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बचपन में पोलियो की शिकार बनीं पूनम ने हार नहीं मानी, पैरा ओलंपिक टेबल टेनिस में हासिल किया खास मुकाम
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चंडीगढ़। जब होश संभाला तो खुद के पैरों पर खड़े होने में असमर्थ थी, लेकिन अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से उन्होंने अपनी कमजोरी को ही कामयाबी का जरिया बना डाला। आज वह देश-विदेश में भारत का नाम रोशन कर रही हैं। हम बात कर रहे हैं पैरा ओलंपिक टेबल टेनिस खिलाड़ी पूनम की। दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने कड़ा संघर्ष किया और सफलता हासिल की। पूनम राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक कई मेडल बटोर चुकी हैं और लाखों लड़कियों के लिए आदर्श हैं।
पूनम ने बताया कि सात साल की उम्र में वह पोलियो की चपेट में आ गईं थीं, जिससे उनका एक पैर खराब हो गया। वह ठीक से चल भी नहीं पाती थीं। लेकिन छोटी सी उम्र में भी उन्होंने अपनी कमजोरी को अपना भाग्य मानने की गलती नहीं की। सभी बाधाओं से संघर्ष करते हुए जुट गईं अपनी तकदीर लिखने में। मन लगाकर पढ़ाई शुरू की। स्कूल में भी एक कक्षा भूमि तल पर लगती थी तो दूसरी दूसरे तल पर लेकिन पूनम कमजोर नहीं पड़ीं। पढ़ाई के दौरान शादी हुई। मां बनने के बाद भी वह अपने कॅरिअर को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं।
पति को खेलता देख खेलने का लिया निर्णय
पूनम ने बताया कि पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी के तौर पर खुद को साबित करना बेहद कठिन था। पूनम के पति मुकेश भी पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं। पति को कड़ी मेहनत और लगन से खेलता देख पूनम ने भी उनकी तरह बनने का निर्णय लिया। शुरुआत में जितनी दिक्कतें आईं, पूनम उन्हें हराती गईं। फिर वो दिन भी आया जब पूनम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए उड़ान भरी। तब से सफलता का सफर जारी है।
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कानून की पढ़ाई भी पूरी की
पूनम ने घर और खेल की जिम्मेदारी निभाने के साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। मौजूदा समय में पूनम ने वकालत की पढ़ाई भी पूरी कर ली है। अब जज बनने की तैयारी कर रही हैं।
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पूनम ने बताया कि सात साल की उम्र में वह पोलियो की चपेट में आ गईं थीं, जिससे उनका एक पैर खराब हो गया। वह ठीक से चल भी नहीं पाती थीं। लेकिन छोटी सी उम्र में भी उन्होंने अपनी कमजोरी को अपना भाग्य मानने की गलती नहीं की। सभी बाधाओं से संघर्ष करते हुए जुट गईं अपनी तकदीर लिखने में। मन लगाकर पढ़ाई शुरू की। स्कूल में भी एक कक्षा भूमि तल पर लगती थी तो दूसरी दूसरे तल पर लेकिन पूनम कमजोर नहीं पड़ीं। पढ़ाई के दौरान शादी हुई। मां बनने के बाद भी वह अपने कॅरिअर को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं।
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पति को खेलता देख खेलने का लिया निर्णय
पूनम ने बताया कि पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी के तौर पर खुद को साबित करना बेहद कठिन था। पूनम के पति मुकेश भी पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं। पति को कड़ी मेहनत और लगन से खेलता देख पूनम ने भी उनकी तरह बनने का निर्णय लिया। शुरुआत में जितनी दिक्कतें आईं, पूनम उन्हें हराती गईं। फिर वो दिन भी आया जब पूनम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए उड़ान भरी। तब से सफलता का सफर जारी है।
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कानून की पढ़ाई भी पूरी की
पूनम ने घर और खेल की जिम्मेदारी निभाने के साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। मौजूदा समय में पूनम ने वकालत की पढ़ाई भी पूरी कर ली है। अब जज बनने की तैयारी कर रही हैं।