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हाउसिंग बोर्ड की डिफाल्टरों की सूची में पुलिस, स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग समेत कई विभाग

Sun, 20 Dec 2020 02:08 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 20 Dec 2020 02:08 AM IST
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Many departments including police, health, engineering in the list of housing board defaulters
चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने मकान किराया नहीं जमा कराने वाले जिन डिफॉल्टरों की सूची जारी की है, उनमें कई सरकारी विभाग भी शामिल हैं। सिर्फ धनास के स्मॉल फ्लैट्स में ही प्रशासन के समाज कल्याण, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और पुलिस समेत कई विभागों पर करीब एक करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे इन विभागों ने अब तक जमा नहीं कराया है। वहीं, मलोया में सरकारी विभागों पर 3 लाख 63 हजार से ज्यादा का बकाया है।
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सीएचबी ने सभी विभागों की सूची अपनी वेबसाइट पर डाल कर दी है। डिफॉल्टरों की सूची में सरकारी महकमे भी शामिल हैं। धनास के स्मॉल फ्लैट्स में करीब 124 मकान विभिन्न सरकारी विभागों को आवंटित किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मकान आंगनबाड़ी और अल्पसंख्यक आयोग के लिए प्रशासन के समाज कल्याण विभाग को दिए गए हैं। इनके अलावा रखरखाव के लिए इंजीनियरिंग विभाग, डिस्पेंसरी के लिए स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, ई-संपर्क समेत अन्य विभागों को कुल 124 मकान आवंटित किए गए हैं। प्रत्येक मकान पर औसतन 80 हजार रुपये का किराया बकाया है, जिसे वर्षों से जमा नहीं कराया गया है। यह कुल राशि एक करोड़ रुपये के करीब है। इसी तरह मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में भी पुलिस, समाज कल्याण विभाग समेत अन्य विभागों को करीब 36 मकान आवंटित किए गए हैं। प्रत्येक पर 10107 रुपये बकाया है। यह कुल राशि 3 लाख 63 हजार से ज्यादा है।
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धनास के स्मॉल फ्लैट में हैं सबसे ज्यादा डिफॉल्टर
सीएचबी ने आठ कॉलोनियों के आवंटियों की सूची जारी की है, जिसमें सबसे अधिक आवंटी धनास फ्लैट्स से हैं। धनास में 8057, मौलीजागरां में 1502, रामदरबार में 560, सेक्टर-56 में 751, सेक्टर-49 में 930, सेक्टर-38 वेस्ट में 997, मलोया में 2419 और औद्योगिक क्षेत्र में 99 के करीब आवंटी शामिल हैं, जो नियमित रूप से मकान का किराया जमा नहीं करवा रहे हैं। यही कारण है कि इन लोगों पर डेढ़ से दो लाख व उससे ऊपर की राशि बकाया है। बोर्ड ने 8 कॉलोनियों से 20 करोड़ रुपये के करीब वसूली करनी है।
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800 रुपये महीने का किराया, तब भी हजारों लोगों ने नहीं कराया जमा
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की तरफ से बनाए गए स्मॉल फ्लैट्स का किराया काफी कम है। बोर्ड इनसे मासिक किराए के रूप में 800 से 1000 हजार रुपये की किस्त वसूलता है, बावजूद इसके इतनी कम राशि भी कई अलॉटी जमा नहीं करवा रहे हैं। बोर्ड ने पुनर्वास योजना के तहत ही इन लोगों को अलॉटमेंट की है। योजना के तहत वर्ष 2006 में बायोमेट्रिक सर्वे करवाया गया था। बता दें कि इससे पहले बोर्ड ने सभी कॉलोनियों ने रेंट रिकवरी के लिए विशेष शिविर लगाए थे। इन शिविरों से ही बोर्ड ने 10 करोड़ रुपये की रिकवरी की थी।
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