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Chandigarh News: मनीष तिवारी ने वायु प्रदूषण कार्य योजना की नाकामी पर लोकसभा में उठाए सवाल

Tue, 10 Feb 2026 02:08 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Feb 2026 02:08 AM IST
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Manish Tewari raises questions in Lok Sabha on the failure of the Air Pollution Action Plan
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चंडीगढ़। लोकसभा में देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और इसे रोकने में सरकार की रणनीति को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने राजधानी क्षेत्र में लंबे समय तक गंभीर बनी वायु गुणवत्ता का मुद्दा उठाते हुए सरकार की कार्य योजना पर गंभीर सवाल खड़े किए।

मनीष तिवारी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाई गई चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना लागू होने के बावजूद सफल नहीं रही है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में लगभग तीन महीने तक वायु गुणवत्ता सूचकांक चार सौ या उससे अधिक यानी अत्यंत गंभीर स्तर पर बना रहा। उन्होंने पूछा कि जब कार्य योजना पहले से मौजूद थी तो फिर हालात इतने खराब क्यों रहे और इसके क्रियान्वयन तथा निगरानी में कहां चूक हुई।
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सांसद ने देश और प्रमुख शहरों में सूक्ष्म कण प्रदूषण तथा अन्य प्रमुख प्रदूषकों की मौजूदा स्थिति पर भी सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि इन प्रदूषकों का स्तर तय राष्ट्रीय मानकों और विश्व स्वास्थ्य संस्था की सिफारिशों से कितना अधिक है और आम जनता के स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ रहा है।
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कोयले के उपयोग में कटौती की बात
मनीष तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए गए सफल उपायों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या सरकार ने अन्य देशों में लागू सख्त वायु शुद्धिकरण मॉडल का अध्ययन किया है। उन्होंने विशेष रूप से कोयले के उपयोग में कटौती कम उत्सर्जन क्षेत्र और कठोर अनुपालन व्यवस्था जैसे कदमों को भारत में लागू करने की संभावना पर सरकार का रुख जानना चाहा। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की नीतियों का बोझ कमजोर और संवेदनशील वर्गों पर नहीं पड़ना चाहिए।


सरकार की ओर से पर्यावरण मंत्री ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और विभिन्न कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के अनेक शहरों में प्रदूषण के स्तर में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि कई शहर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे हैं और दिल्ली में भी औसत स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि सरकार के जवाब में उपलब्धियों और बैठकों का उल्लेख अधिक रहा लेकिन कार्य योजना की विफलता और प्रवर्तन में ढिलाई जैसे मूल सवालों पर सीधा जवाब नहीं मिला।
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