और प्रबंधन की डिग्री की दुकानें तो खोल दीं, लेकिन वे गुणवत्तापरक शिक्षा देने में पूरी तरह से नाकाम रहे।
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बड़े शिक्षण संस्थानों को छोड़ दें तो हरियाणा में कई इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थान इस वित्तीय वर्ष में बंद हो जाएंगे। चूंकि इनकी सीटें बीते दो साल से भर ही नहीं रहीं। कई ऐसे संस्थान हैं, जिनकी सत्तर से अस्सी फीसदी सीटें हर साल खाली रह रही हैं। डेढ़ दर्जन संस्थानों में दाखिला शून्य से 15 प्रतिशत ही हुआ। दाखिले न होने के कारण बड़ी संख्या में संस्थान प्रबंधकों ने सरकार के तकनीकी शिक्षा विभाग को कॉलेज बंद करने का पत्र लिखा हुआ है। 
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तकनीकी शिक्षा विभाग हालांकि उपयुक्त आंकड़ा नहीं बता पाया, लेकिन विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि इन संस्थानों की ग्रोथ भी मशरूम की तरह हुई। धड़ाधड़ संस्थान खुल गए, लेकिन शिक्षा का स्तर मानकों अनुरूप नहीं था। इसलिए छात्रों की प्लेसमेंट ही नहीं हो पाई। इससे छवि खराब हो गई। फीस लेकर छात्रों को नॉन-अटेंडिंग घोषित करने का खेल भी खूब चला। इन छात्रों को न तो प्रेक्टिकल कराए गए, न ही कक्षाएं ली गईं। हरियाणा के अधिकांश निजी कॉलेजों के पास नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड की मान्यता भी नहीं है। सरकारी कॉलेंजो ने भी बीते दिनों इसके लिए आवेदन किया है। 
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मापदंड पूर करने ही होंगे : शर्मा

Many Engineering institutions shutting down in Haryana
Minister Ram Bilas Sharma - फोटो : File Photo
ऑल इंडिया काउंसिल फार टेकभनीकल एजुकेशन के अनुसार नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड की मान्यता जरूरी है। प्रदेश की यूनिवर्सिटी भी सरकार के डंडे के बाद अब इस मान्यता के लिए आवेदन कर रही हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग के अनुसार अभी स्थिरता आने में दो से तीन साल और लगेंगे। इसके बाद गुणवत्ता परक शिक्षा देने वाले इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थान ही बचेंगे, बाकी पर ताला लटका नजर आएगा।

मापदंड पूर करने ही होंगे : शर्मा
हरियाणा के तकनीकी शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा का कहना है कि सरकार ने सभी तकनीकी शिक्षा संस्थानों के लिए नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड की मान्यता अनिवार्य कर दी है। शिक्षा में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मार्केट में वही रहेगा, जिसके पास बेहतर क्वालिटी होगी। 
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