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कोविड से फेफड़े हुए कमजोर, एलर्जी वाली चीजों से रहें दूर
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विश्व अस्थमा दिवस पर खास
फोटो सहित
कोविड से फेफड़े हुए कमजोर, एलर्जी वाली चीजों से रहें दूर
विशेषज्ञ बोले- पराली के संपर्क में आने से अस्थमा के अटैक वाले मामले बढ़ रहे हैं तेजी से, इससे करें बचाव
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा फेफड़े को प्रभावित किया है। ऐसे में जो अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी से पहले से पीड़ित हैं उनके लिए खतरा ज्यादा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर फेफड़ों में जरा सी परेशानी में सांस लेने में अवरोध होने लगता है इसलिए कोशिश होनी चाहिए कि जिन चीजों से एलर्जी हो उसके संपर्क में न आया जाए। वहीं मौजूदा समय में पराली भी सांस के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ाने का काम कर रहा है। पराली के संपर्क में आने से अस्थमा के अटैक वाले मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे बचाव के लिए ऐसी जगह से दूर रहने के साथ ही मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है।
जीएमएसएच-16 के टीबी एंड चेस्ट विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. हनी साहनी का कहना है कि सांस के मरीजों को बेहद सजग रहने की जरूरत है क्योंकि कोरोना महामारी में सबसे ज्यादा फेफड़े ही कमजोर हुए हैं। मास्क पहनने की आदत को हमेशा के लिए अपना लें। यह संक्रमण से बचाव के साथ ही फेफड़े को भी प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बचाने में कारगर है। वहीं, पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जफर अहमद इकबाल का कहना है कि हर साल पराली जलाने के मौसम में अस्थमा के मामले बढ़ जाते हैं। आमतौर पर मई-सितंबर तक ये मामले अपने शिखर पर होते हैं। अस्थमा के शुरुआती लक्षणों को समझने और आवश्यक सावधानियों का पालन करने से अटैक जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
इनसेट-
देखभाल में न करें अनदेखी, परिणाम हो सकते हैं गंभीर
2022 में विश्व अस्थमा दिवस की थीम क्लोजिंग गैप इन अस्थमा केयर है यानी अस्थमा के देखभाल में अंतराल बंद किया जाए जिससे स्थिति गंभीर होने की नौबत ही न जाए। अस्थमा वायुमार्ग में सूजन की बीमारी है। इसकी वजह से सांस की नली में सूजन हो जाती है जिसकी वजह से फेफड़ों से हवा को बाहर लाना मुश्किल हो जाता है। इससे रोगी को सांस फूलने, घबराहट, सीने में जकड़ और खांसी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
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लक्षण दिखे तो ये करें
-सीधे बैठ जाएं और शांत रहने की कोशिश करें, लेटे नहीं
-हर 30 से 60 सेकंड में एक रिलीवर या रेस्क्यू इनहेलर का एक पफ लें जिसमें अधिकतम 10 पफ हों।
-यदि लक्षण खराब हो रहे हैं या 10 पफ के बाद भी सुधार नहीं हो रहा तो तत्काल अस्पताल जाएं।
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फोटो सहित
कोविड से फेफड़े हुए कमजोर, एलर्जी वाली चीजों से रहें दूर
विशेषज्ञ बोले- पराली के संपर्क में आने से अस्थमा के अटैक वाले मामले बढ़ रहे हैं तेजी से, इससे करें बचाव
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा फेफड़े को प्रभावित किया है। ऐसे में जो अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी से पहले से पीड़ित हैं उनके लिए खतरा ज्यादा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर फेफड़ों में जरा सी परेशानी में सांस लेने में अवरोध होने लगता है इसलिए कोशिश होनी चाहिए कि जिन चीजों से एलर्जी हो उसके संपर्क में न आया जाए। वहीं मौजूदा समय में पराली भी सांस के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ाने का काम कर रहा है। पराली के संपर्क में आने से अस्थमा के अटैक वाले मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे बचाव के लिए ऐसी जगह से दूर रहने के साथ ही मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है।
जीएमएसएच-16 के टीबी एंड चेस्ट विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. हनी साहनी का कहना है कि सांस के मरीजों को बेहद सजग रहने की जरूरत है क्योंकि कोरोना महामारी में सबसे ज्यादा फेफड़े ही कमजोर हुए हैं। मास्क पहनने की आदत को हमेशा के लिए अपना लें। यह संक्रमण से बचाव के साथ ही फेफड़े को भी प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बचाने में कारगर है। वहीं, पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जफर अहमद इकबाल का कहना है कि हर साल पराली जलाने के मौसम में अस्थमा के मामले बढ़ जाते हैं। आमतौर पर मई-सितंबर तक ये मामले अपने शिखर पर होते हैं। अस्थमा के शुरुआती लक्षणों को समझने और आवश्यक सावधानियों का पालन करने से अटैक जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
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देखभाल में न करें अनदेखी, परिणाम हो सकते हैं गंभीर
2022 में विश्व अस्थमा दिवस की थीम क्लोजिंग गैप इन अस्थमा केयर है यानी अस्थमा के देखभाल में अंतराल बंद किया जाए जिससे स्थिति गंभीर होने की नौबत ही न जाए। अस्थमा वायुमार्ग में सूजन की बीमारी है। इसकी वजह से सांस की नली में सूजन हो जाती है जिसकी वजह से फेफड़ों से हवा को बाहर लाना मुश्किल हो जाता है। इससे रोगी को सांस फूलने, घबराहट, सीने में जकड़ और खांसी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
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लक्षण दिखे तो ये करें
-सीधे बैठ जाएं और शांत रहने की कोशिश करें, लेटे नहीं
-हर 30 से 60 सेकंड में एक रिलीवर या रेस्क्यू इनहेलर का एक पफ लें जिसमें अधिकतम 10 पफ हों।
-यदि लक्षण खराब हो रहे हैं या 10 पफ के बाद भी सुधार नहीं हो रहा तो तत्काल अस्पताल जाएं।