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ये कैसा प्रशासन: दो साल में 4000 से ज्यादा परिवार बसाए, इलाके में सफाई कौन करेगा...आज तक तय नहीं

Sun, 11 Jul 2021 11:43 AM IST
ajay kumar रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 11 Jul 2021 11:43 AM IST
सार

मलोया में साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, पानी का लो प्रेशर आदि की भी समस्याएं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि समस्याओं को लेकर शिकायत किसको करें। कहा कि यह मकान हाउसिंग बोर्ड ने बनवा कर दिए हैं लेकिन किसी भी समस्या के लिए कोई केंद्र नहीं बनाया गया है। शिकायत दर्ज कराने के लिए लोगों को चक्कर काटने पड़ते हैं। नगर निगम के अधिकारी कहते हैं कि यह एरिया उनके हिस्से में नहीं आता। तो वहीं प्रशासन के अधिकारी भी जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। ऐसे में इलाके की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

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Maloya rehabilitation colony is not being cleaned
चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : फाइल

विस्तार

यह विश्वास करना मुश्किल है कि जिस शहर को स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल है, वहां का प्रशासन दो साल से यह नहीं तय कर पाया है कि जहां 4000 परिवार रहते हैं, वहां की सफाई कौन करेगा। इसकी वजह से मलोया की पुनर्वास कालोनी में पिछले दो साल से ढंग से सफाई तक नहीं हुई है। अभी भी नगर निगम और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। इन हालातों में चंडीगढ़ स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने की कैसे सोच सकता है।

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जुलाई 2019 में कालोनी नंबर-4 के 2300 परिवारों को मलोया की पुनर्वास कालोनी में शिफ्ट किया गया। इसके बाद दिसंबर 2020 में 1700 से ज्यादा परिवारों को भी वहां भेज दिया गया लेकिन इलाके की सफाई कौन करेगा, यह अभी तक नहीं हो पाया है। सीएचबी का कहना है कि उनके पास सफाई का कोई विंग नहीं है। ऐसे में सफाई नगर निगम को करनी चाहिए। नगर निगम के एमओएच विभाग के पास शहर की साफ-सफाई की जिम्मेदारी है लेकिन कर्मचारियों और फंड की कमी का हवाला देकर वह भी अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। 
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नगर निगम ने सीएचबी को एक प्रस्ताव दिया कि अगर वह पैसे दे, तो निगम वहां पर अपने कर्मचारी लगाकर सफाई करवा सकता है। इसके लिए सीएचबी ने एक फंड बनाया और मंजूरी के लिए प्रशासन के वित्त विभाग को भेज दिया। वित्त विभाग ने यह कहते हिए सीएचबी के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि नगर निगम को सफाई के लिए पैसे देने की जरूरत नहीं है। 

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जैसे वह बाकी शहर की सफाई करता है, वैसे ही उसे मलोया की भी करनी चाहिए। लेकिन नगर निगम के अधिकारी इन आदेशों को मानने को तैयार ही नहीं हैं। उनका कहना है कि उनके पास कोई आदेश नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठता है कि कब तक मलोया निवासी बिना साफ-सफाई के जीने को मजबूर होंगे।

मलोया में साफ-सफाई के लिए नगर निगम को कहा गया है। सफाई के लिए एक राशि देने पर सहमति बनी थी। सीएचबी ने इसके लिए फंड बनाकर मंजूरी के लिए भेजा लेकिन अस्वीकार कर दिया गया। एक व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि वहां लोगों को समस्या न आए। - यशपाल गर्ग, सीईओ, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड।

 

हाउसिंग बोर्ड की तरफ से हमें न कोई पत्र लिखा गया है और न कोई सफाई के लिए भुगतान किया गया है। फिलहाल इन मकानों की जिम्मेदारी हाउसिंग बोर्ड की है। उनकी तरफ से बैठक में हुए फैसले के अनुसार हमें भुगतान किया जाएगा, उसके बाद निगम सफाई व्यवस्था शुरु करेगा। - केके यादव, आयुक्त, नगर निगम।

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