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'नीलामी का सामान बन गए हैं सिद्धू, जहां ज्यादा माल मिलेगा वहीं जाएंगे'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 30 Oct 2016 11:27 AM IST
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नवजोत सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (डीएसजीएमसी) ने पूर्व सांसद और क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को ‘नीलामी का सामान’ करार दिया है। कमेटी का कहना है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस हाथ मिला चुके हैं और अपना पंजाब पार्टी भी जल्द ही इस गठबंधन में शामिल हो सकती है।
कमेटी ने कहा है कि यह गठबंधन सिद्धू की बोली लगा सकता है। चुनाव लड़ने के छिटपुट अन्य इच्छुक भी इस गठबंधन से जुड़ने के लिए अपनी बोली लगा सकते हैं। कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने नवजोत सिंह सिद्धू को इस गठबंधन का केंद्र बिंदु बताया। उन्होंने कहा कि सिद्धू सबसे ज्यादा माल ऑफर करने वाले दल के साथ जा सकते हैं। वैसे सिद्धू की एकमात्र शर्त उनकी धर्मपत्नी के लिए उपमुख्यमंत्री पद की है।
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कमेटी ने कहा है कि यह गठबंधन सिद्धू की बोली लगा सकता है। चुनाव लड़ने के छिटपुट अन्य इच्छुक भी इस गठबंधन से जुड़ने के लिए अपनी बोली लगा सकते हैं। कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने नवजोत सिंह सिद्धू को इस गठबंधन का केंद्र बिंदु बताया। उन्होंने कहा कि सिद्धू सबसे ज्यादा माल ऑफर करने वाले दल के साथ जा सकते हैं। वैसे सिद्धू की एकमात्र शर्त उनकी धर्मपत्नी के लिए उपमुख्यमंत्री पद की है।
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सिरसा बोले, सिद्धू को सबसे ज्यादा माल ऑफर करने वाले का इंतजार
दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा
- फोटो : File Photo
कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, ‘चुनावों की घोषणा अभी हुई भी नहीं है और उससे पहले ही सिद्धू दंपति अपने कैबिनेट जन्म की तैयारी कर रहे हैं। सिद्धू की राजनीतिक सौदेबाजी से परेशान होकर बैंस बंधुओं को अपनी पार्टी तक का गठन करना पड़ा।
ओलंपियन हॉकी हीरो परगट सिंह बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। सिद्धू की किसी भी विचारधारा या कार्यक्रम में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनकी राजनीतिक कलाबाजियों के चलते ही उनकी हालत बदतर होती जा रही है। इसी का परिणाम है कि टेलीविजन पर तमाशा करते सिद्धू खुद एक तमाशा बनकर रह गए हैं।’
ओलंपियन हॉकी हीरो परगट सिंह बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। सिद्धू की किसी भी विचारधारा या कार्यक्रम में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनकी राजनीतिक कलाबाजियों के चलते ही उनकी हालत बदतर होती जा रही है। इसी का परिणाम है कि टेलीविजन पर तमाशा करते सिद्धू खुद एक तमाशा बनकर रह गए हैं।’