नवरात्र शुरू, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
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शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 25 सितंबर से हो रहा है। वीरवार को ही अल सुबह 4 बजकर 40 मिनट से सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। किसी कारणवश इस समय देवी पूजन या कलश स्थापन न हो पाए तो अभिजीत मुहूर्त में करना चाहिए।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। यह कहना है सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का। उन्होंने बताया राहु काल में कलश स्थापना निषेध है। उस दिन राहु काल दोपहर एक बजकर 30 मिनट से दोपहर बाद तीन बजे तक रहेगा।
उन्होंने बताया देवी व्रत में कन्या पूजन का बहुत महत्व है। एक कन्या के पूजन से ऐश्वर्य, दो से मोक्ष, तीन से धर्म, अर्थ, काम, चार की पूजा से राजपक्ष से लाभ, पांच की पूजा से विद्या, छह की पूजा से यंत्र, मंत्र, तंत्र की प्राप्ति, सात की पूजा से राजपद की प्राप्ति, आठ की पूजा से धन और नौ कन्याओं की पूजन से विजय की प्राप्ति होती है।
अष्टमी और नवमी एक ही दिन
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, अष्टमी और नवमी दो अक्तूबर को है। क्योंकि अष्टमी में नवमी की पूजा करने का प्रमाण शास्त्रों में है। नवमी में दशमी हो तो नवमी की पूजा का विधान नहीं है।
उनके अनुसार, 2 अक्तूबर को अष्टमी 12 बजकर आठ मिनट तक है। इसके बाद नवमी प्रारंभ हो जाएगी, जो तीन अक्तूबर को नौ बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इसलिए अष्टमी और नवमी दो अक्तूबर को है।
ऐसे मनाए मां दुर्गा को
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के प्रमुख पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि सुबह या अभिजीत मुहूर्त में गौरी गणेश और कलश स्थापन के बाद देवी का पूजन करना चाहिए। शांति पाठ के बाद संकल्प कर दीपक पूजन करना चाहिए। आरती के बाद पुष्पांजलि और क्षमा प्रार्थना करना जरूरी है।
नेताओं को सहना पड़ेगा अपमान
देवालय पूजक परिषद् के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे के अनुसार, इस वर्ष नवरात्र का प्रवेश बृहस्पतिवार को हस्त नक्षत्र में हो रहा है। हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। शुक्र भी कन्या राशि में प्रवेश कर रहा है।
चंडीगढ़ की राशि मीन होने के कारण चंडीगढ़ में सुख शांति और समृद्धि तो रहेगी, लेकिन शुक्र का प्रवेश होने के कारण चंडीगढ़ के नेताओं के लिए यह समय अच्छा नहीं रहेगा। क्योंकि बृहस्पति का शत्रु शुक्र है। ऐसे नेताओं को जनता या राजपक्ष से अपमान होने का भी योग है।