Chandigarh: पंजाब से ज्यादा चंडीगढ़ में फेफड़े के कैंसर का मर्ज, ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान
प्रो. ठाकुर ने बताया, चिंताजनक है कि पीड़ितों को बीमारी की जानकारी काफी देरी से पता चल रही है। इससे इलाज की जटिलताएं बढ़ती हैं। कई बार बीमारी को काबू करना भी मुश्किल होता है। उन्होंने कहा, अब यह केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं रह गई है। युवा भी चपेट में आ रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के शहरों के मुकाबले प्रदूषण मुक्त चंडीगढ़ में फेफड़े के कैंसर के मरीजों की संख्या अधिक है। पीजीआई की पॉपुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री रिपोर्ट के मुताबिक प्रति एक लाख आबादी पर चंडीगढ़ में करीब 13 फीसदी लोग फेफड़े के कैंसर से पीड़ित हैं। वहीं यह आंकड़ा मोहाली में 7.8, संगरूर में 2.6 और मानसा में 2.3 फीसदी है।
पीजीआई में गैर संचारी रोगों पर सोमवार को आयोजित कार्यशाला में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. जेएस ठाकुर ने बताया कि चंडीगढ़ जैसे छोटे शहर में प्रति व्यक्ति वाहनों की संख्या पूरे देश में सबसे ज्यादा है। इनमें डीजल के वाहनों की संख्या काफी अधिक है। इन वाहनों का जहरीला धुआं लोगों के फेफड़ों को कमजोर बना रहा है। हालांकि इसके अन्य कारण भी शामिल हैं। यहां धूम्रपान करने वालों की संख्या भी अधिक है। महिलाओं की तुलना में पुरुष ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
बीमारी की जानकारी देरी से पता चल रही
प्रो. ठाकुर ने बताया, चिंताजनक है कि पीड़ितों को बीमारी की जानकारी काफी देरी से पता चल रही है। इससे इलाज की जटिलताएं बढ़ती हैं। कई बार बीमारी को काबू करना भी मुश्किल होता है। उन्होंने कहा, अब यह केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं रह गई है। युवा भी चपेट में आ रहे हैं। इन कारणों की वजह से भारत में कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़े के कैंसर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण होने वाले फेफड़े के कैंसर से विश्व में हर साल 18 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
धूम्रपान वाले जांच जरूर करवाएं
प्रो. ठाकुर ने बताया कि कैंसर के खतरे को कम करने और इससे बचने के लिए धूम्रपान करने वाले लोगों को जांच जरूर करा लेनी चाहिए, क्योंकि उन्हें ज्यादा खतरा होता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से मात्र 10 फीसदी मरीज ही समय पर इलाज के लिए आ पाते हैं। 60 से 70 प्रतिशत मरीजों को इलाज देरी से मिलता है।
ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सचेत
- सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज सुनाई देना कैंसर का संकेत हो सकता है
- काफी समय से खांसी आना, खांसते-खांसते अचानक आवाज का बदल जाना
- खांसते समय मुंह से खून आना लंग्स कैंसर का लक्षण हो सकता है
- संक्रामक रोगों का तेजी से होना, सिर में तेज दर्द होना और शरीर में कमजोरी महसूस करना
- वजन तेजी से कम होना, भूख नहीं लगना
- चेहरे, हाथ, गर्दन और अंगुलियों में सूजन आना भी कैंसर का लक्षण हो सकता है
चंडीगढ़ में कैंसर के मरीज (पुरुष)
- कैंसर प्रतिशत
- फेफड़ा 12.9 प्रतिशत
- प्रोस्टेट 10.2 प्रतिशत
- इसोफेगस 5.8 प्रतिशत
- मूत्राशय 5.6 प्रतिशत
- मुंह 4.9 प्रतिशत