दादुपुर नलवी नहर की अधिगृहीत जमीन किसानों को लौटाएगी हरियाणा सरकार, वापसी के लिए करना होगा ये काम
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हरियाणा सरकार दादुपुर नलवी नहर के लिए अधिगृहीत भूमि किसानों को लौटाएगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने दादुपुर नलवी सिंचाई योजना के निर्माण के लिए अधिगृहीत भूमि की अधिसूचना रद करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। जमीन वापस लेने के लिए किसान 30 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं।
बैठक के बाद राज्य मंत्री कृष्ण बेदी और सीएम के मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह निर्णय योजना के गैर-लाभकारी और पूरी तरह से अव्यावहारिक होने पर लिया गया है। सरकार ने 27 सितंबर 2017 को मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद 3 अगस्त 2018 को नहर के लिए अधिगृहीत 824.71 एकड़ भूमि की अधिसूचना रद कर दी थी।
इसके बाद भूमि के मालिक किसानों को वैकल्पिक भूमि की पेशकश कर 11 दिसंबर 2018 को और 5.39225 एकड़ भूमि की अधिसूचना को रद किया था। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में भूमि लौटाने और मुआवजा वापस लेने के तौर-तरीकों का प्रस्ताव लाया गया। इस पर चर्चा के बाद मुहर लगा दी गई। सरकार ने उन भूमि मालिकों का साधारण ब्याज माफ करने का निर्णय लिया है जो सरकार से भूमि की क्षति के मुआवजे का दावा नहीं करेंगे।
जमीन वापस लेने के लिए किसानों को ये करना होगा
. वास्तविक मालिकों या कानूनी उत्तराधिकारियों को मुआवजा लेने की तिथि से मुआवजा लौटाने की तिथि तक 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज के साथ भूमि अधिग्रहण अधिकारी अंबाला के पास पूरी राशि जमा करवानी होगी। सोलेशियम जमा नहीं कराना होगा।
. जमीन पर कब्जा मुआवजा राशि लौटाने के बाद ही दिया जाएगा। ब्याज के साथ मुआवजा लौटाने के 3 माह में जमीन का कब्जा देने की जिम्मेदारी संबंधित अधीक्षण अभियंता सिंचाई व भूमि अधिग्रहण अधिकारी की होगी।
. जो मालिक भूमि उपयोग और क्षति के लिए मुआवजा चाहते हैं, उन्हें 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करना होगा।
. भूमि अधिग्रहण अधिकारी अंबाला को अपने दावे प्रस्तुत करते समय भूमि मालिकों को अपना विकल्प बताना होगा कि वे ब्याज का भुगतान करेंगे या फिर क्षति मुआवजे का दावा करने जा रहे हैं या नहीं।
यह थी दादुपुर नलवी नहर परियोजना
दादुपुर नलवी नहर 1985 में शुरू की गई थी। शाहबाद के पूर्व माकपा विधायक डॉ. हरनाम सिंह ने इस नहर के निर्माण की मांग तत्कालीन सीएम चौ. देवीलाल के समक्ष रखी थी।
तब यह माना गया था कि एसवाईएल नहर में पानी आने पर पश्चिमी यमुना नहर में पानी सरप्लस हो जाएगा। ऐसी स्थिति में करनाल, कुरुक्षेत्र व यमुनानगर जिलों के लोगों को यह पानी देने के लिए दादुपुर नलवी नहर बनाने का फैसला लिया गया।
यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में सिंचाई और भू-जल की रिचार्जिंग के लिए 13 करोड़ रुपये की लागत के साथ इस परियोजना को सरकार ने मंजूरी दी थी। योजना के लिए 1987-90 के दौरान 190.67 एकड़ जमीन अधिगृहीत हुई थी लेकिन इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
करोड़ों खर्च करने के बाद भी नहीं बनी नहर
2004 में दादुपुर नलवी नहर के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया फिर शुरू हुई। यमुनानगर जिले के दादुपुर से कुरुक्षेत्र के शाहाबाद तक 860 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई। उस समय इसके मुआवजे के तौर पर 166 करोड़ रुपये दिए गए। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने पांच लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया लेकिन किसान इसे कम बताते हुए कोर्ट चले गए।
इसके बाद कोर्ट ने 16 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने को कहा। कुछ गांवों के लोगों की अपील पर कोर्ट ने मुआवजे की दर 2887 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी। इसके बाद मुआवजा राशि बढ़ती चली गई, जिस कारण इसमें पेंच फंस गया। हुड्डा सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर इस नहर के पहले चरण को पूरा कर दिया लेकिन नहर पूरी तैयार नहीं हो पाई।