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चंडीगढ़ः पीजी में लगी भीषण आग, तीन लड़कियों की जलकर मौत, दो ने छलांग लगा बचाई जान

Sun, 23 Feb 2020 09:22 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 23 Feb 2020 09:22 AM IST
सार

  • दो छात्राओं ने पहली मंजिल से पड़ोसी के घर में कूदकर बचाई जान, संचालक गिरफ्तार।
  • शनिवार शाम शाम 4 बजे हुआ हादसा, दमकल की पांच गाड़ियों ने दो घंटे में पाया आग पर काबू।  
  • हादसे के समय पीजी में मौजूद थी 25 छात्राएं, शोर मचने पर 20 ने भागकर बचाई जान।

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Major fire breaks out at a house in Chandigarh
तीनों मृतकों की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लैपटॉप को चार्ज करते समय शॉर्ट सर्किट से शनिवार शाम करीब चार बजे सेक्टर-32डी के एक गर्ल्स पीजी में आग लग गई। अवैध रूप से संचालित इस पीजी में कुल 30 कमरे बने हुए हैं। आग एक कमरे में लगी और तेजी से फैल गई। धुएं से पीजी में मौजूद छात्राओं का दम घुटने लगा। हादसे के समय करीब 25 छात्राएं पीजी में मौजूद थीं। शोर मचते ही इनमें से 20 निकलने में कामयाब हो गईं, जबकि पांच छात्राएं धुएं और आग में फंस गईं। 

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दम घुटने और झुलसने से इनमें से तीन की मौत हो गई जबकि दो छात्राओं ने बिल्डिंग की पहली मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पीजी की पहली मंजिल जलकर पूरी तरह राख हो गई। सूचना पर पहुंचीं दमकल की पांच गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर करीब दो घंटे बाद काबू पाया। 
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हादसे में हिसार के लक्ष्मी नगर निवासी मुस्कान (21) की झुलसने जबकि कोटकपूरा (पंजाब) के सत्य बाजार निवासी पाक्षी ग्रोवर (20) और कपूरथला (पंजाब) निवासी रिया अरोड़ा (19) की धुएं में दम घुटने से मौत हो गई। गनीमत रही कि हादसे के वक्त पीजी में ज्यादा लड़कियां नहीं थीं, अगर हादसा रात में या सुबह में होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। 
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वहीं, पीजी के मेन गेट के पास पीएनजी लाइनें बिछी हुई हैं अगर समय रहते इसे बंद न करवाया गया होता तब भी बड़ा हादसा हो सकता था। सेक्टर-34 थाना पुलिस ने कोठी मालिक गौरव अनेजा और पीजी संचालक नीतेश बंसल व नीतेश पोपली के खिलाफ मामला दर्जकर नीतेश बंसल को गिरफ्तार कर लिया है।

दो बार पहले भी पीजी में लगी थी आग,  केस भी हो चुका है दर्ज
सेक्टर-32डी के इस अवैध पीजी में पिछले एक साल में आग की यह तीसरी घटना है। इससे पहले आग पीजी स्थित एक रूम में एसी और मेन तार केबल में लग चुकी है जबकि यह आग पहली मंजिल में रहने वाली एक छात्र के कमरे में लगी। बताया गया कि कालेज से लौटने के बाद आयुष्का नामक छात्रा ने अपने कमरे में लैपटॉप चार्जर पर लगाकर पीजी के बाहर आ गई। इस दौरान चार्जर में शार्ट सर्किट हो गया। इस कारण आग ने विकराल रूप ले लिया।

वहीं पुलिस के अनुसार, बीते 30 नवंबर को सेक्टर-34 थाना पुलिस ने नियमों के उलंघ्घन करने पर पीजी संचालक नीतेश बंसल के खिलाफ आईपीसी 188 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद नीतेश ने कोर्ट में इसका जुर्माना भरा। बावजूद इसके पीजी संचालक नहीं सुधरे और फिर से बिना अनुमति के छात्राओं को किराए पर कमरा दिया। 

अवैध रूप से गर्ल्स पीजी चलाया जा रहा था

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सबकुछ जलकर राख। - फोटो : अमर उजाला
सेक्टर-32डी स्थित कोठी नंबर-3325 में पिछले डेढ़ साल से अवैध रूप से गर्ल्स पीजी चलाया जा रहा था। इस पीजी में करीब 30 से ज्यादा कमरे हैं। शनिवार को ज्यादातर छात्राएं पीजी से बाहर थीं। शाम चार बजे अचानक पीजी के एक कमरे से धुआं निकलने लगा। महिला केयर टेकर बब्बू ने आग भड़कते देख शोर मचा दिया।

इसके बाद करीब 20 छात्राएं पीजी से निकलने में कामयाब हो गईं जबकि पांच छात्राएं फेमिना, जैसमीन, मुस्कान, रिया और पाक्षी अंदर ही फंस गईं। किसी तरह फेमिना और जैसमीन ने कुर्सी के सहारे पहली मंजिल से पड़ोसी के घर में छलांग लगाकर जान बचाई जबकि मुस्कान, रिया और पाक्षी अंदर ही फंस गईं। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने किसी तरह से तीनों को बाहर निकालकर जीएमसीएच-32 पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।

एसडी कालेज में पढ़ती थीं पाक्षी और मुस्कान
पाक्षी अरोड़ा सेक्टर-32 स्थित एसडी कॉलेज में बीबीए की छात्रा थी जबकि रिया अरोड़ा सेक्टर-31 स्थित एक इंस्टीट्यूट में फ्रेंच लैंग्वेज की कोचिंग ले रही थी। वहीं मुस्कान भी एसडी कालेज से एमकॉम की छात्रा थी। हादसे के बाद तीनों का परिवार सदमे है। तीनों के शव को जीएमसीएच-32 के मोर्चरी में रखवा दिए गए हैं। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

स्थानीय लोगों ने पीजी बंद कराने को दी थी शिकायत
इलाके के लोगों ने बताया कि अगस्त 2018 से अवैध तरीके से पीजी का संचालन किया जा रहा था। पीजी में 34 छात्राएं रहती हैं। कोठी का मालिक गौरव अनेजा है, जिसने अपनी कोठी को नीतेश बंसल नामक व्यक्ति को किराए पर दिया है, जो पीजी चला रहा है। अवैध तरीके से चलने वाले पीजी को बंद करवाने के लिए कई बार स्थानीय लोगों ने शिकायतें भी दी हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हादसे की जांच के आदेश, एडवाइजर ने डीसी की अध्यक्षता में बनाई कमेटी 
सेक्टर-32डी के गर्ल्स पीजी में आग लगने की घटना ने चंडीगढ़ प्रशासन की ‘स्मार्टनेस’ की पोल खोलकर रख दी है। हादसे के बाद एडवाइजर मनोज परिदा ने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी डीसी मंदीप सिंह बराड़ को सौंप दी है। साथ ही जांच की रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपने के आदेश दिए हैं। हालांकि एडवाइजर की तरफ से इस जांच के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।

छोटी सी जगह में टीनशेड लगाकर बनाए गए हैं कमरा

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जांच में जुटे पुलिसकर्मी। - फोटो : अमर उजाला
कोठी में चलाए जा रहे पीजी के टॉप फ्लोर पर फर्जी तरीके से टीनशेड लगाकर छोटे-छोटे कमरे बनाए गए हैं। पीजी से निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है। छोटे से जगह में 10 से 12 कमरे बनाए गए हैं, जिनमें 34 छात्राएं रहती थीं। पीजी की पिछली तरफ की टीन शेड पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

इन चीजों का नुकसान
इस आग में लाखों रुपये के सामान जलकर राख हो गया, जिसमें बेड, कपड़े, लैपटॉप, मोबाइल, कैश, किताबें, जरूरी कागजात समेत अन्य सामान जलकर राख हो गया। घटना के बाद फायर ब्रिगेड की टीम देर रात तक आग के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है।  

टाइम लाइन
1. शाम 4 बजे आग की सूचना
2. 4.10 मिनट पर दमकल पहुंची
3. 4.15 बजे थाना पुलिस पहुंची
4. 4.20 बजे झुलसी छात्राओं को बाहर निकाला
5. 5.55 बजे पूरी तरह आग बुझा दी गई
 

मैंने काफी कोशिश की सहेलियों को बचाने की.. पर नाकाम रही

Major fire breaks out at a house in Chandigarh
शाम पौने चार बज रहे थे.. मैं अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी। तभी अचानक बाहर से शोर और चीखने की आवाजें आने लगीं। मैं दौड़कर बाहर आई तो हर तरफ धुआं फैला हुआ था। कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। हाल यह था कि सामने का कमरा तक नजर नहीं आ रहा था, जिसमें मेरी सहेलियां रहती हैं। मैं बस आवाज सुन पा रही थी।

पहले उनकी तरफ जाने का सोचा, लेकिन रास्ता नहीं दिख रहा था। जैसे-तैसे घर के पीछले हिस्से में पहुंची और वहां से नीचे कूद गई। उसके बाद पड़ोसी के घर में पहुंचीं, जिसके बाद मुझे कुछ याद नहीं... मैंने काफी कोशिश की अपनी सहेलियों को बचाने की... लेकिन कुछ नहीं कर सकी। यह आपबीती है हादसे में पहली मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाने वाली घायल जैसमीन की।

जैसमीन ने बताया कि हादसे के दौरान घर में पाक्षी, रिया, मुस्कान और फेमिना समेत कई लड़कियां थीं। सभी अपने-अपने काम में लगे थे। चूंकि परीक्षा की तैयारी करनी थी तो मैं पढ़ाई कर रही थी। खाना खाने के बाद दोपहर में पढ़ाई करने बैठ गई। तभी अचानक से मुस्कान और पाक्षी की चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। मुझे लगा कि वह मजाक कर रहीं हैं आपस में।

उसके बाद अचानक से रिया की भी चिलाने की आवाज आई तो मुझे लगा कुछ गड़बड़ है। अपने कमरे का दरवाजा खोला तो धुएं के कारण कुछ भी नहीं दिख रहा था। अब मैं जाती तो कहां जाती। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। तभी मैं मुस्कान और रिया के कमरे की ओर बढ़ी, लेकिन धुएं के कारण आगे न बढ़ सकी। उसके बाद देखा कि आगे पूरे घर में आग लगी हुई है।

मैं पीछे की ओर दौड़ पड़ी। घर की पहली मंजिल से पहले नीचे कूदी, उसके बाद छोटी सी बाउंड्री से पड़ोसी के घर में निकल आई। मेरे पीछे ही फेमिना आ रही थी, मैंने उसे हाथ देकर अपनी तरफ बुलाया। अपनी दोस्तों को आग में फंसा देख बस आंसू बहाने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। काश! मैं अपनी सहेलियों को बचा सकती... वह हादसा मेरी जेहन में घूम रहा है। शायद जीवन में इसे कभी नहीं भूल पाऊंगी।
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