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चंडीगढ़: कई अस्पतालों के पास नहीं अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, जानलेवा न बन जाए लापरवाही

Sat, 22 May 2021 10:53 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 22 May 2021 10:53 AM IST
सार

अगस्त 2019 से अब तक अस्पतालों और कोविड केयर सेंटरो में 24 से ज्यादा आग लगने की घटनाएं हो चुकीं हैं। इनमें 93 लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में गुजरात के अस्पताल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हुई थी। वहीं अप्रैल में भी मुंबई में इसी प्रकार की एक घटना में 13 लोगों की मौत हो गई थी। 

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Many Covid Care Center of Chandigarh does not have Fire Safety Certificate
fire extinguisher - फोटो : file photo

विस्तार

चंडीगढ़ में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। यहां के निजी और सरकारी अस्पताल बिना अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र के ही संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे हैं। प्रशासन भी धड़ल्ले से इन कोविड सेंटरों का उद्घाटन कर रहा है। डर यह है कि यह लापरवाही कहीं जानलेवा साबित न हो जाए। 

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मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिल गर्ग ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कोविड के नोडल ऑफिसर यशपाल गर्ग को पत्र लिखकर संबंधित केंद्रों से अंडरटेकिंग लेने को कहा है। साथ ही अस्पतालों में भी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए कहा गया है। 
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नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार प्रत्येक इमारत के फायर सेफ्टी नियम अलग-अलग होते हैं। जहां कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं, वहां स्कूल या अन्य गतिविधियां होती थीं, लेकिन कोविड सेंटर बनने से यह अस्पताल की श्रेणी में आ गए हैं। इनके अग्नि सुरक्षा मानक भी बदल गए हैं। इसलिए ऐसे स्थानों पर दमकल विभाग के अधिकारी के साथ फायर ब्रिगेड की गाड़ी होनी चाहिए। यहां मरीज भर्ती हैं, जो अनहोनी होने पर अपनी जान नहीं बचा सकते, इसलिए सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नोडल ऑफिसर प्रत्येक संस्था से मरीज की जान की सुरक्षा के साथ वचनपत्र लें। 

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सेक्टर 48 व 2 निजी अस्पतालों के पास ही सर्टिफिकेट

इस समय पीजीआई, जीएमसीएच-32, सेक्टर 48 अस्पताल, जीएमएसएच-16, सिविल अस्पताल 45 और पीयू में आर्मी अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। वहीं ईडन अस्पताल, सिटी अस्पताल, लैंडमार्क अस्पताल, मुकट अस्पताल, हीलिंग अस्पताल, संतोख अस्पताल और केयर पार्टनर के अलावा 9 मिनी कोविड केयर सेंटर में संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से अभी सेक्टर 48 अस्पताल, मुकट अस्पताल और लैंडमार्क अस्पताल के पास ही फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट है। ईडन अस्पताल को तो विभाग ने हाल ही में नोटिस जारी किया है। पीजीआई ने भी विभाग में एनओसी के लिए आवेदन किया है, लेकिन बिल्डिंग में खामियों के कारण अभी उन्हें भी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। 

इन चीजों से बढ़ी घटना की आशंका
- ऑक्सीजन का उपयोग बढ़ा
- सैनिटाइजर का भी उपयोग बढ़ा
- गर्मियों में एसी चलने से मशीनरी पर दबाव बढ़ने के बाद शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ीं
- ऑक्सीजन कन्संट्रेटर के लिए भी बिजली का उपयोग बढ़ा

तमाशबीन बना देखता रहा फायर ब्रिगेड विभाग
फायर ब्रिगेड विभाग को भी किसी हादसे के बारे में तब याद आती है, जब वहां पूरा काम हो चुका होता है। कोविड केयर सेंटर बनाने का काम हो या अस्पतालों में कोविड सेंटर खोलने का मामला, फायर ब्रिगेड विभाग ने एक साल तक चुप्पी साधे रखी। न स्टेशन फायर ऑफिसर ने अपने क्षेत्र के कोविड सेंटर व अस्पतालों का निरीक्षण किया और न मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने इस संबंध में ध्यान दिया। अब जब मरीज सेंटरों व अस्पतालों में भर्ती हो गए, तब विभाग को अपनी जिम्मेदारी याद आ रही है। 

फायर ब्रिगेड विभाग का पत्र मिला है। हमने मिनी कोविड सेंटर बनाने के लिए जो मानक तय किए हैं, उनमें भी सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए कहा है। सेक्टर 48 अस्पताल को सर्टिफिकेट मिल गया है। जीएमसीएच-32 को भी जल्द मिल जाएगा। हम सुरक्षा मानकों का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। विभाग जो कहेगा उन मानकों का भी पालन कर लेंगे। - यशपाल गर्ग, नोडल ऑफिसर, मिनी कोविड सेंटर व जीएमसीएच-32

हमारे यहां आग से सुरक्षा के सभी मानकों को पूरा किया जाता है। फायर ब्रिगेड विभाग में एनओसी के लिए आवेदन किया है। विभाग की ओर से पत्र लिखकर कुछ खामियां बताई गई हैं, उन्हें जल्द पूरा कर लेंगे। - डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमएसएच-16


सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर सभी अस्पताल व प्रभारियों को पत्र लिखा है। देशभर में घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी है। इसलिए पहले से ही सभी स्थितियों से निपटने के लिए तैयारी करने को कहा गया है। - अनिल गर्ग, मुख्य अग्निशमन अधिकारी

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