स्किम मिल्क पाउडर से तैयार हुआ सस्ता और बेहतर खोया, नकली को करें बाय-बाय, ये हैं खूबियां
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लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) ने स्किम मिल्क पाउडर (बिना फैट वाला दूध) से खोवा तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि यह सस्ता और ज्यादा पौष्टिक भी है।
बता दें कि लुवास के वैज्ञानिक डॉ पीके भारद्वाज की गाइडेंस में शोधार्थी वकील ने यह खोवा तैयार करने में सफलता हासिल की। इस तैयार करने से पहले प्रदेश के तीन जिलों कैथल, कुरुक्षेत्र व हिसार से खोवे के सैंपल एकत्रित किए गए। जब इनकी कंपोजिशन का पता लगाया गया तो सामने आया कि ज्यादातर सैंपल की क्वालिटी अच्छी नहीं थी।
ऐसे बनाया खोवा
खोवा तीन तरह का होता है, जिसमें पिंडी, दानेदार व धाप खोवा शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने स्किम मिल्क पाउडर से धाप खोवा तैयार किया है। गुलाब जामुन बनाने में धाप खोवा ही इस्तेमाल में लाया जाता है। इस खोवे की खासियत यह है कि इसमें सबसे ज्यादा नमी होती है।
इस दौरान दो तरीकों से खोवा बनाया गया, एक क्रीम की सहायता से और दूसरा घी से। क्रीम की सहायता से खोवा बनाने के लिए मिल्क पाउडर व क्रीम को मिलाकर (होमोनाइजेशन) खोवा बनाया गया है। इसके अलावा दूसरे तरीके में मिल्क पाउडर और घी को मिलाया गया। फिर इसमें बोडिंग के लिए दो प्रतिशत व्हे प्रोटीन कंस्नट्रेट को मिलाया, जिसके बाद सस्ता व उत्तम क्वालिटी का धाप खोवा मिला।
एफएसएसआई के मानकों पर भी खरा उतरा
विश्वविद्यालय के अनुसार उनके द्वारा तैयार किया गया खोवा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसआई) के मानकों पर भी खरा उतरा है। एफएसएसआई के मानकों में मिल्क टोटल सॉलिड, मिल्क फैट, टोटल ऐश, टाइट्रेबल एसिडिटी परसेंटेज एंड मॉयश्चर शामिल हैं।
बाजारों में मिल रहा नकली खोवा
सूत्रों के अनुसार बाजारों में बड़े पैमाने पर नकली व मिलावटी खोवा तैयार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर व हरियाणा के नूंह जिला खोवे की एक बड़ी मंडी माने जाते हैं लेकिन अब यहां से आने वाले खोवे में भी शिकायत आने लगी है। फिलहाल बाजार में मेज स्टार्च, पोटैटो स्टार्च व आरारोट मिलाकर मिलावटी खोवा तैयार किया जा रहा है और इसे शुद्ध व असली खोवा बताकर बाजार में कम रेट पर बेचा जा रहा है।
मार्केट से सस्ता है यह खोवा
विश्वविद्यालय के अनुसार मार्केट में अच्छी क्वालिटी के खोवे का रेट करीब 350 रुपये प्रति किलोग्राम है। मगर उन्होंने जो खोवा तैयार किया है, वह इससे सस्ता है। क्रीम मिलाकर तैयार किया गए खोवे की लागत 273 रुपये प्रति किलो और घी मिलाकर तैयार किए गए खोवे की लागत 282 रुपये प्रति किलोग्राम आई है। यही नहीं इसमें दो प्रतिशत प्रोटीन भी है।
प्रदेश सरकार को भेजा है प्रपोजल
विश्वविद्यालय के अनुसार उन्होंने सरकार को एक प्रपोजल भी बनाकर भेजा है। इसके मुताबिक कोऑपरेटिव सोसायटियों के पास अगर सरप्लस में मिल्क पाउडर (बिना फैट वाला) है तो उसका इस्तेमाल खोवा बनाने में किया जा सकता है, जिससे त्योहारों के सीजन में खोवे की कमी को भी दूर किया जा सकता है।
हमने जो तकनीक ईजाद की है, अगर इसकी मदद से खोवा बनाया जाए तो उत्तम क्वालिटी व सस्ता खोवा तैयार किया जा सकता है।-प्रो डॉ पीके भारद्वाज, प्रोफेसर, एलपीटी डिपार्टमेंट, लुवास