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अद्भुत कला देखनी है तो आइए लक्ष्मी नारायण मंदिर
ब्यूरो/अमर उजाला, साढौरा
Updated Tue, 22 Apr 2014 02:57 PM IST
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ऐतिहासिक तोरावाला तालाब के किनारे स्थित प्राचीन श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर को अद्भुत कला के नमूनों से सजाया जा रहा है। इस मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिए श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर जीर्णोद्धार समिति पिछले सात वर्ष से इस मंदिर के नव निर्माण के लिए जी जान से जुटी हुई है।
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2007 में इस मंदिर प्रांगण में मंदिर के जीर्णोद्धार का शिलान्यास संत बाबा बंसी वाला द्वारा किया गया था। तब से लेकर इस मंदिर में सभी धार्मिक समागम धूमधाम से मनाए जाते हैं। विगत कुछ वर्षों से मंदिर प्रांगण में मनाई जाने वाली श्री कृष्ण जन्म अष्टमी और होली महोत्सव में शामिल होने के लिए दूरदराज क्षेत्र से लोग आते हैं।
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मंदिर प्रांगण में दो नए भवनों का निर्माण करवाया गया है। पहले से ही विद्यमान मंदिरों के अनुरूप नए भवनों पर शिखर निर्माण करवाने के लिए मध्य प्रदेश से विशेष रूप से कारीगरों को बुलाया गया था। समिति सदस्य अवध बिहारी के मुताबिक मंदिर के शिखरों को प्राचीन वास्तुकला के अनुरूप बनाया गया है।
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मंदिर के गर्भों में प्राचीन चित्रकारी
तोरावाला तालाब के किनारे बने मंदिर शिवालय और लक्ष्मी नारायण मंदिर के गर्भ गृह में 400 साल से अधिक पुरानी चित्रकारी मौजूद है। समिति के सचिव प्रेम चंद अरोड़ा के मुताबिक मंदिर जीर्णोद्धार करवाते समय दीवारों पर पुरानी चित्रकारी के को त्यों का त्यों रखा गया है तथा दो नए मंदिरों के गर्भ गृह में नई चित्रकारी करने के लिए दिल्ली से शीशे के विशेष नक्काश कारीगरों की सेवाएं ली जा रही है।
इसके अलावा मंदिर के लक्कड़ के दरवाजों की बारीक नक्काशी के लिए यूपी के मुस्लिम कारीगरों को विशेष रूप से बुलाया गया है जोकि पिछले चार माह से मंदिर की दीवारों और दरवाजों पर अपना हुनर उकेर रहे हैं।
इसके अलावा मंदिर की बाहरी दीवारों को प्रकृति लुक देने के लिए उन पर बेल पत्तों की नक्काशी करवाई जा रही है जिसके लिए बिहार समस्तीपुर के अनुभवी कारीगरों की सेवाएं ली जा रही है।
दो मई को होगी प्राण प्रतिष्ठा
मंदिर प्रांगण में दो मई को मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। समिति के मनीष गर्ग और महेश बंसल ने बताया कि मंदिर प्रांगण में मां दुर्गा, संकट मोचन हनुमान, श्री लक्ष्मी नारायण, शिव परिवार और राधा कृष्ण जी की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा दो मई को धूमधाम से की जाएगी। इसके लिए 26 अप्रैल से धार्मिक अनुष्ठान आरंभ कर दिए जाएंगे। एक मई को कस्बे में शोभा यात्रा के रूप में भव्य नगर परिक्रमा निकाली जाएगी।
शिवालय का है प्राचीन इतिहास
लक्ष्मी नारायण मंदिर के समीप स्थित प्राचीन शिवालय मंदिर प्राचीन इतिहास संजोए हुए हैं। कहा जाता है कि शिवालय में स्थापित शिव लिंग नर्मदा नदी से आया था। इस पर प्राकृतिक रूप से सर्प की आकृति स्पष्ट है। यह भगवान नर्मदेश्वर के नाम से भी जाना जाता है।
पांडवों ने बनाया था तालाब
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के समीप स्थित तोरावाला तालाब महाभारत के काल का है। कहा जाता है कि इस तालाब का निर्माण पांडवों ने करवाया था। एक किवदंती के अनुसार महाभारत के युद्ध के पश्चात पांडव इसी स्थान पर आकर रुके थे तथा उन्होंने इस स्थान पर तालाब खुदवा कर इसमें स्नान किया था इसके पश्चात पांडव कपाल मोचन गए थे। जहां के सरोवरों में उन्होंने अपने अस्त्र शस्त्र धोए थे।
मंदिर ट्रस्ट का विशेष सहयोग
किसी समय काफी दयनीय हालत में पहुंच चुके प्राचीन श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर को वर्तमान हालत में पहुंचाने के लिए श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर सेवा ट्रस्ट का विशेष सहयोग रहा है। समिति के संरक्षक दर्शन लाल जैन ने व्यक्तिगत रूप से इस मंदिर के जीर्णोद्धार में रुचि ली। उनके अलावा ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने भी मंदिर के जीर्णोद्धार में विशेष प्रयत्न किए। समिति के संरक्षक रामकिशन अग्रवाल ने बताया कि सरस्वती शोध संस्थान के अध्यक्ष और ट्रस्ट के संरक्षक दर्शन लाल जैन जीर्णोद्धार के अवसर पर होने वाले समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।