ये इश्क नहीं आसां: प्यार सच्चा हो तो ईश्वर को भी बदलना पड़ता है निर्णय...चंडीगढ़ के प्रेमियों ने साबित कर दिखाया
जीत जाएंगे हम तू अगर संग है... जिंदगी हर कदम इक नई जंग है। जी हां! कुछ इस तरह दांपत्य जीवन में उतार चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन प्यार की ताकत से इस पर पार पाया जा सकता है। ऐसा ही एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है रूपा अरोड़ा ने।
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प्यार सच्चा हो तो ईश्वर को भी अपना निर्णय बदलना पड़ता है। इसकी मिसाल कायम की है सतीश और सीमा के प्यार ने। गाजियाबाद निवासी सीमा की जिंदगी में सबकुछ सामान्य चल रहा था कि अचानक 2014 में तबियत खराब हुई। डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। फिर क्या था जिंदगी मानो थम सी गई। तीन साल तक इलाज चला, धीरे धीरे शरीर जवाब देने लगा। तब पति सतीश कौल ने साथ जीने मरने की कसम को चरितार्थ किया। उन्होंने सीमा से कहा कि हम दोनों के लिए हमारे पास दो किडनी तो हैं, फिर क्या चिंता करनी है।
सतीश की माता ने बेटे को किडनी देने से मना किया, बोलीं मैं बहू को एक किडनी दे देती हूं, लेकिन सतीश ने किसी की न सुनी। पीजीआई चंडीगढ़ रैफर होने पर सतीश ने किडनी देने की बात कही। जांच से पता चला कि दोनों का ब्लड ग्रुप एक ही है, इसलिए किडनी नहीं ली जा सकती। लेकिन ईश्वर ने कुछ और ही तय कर रखा था। ब्लड ग्रुप मिलान न होने के बावजूद दोनों के शरीर की आंतरिक चीजें एक-दूसरे से मिल गई। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसा दुनिया में महज 5 से 10 प्रतिशत लोगों में ही होता है। फिर क्या था 26 अक्तूबर 2018 को पीजीआई में सतीश की एक किडनी सीमा को प्रत्यारोपित की गई। प्यार की जिंदा मिसाल कायम करने वाले सतीश और सीमा आज सुखी दांपत्य जीवन जी रहे हैं।
मेरी दुनिया है उनमें कहीं, पति की जान बचाकर निभाया अर्धांगिनी का फर्ज
जीत जाएंगे हम तू अगर संग है... जिंदगी हर कदम इक नई जंग है। जी हां! कुछ इस तरह दांपत्य जीवन में उतार चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन प्यार की ताकत से इस पर पार पाया जा सकता है। ऐसा ही एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है रूपा अरोड़ा ने। प्रवीण कुमार रतन का लीवर खराब हो गया था। उनकी पत्नी रूपा अरोड़ा ने अर्धांगिनी होने का फर्ज अदा करते हुए अपना लीवर देकर उनकी जान बचाई। रूपा का कहना है कि उनकी जान बचाकर खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं, क्योंकि मेरी दुनिया है उनमें कहीं। 5 जुलाई 2011 को पीजीआई में रूपा का लीवर प्रवीण को प्रत्यारोपित किया गया। प्रवीण ने बताया कि जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, तब उनकी पत्नी ने सती सावित्री की तरह अपना फर्ज निभाया। अपनी चिंता किए बिना लीवर देने का निर्णय निर्णय लिया। वहीं रूपा इसे अपना सौभाग्य मानती हैं। उनका कहना है मेरी दुनिया मेरे पति से है। जब तक वे ठीक थे, उन्होंने मेरी छोटी से छोटी खुशी का ख्याल रखा। जब वो बीमार पड़े तो मैं पीछे कैसे हट सकती थी। अपना लीवर देकर उनकी जान बचाना खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं, क्योंकि मेरी दुनिया है उनमें कहीं।
परिवार के विरोध के बाद भी नहीं छोड़ा साथ, सबको मनाकर हुए एक-दूजे के
प्यार को किसी सरहद या भाषा में नहीं बांधा जा सकता। प्यार तो कहीं भी, किसी से भी हो सकता है। प्यार की ऐसी ही कहानी है चंडीगढ़ के चेतन भसीन और उत्तराखंड की अनीता की। दोनों ने पहाड़ और मैदान के बीच की दूरी को मिटाकर एक साथ जीने की कसम खाई और परिवार के विरोध के बावजूद एक-दूसरे के साथ डटकर खड़े रहे। आखिरकार इनका प्यार परवान चढ़ा और आज दोनों एक-दूजे के साथ हैं। चेतन दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करते थे। यहीं उनकी मुलाकात अनीता से हुई। कंपनी के साथी कब एक दूसरे के प्यार में पड़ गए, उन्हें पता ही नहीं चला। दोनों ने एक दूसरे के साथ जीवन बिताने की इच्छा जताई तो परिवार ने साफ इनकार कर दिया। दोनों ने तय किया कि परिवार की मर्जी के बिना शादी नहीं करेंगे। परिवार को मनाया और उनकी मर्जी से शादी हुई। आज दोनों अपने परिवार के साथ खुश हैं।

पति ने हौसला दिया तो संभाल ली जीवन की गाड़ी
कहते हैं पति-पत्नी गाड़ी के दो पहियों की तरह होते हैं। दोनों के बीच संतुलन बना रहे तो बड़ी से बड़ी मुसीबत भी दांपत्य जीवन को प्रभावित नहीं कर सकती। सेक्टर-56 निवासी राजबाला ने विषम परिस्थितियों में पति का साथ पाकर जीवनयापन के लिए एक ढाबा खोला। राजबाला कहतीं हैं उनके पति हर कदम पर उनका साथ देते हैं। दोनों की शादी को 37 साल हो गए लेकिन दोनों का प्यार आज भी वैसे ही है, जैसे पहले था। मूलरूप से हरियाणा की रहने वालीं राजबाला ने बताया कि वर्ष 1985 में उनकी शादी पंजाब के एक गांव में हुई थी। एक साल बाद पति उन्हें चंडीगढ़ लेकर आ गए। उस समय सिर पर छत थी न कमाई का कोई साधन। दो साल तक किसी तरह गुजर बसर किया लेकिन हिम्मत टूटने लगी। तब पति ने हौसला बढ़ाया। फिर वर्ष 1998 में किसी से मदद लेकर एक ढाबा खोला। शुरुआत में ग्राहक कम थे तो समस्या हुई। धीरे-धीरे खाने की गुणवत्ता को देखकर ग्राहक बढ़ने लगे। अब काम ठीक चल रहा है। राजबाला कहती हैं कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति उनके पति का साहस है।