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पीयू के कई विभागों ने छिपाए पीएचडी के आंकड़े, थीसिस होनी हैं अपलोड

Tue, 28 Dec 2021 02:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 28 Dec 2021 02:33 AM IST
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Many departments of PU hide PhD figures, thesis has to be uploaded
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की रैंकिंग फिर गिरने की संभावना है। क्योंकि विभागों ने पीयू की वेबसाइट पर इस साल के शोधार्थियों का डाटा अपलोड नहीं किया। यहां तक कि थीसिस भी अपलोड होनी थी, लेकिन वह विशेष पोर्टल पर नहीं डाली गई। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को यह निर्देश भी दिए हैं। वहीं, दूसरी ओर आईक्यूएसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर वह डाटा अपलोड क्यों नहीं करवा पा रहे।
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शोधार्थियों का रिकॉर्ड वेबसाइट पर जरूरी
नियम है कि हर विभाग को अपने-अपने शोधार्थियों का रिकॉर्ड वेबसाइट पर देना होता है। विज्ञान संकाय के कुछ विभागों ने आठ तो कुछ ने पांच ही शोधार्थियों का डाटा अंकित किया है, जबकि शोधार्थियों की संख्या अधिक है। इसके अलावा शोध गंगा पोर्टल पर शोधार्थियों की थीसिस अपलोड करनी है, ताकि पूरा रिकॉर्ड कोई भी देख सके। यह कार्य भी पीयू की ओर से अब तक नहीं हो पाया, जबकि यूजीसी हर साल इसके लिए आदेश जारी कर रही है। कुछ वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि विभागों के जिम्मेदार जानबूझकर डाटा छिपा रहे हैं। इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए। कहा कि कोई भी रैंकिंग जारी करने वाली एजेंसी वेबसाइट से ही हर चीज के डाटा उठाती है और रैंक जारी करती है। ऐसे में पीयू का डाटा ही वेबसाइट पर पूरा अपलोड नहीं होगा तो फिर रैंकिंग कैसे बेहतर हो सकती है।
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आईक्यूएसी पर इस तरह खड़े हुए थे सवाल
नैक की टीम ने वर्ष 2015 में दौरा किया था। उस दौरान टीम ने कहा था कि पीयू का आईक्यूएसी सेंटर असरदार नहीं है। उसकी पूरी कार्यप्रणाली को टीम ने कटघरे में खड़ा कर दिया था। पीयू ने कहा था कि वह आईक्यूएसी को मजबूती देगी। उसके बाद कुछ काम हुआ, लेकिन डाटा अपलोड में हो रही देरी से फिर से सवाल खड़े होने लगे हैं। कुछ प्रोफेसरों ने भी अपने शोधार्थियों के पंजीकरण का डाटा नहीं दिया है। कुछ शिक्षकों के पास आवश्यकता से अधिक भी शोधार्थी पंजीकृत बताए जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि इस प्रकरण की भी जांच होनी चाहिए। वेबसाइट पर रोस्टर अपलोड न होने की भी शिकायतें पहले हुई थीं, लेकिन वह पूरी नहीं हो पाई। वहीं, पीयू प्रशासन का कहना है कि आईक्यूएसी सेंटर तेजी से काम कर रहा है। जल्द ही पूरा डाटा अपलोड होगा। विज्ञान संकाय ने किन शोधार्थियों के आंकड़े वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए, यह देखा जा रहा है। इसे लेकर विभागाध्यक्षों को जिम्मेदार माना जाएगा।
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