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Chandigarh News: हरियाणा रोडवेज कर्मियों को बड़ी राहत, जिला अदालत ने अस्थायी सेवा को पेंशन में जोड़ने का दिया आदेश
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चंडीगढ़। जिला सिविल अदालत ने हरियाणा रोडवेज के अंबाला डिपो से सेवानिवृत्त पांच कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने विभाग को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों की नियमितीकरण से पहले की अस्थायी और कांट्रैक्ट सेवा अवधि को भी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल किया जाए। साथ ही सेवानिवृत्ति की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 90 दिनों के भीतर एरियर जारी किया जाए।
यह मामला नारायणगढ़ सब डिपो से सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार, इंस्पेक्टर गुलजारी लाल, कंडक्टर रामशरण, चालक हरभजन सिंह और चालक पप्पू द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनकी नियुक्ति 10 अक्तूबर 1993 को चयन प्रक्रिया के माध्यम से हुई थी, लेकिन उन्हें अस्थायी और कांट्रैक्ट आधार पर रखा गया। बाद में 19 अक्तूबर 1995 को उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं। विभाग ने सेवानिवृत्ति के समय शुरुआती दो वर्ष की सेवा को पेंशन योग्य सेवा में शामिल नहीं किया।
सुनवाई के दौरान परिवहन विभाग ने दलील दी कि शुरुआती नियुक्ति केवल 30 दिनों के लिए अस्थायी थी और पेंशन नियमों के अनुसार उसे नहीं जोड़ा जा सकता। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से ऐसे कई मामलों का हवाला दिया गया, जिनमें पंचकूला और चंडीगढ़ डिपो के कर्मचारियों को यह लाभ पहले ही दिया जा चुका है।
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रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का अध्ययन करने के बाद अदालत ने माना कि समान परिस्थितियों में अन्य कर्मचारियों को लाभ मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं को इससे वंचित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने पांचों कर्मचारियों को पेंशन लाभों का हकदार मानते हुए विभाग को निर्धारित अवधि में सभी वित्तीय लाभ ब्याज सहित जारी करने का आदेश दिया।
यह मामला नारायणगढ़ सब डिपो से सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार, इंस्पेक्टर गुलजारी लाल, कंडक्टर रामशरण, चालक हरभजन सिंह और चालक पप्पू द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनकी नियुक्ति 10 अक्तूबर 1993 को चयन प्रक्रिया के माध्यम से हुई थी, लेकिन उन्हें अस्थायी और कांट्रैक्ट आधार पर रखा गया। बाद में 19 अक्तूबर 1995 को उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं। विभाग ने सेवानिवृत्ति के समय शुरुआती दो वर्ष की सेवा को पेंशन योग्य सेवा में शामिल नहीं किया।
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सुनवाई के दौरान परिवहन विभाग ने दलील दी कि शुरुआती नियुक्ति केवल 30 दिनों के लिए अस्थायी थी और पेंशन नियमों के अनुसार उसे नहीं जोड़ा जा सकता। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से ऐसे कई मामलों का हवाला दिया गया, जिनमें पंचकूला और चंडीगढ़ डिपो के कर्मचारियों को यह लाभ पहले ही दिया जा चुका है।
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रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का अध्ययन करने के बाद अदालत ने माना कि समान परिस्थितियों में अन्य कर्मचारियों को लाभ मिलने के बाद याचिकाकर्ताओं को इससे वंचित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने पांचों कर्मचारियों को पेंशन लाभों का हकदार मानते हुए विभाग को निर्धारित अवधि में सभी वित्तीय लाभ ब्याज सहित जारी करने का आदेश दिया।