Maha shivratri 2023: महाशिवरात्रि पर बन रहा है सर्वार्थ सिद्धि योग, मंदिरों में होगी चार प्रहर की पूजा
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि 19 फरवरी को दोपहर बाद चार बजकर 18 मिनट पर चतुर्दशी समाप्त होगी। शनिवार को सूर्योदय सुबह सात बजकर पांच मिनट पर है। रविवार को सुबह सात बजकर चार मिनट पर सूर्योदय होगा।
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इस वर्ष महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि का योग बन रहा है। मंदिरों में भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा होगी। इस दिन अष्टम मुहूर्त रात 12 बजे आएगा। महाशिवरात्रि में अष्टम मुहूर्त का विशेष महत्व है। यह बात सेक्टर- 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही।
18 फरवरी को रात आठ बजकर दो मिनट से चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो रही है, जिसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। शिवरात्रि जब अष्टम मुहूर्त हो तभी शिवरात्रि मनाई जाती है। अष्टम मुहूर्त सूर्यास्त के बाद रात 12 बजे तक रहता है। इसलिए इस वर्ष महाशिवरात्रि 18 फरवरी दिन शनिवार को मनाई जा रही है।
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि 19 फरवरी को दोपहर बाद चार बजकर 18 मिनट पर चतुर्दशी समाप्त होगी। शनिवार को सूर्योदय सुबह सात बजकर पांच मिनट पर है। रविवार को सुबह सात बजकर चार मिनट पर सूर्योदय होगा।
चार प्रहर की पूजा
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा में रुद्राभिषेक और 1008 शिवनाम की अराधना का विशेष महत्व माना गया है। भगवान शिव को प्रसन्न करने का बेहतरीन अवसर शिव भक्तों का है।
पहली पूजा
शाम 6:08 बजे से रात 9:15 बजे तक
दूसरी पूजा
शाम 9:16 बजे से लेकर रात 12:30 बजे तक
तीसरी पूजा
रात 12:31 बजे से 3:45 बजे तक
चौथी पूजा
3:46 बजे से लेकर सुबह 7 बजे तक चार प्रहर की पूजा होगी।
ऐसे करें भगवान की पूजा
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि सबसे पहले भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। भगवान को वेल पत्र का आसन देकर पंच जल से स्नान कराएं। इसके बाद पंचामृत से स्नान कराने के बाद पुन: शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है।
भगवान को वस्त्र, यज्ञोपवीत धारण कराना चाहिए। धूप, दीप, नैवेद्य और फल चढ़ाकर भगवान की आरती करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 1008 वेलपत्र से भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है।
महाशिवरात्रि साधना के लिए भी विशेष दिन
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के प्रमुख पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि साधना के लिए भी विशेष दिन होता है। उन्होंने बताया कि शत्रु नाश के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करें। लक्ष्मी के लिए गन्ना के रस से, संतान प्राप्ति के लिए पंचामृत से, विद्या प्राप्ति के लिए दूध और गंगाजल से, सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति के लिए दूध से भगवान का अभिषेक करने का विधान है।
महाशिवरात्रि पर होगा भव्य आयोजन: अरोड़ा
हिंदू पर्व महासभा चंडीगढ़ के अध्यक्ष बीपी अरोड़ा ने बताया कि शहर के मंदिरों में भव्य आयोजन होगा। इसकी तैयारियां चल रही हैं। मंदिर कमेटियों की ओर से दूध और फल का लंगर लगाया जाएगा। शिव भक्तों का महाशिवरात्रि का इंतजार है।