चंडीगढ़ में मनमानी: कैब चलाने के लिए इन-ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं, रैपिडो भी नहीं चला सकता बाइक टैक्सी
इन-ड्राइवर जैसी बड़ी कंपनियों के खिलाफ प्रशासन बेबस हो गया है। ये कंपनियां मोबाइल एप से चलती हैं। इनका चंडीगढ़ व आसपास कोई दफ्तर भी नहीं है। एसटीए अभियान चलाकर इन-ड्राइवर की गाड़ियां चलाने वालों के चालान काटता है। कई बार गाड़ियां जब्त की गई हैं लेकिन इसमें भी सिर्फ कार चालक ही फंसता है।
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चंडीगढ़ में इन-ड्राइवर समेत कई कंपनियां गैर कानूनी तरीके से कैब चला रही हैं। बाइक टैक्सी चला रही रैपिडो कंपनी भी गैर कानूनी है, क्योंकि उन्होंने एसटीए से लाइसेंस प्राप्त नही किया है। ये जानकारी स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने आरटीआई के जवाब में दिया है। एसटीए के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने कार्रवाई करने के लिए एप को प्ले स्टोर से हटाने के लिए पत्र लिखा है।
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा-66 (1) के तहत कैब कंपनियों में चलाने के लिए परमिट होना जरूरी है। परमिट उसी वाहन को मिलता है जिसका व्यावसायिक श्रेणी में आरटीओ में पंजीकरण हो। ऐसे में निजी नंबर के वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इन-ड्राइवर मोबाइल एप को लेकर एसटीए जनसूचना भी जारी कर चुका है और लोगों को सलाह दी है कि वह इनमें सफर न करें क्योंकि वो सुरक्षित नहीं हैं।
शहर में बाइक टैक्सी का चलन काफी ज्यादा बढ़ गया है। लोग भी इनका काफी इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन किसी हादसे की स्थिति में ये लोगों के लिए काफी नुकसानदायक है। अगर इन निजी नंबर की कैब बाइक की दुर्घटना हो जाए तो पीड़ित को इंश्योरेंस क्लेम भी नहीं मिलेगा। रैपिडो एप मोटरसाइकिल मालिकों को उन्हें टैक्सी के रूप में उपयोग करने की अनुमति देता है। हालांकि कानूनों के अनुसार यह अवैध है और एक निजी वाहन को टैक्सी के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। सरकार पीले रंग की पंजीकरण प्लेट प्रदान करती है जिसका व्यावसायिक उपयोग किया जा सकता है। इस तरह के पंजीकरण के लिए अधिकारी एक अलग कर लेते हैं और यहां तक कि बीमा भी अलग है। एसटीए के सीपीआईओ रविंदर शर्मा ने बताया कि इन-ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं होने की वजह से उनकी गाड़ियों का चालान भी किया जा रहा है।
इन-ड्राइवर ऐप को प्ले स्टोर से हटाने के लिए लिखा
इन-ड्राइवर जैसी बड़ी कंपनियों के खिलाफ प्रशासन बेबस हो गया है। ये कंपनियां मोबाइल एप से चलती हैं। इनका चंडीगढ़ व आसपास कोई दफ्तर भी नहीं है। एसटीए अभियान चलाकर इन-ड्राइवर की गाड़ियां चलाने वालों के चालान काटता है। कई बार गाड़ियां जब्त की गई हैं लेकिन इसमें भी सिर्फ कार चालक ही फंसता है। कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ता। इसलिए अब एसटीए ने केंद्र सरकार को लिखा है कि वह इन-ड्राइवर मोबाइल ऐप को ही प्ले स्टोर से हटा दें। हालांकि ये आसान नहीं है इसलिए बिना डर के ये कंपनियां अपना काम कर रही है और अधिकारी बेबस होकर ये सब देख रहे हैं। एसटीए ने आरटीआई में कहा है कि इन-ड्राइवर ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है जो लंबित है।
करीब 20 हजार व्यावसायिक गाड़ियों पर है सिर्फ एक एमवीआई, कैसे होगी कार्रवाई?
शहर में करीब सात हजार ऑटो हैं। पंजाब-हरियाणा से भी रोजाना एक हजार से ज्यादा ऑटो आते हैं। करीब 4 हजार टैक्सी व कैब चलती हैं। 1200 के करीब स्कूल बस हैं। सीटीयू की बसें, ट्रांसपोर्ट ट्रक, छोटे सामान ढोने वाली गाड़ियां, होम डिलीवरी करने वाली गाड़ियां समेत अन्य को मिलाकर शहर में कुल करीब 20 हजार व्यावसायिक गाड़ियां हैं। इन पर नजर रखने के लिए और चालान काटने के लिए सिर्फ एक मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) है। एसटीए के सचिव की जिम्मेदारी दानिक्स अफसर अमित कुमार के पास है, जो एडीसी भी हैं। इसके अलावा भी उसके पास अन्य कई विभागों के चार्ज हैं। दो एमवीआई हैं, जिनमें से एक की ड्यूटी रजिस्टरिंग व लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) में रहती है। एक ही इंस्पेक्टर बचता है जिसके पास चालान करने की जिम्मेदारी है। इसलिए शहर में कंपनियों की मनमानी ऐसे ही चल रही है।
लाइसेंस नहीं होने की वजह से इन-ड्राइवर एप महिलाओं के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। न इनका कोई ऑफिस है, न कोई संपर्क नंबर। ट्रैक करने की कोई व्यवस्था नही है। निजी गाड़ियों वाले भी इस एप के माध्यम से कैब चला रहे हैं। ये लोगों से टैक्स वसूल रहे हैं लेकिन जब लाइसेंस ही नहीं लिया तो वो टैक्स जा कहां रहा है। एप को तुरंत बंद करना चाहिए। - विक्रम पुंडीर, कॉर्डिनेटर, कैब-ऑटो यूनाइटेड फ्रंट