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प्यार मल्लिका भी है, शकुंतला भी
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चंडीगढ़। प्रेम मल्लिका है, प्रेम शकुंतला है, प्रेम मुमताज है, प्रेम सुधा है। प्यार की इस परिभाषा से शुरुआत हुई रंगमंच की खूबसूरत कहानी ‘लम्हों की मुलाकात’ में, जिनसे प्यार के हर अहसास को मानों जी लिया हो। इस नाटक के साथ बाल भवन में आयोजित 15वें टीएफटी थियेटर फेस्टिवल ने मंगलवार को दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। नाटक की कहानी कृष्ण चंदर की 2 कहानियों - पूरे चांद की रात और शहजादा पर आधारित है । इसका नाटक मुश्ताक काक ने किया।
मंचन पर हर अहसास और भाव ने जीता दर्शकों का दिल
नाटक की कहानी में प्यार को बेहद खूबसूरती से कलाकारों ने बयां किया। प्यार सिर्फ एक काम नहीं है। वह एक अजीब अवधारणा है, सभी बाधाओं करती हुई। गहनता से चलती हुई छोटी-छोटी प्रेम कहानियां। उस पर बहुत सा साहित्य साहित्य लिखा गया है। वास्तव में दुनिया की बहुत सी महान, कालजयी रचनाओं का आधार प्रेम ही है । प्रेम मल्लिका है, प्रेम शकुंतला है, प्रेम मुमताज है, प्रेम सुधा है। कहानी में प्रेम और समर्पण का दुखद वर्णन किया गया और बताया गया कि यह लोगों को इस कदर बदल देता है कि वे अपनी पूरी पहचान को बदलने के लिए तैयार हो जाते हैं। अपने अस्तित्व को अपने प्रिय के लिए समर्पित करने पर केवल विश्वासघात पाना । नाव बदल जाती है, लेकिन नदी के किनारे उन प्रेम कहानियों को बताने के लिए रहते हैं जो उनमें पनपी थी और कोई भी प्रेम को परिभाषित नहीं कर पाई। यह दुनिया की अवधारणा से बाहर है। इसमें मुख्य भूमिका गिन्नी बब्बर, शिखा जैन, जतिन शर्मा, राज बहादुर, इनाब खीजरा और जतिन गौर ने निभाई। वहीं बैक स्टेज पर अदनान कोहली, विकास बहारी, मोहित मेहरा, संदीप वर्मा थे। यह नाटक एमेचुर थियेटर ग्रुप जम्मू एंड कश्मीर की ओर से प्रस्तुत किया गया।
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मंचन पर हर अहसास और भाव ने जीता दर्शकों का दिल
नाटक की कहानी में प्यार को बेहद खूबसूरती से कलाकारों ने बयां किया। प्यार सिर्फ एक काम नहीं है। वह एक अजीब अवधारणा है, सभी बाधाओं करती हुई। गहनता से चलती हुई छोटी-छोटी प्रेम कहानियां। उस पर बहुत सा साहित्य साहित्य लिखा गया है। वास्तव में दुनिया की बहुत सी महान, कालजयी रचनाओं का आधार प्रेम ही है । प्रेम मल्लिका है, प्रेम शकुंतला है, प्रेम मुमताज है, प्रेम सुधा है। कहानी में प्रेम और समर्पण का दुखद वर्णन किया गया और बताया गया कि यह लोगों को इस कदर बदल देता है कि वे अपनी पूरी पहचान को बदलने के लिए तैयार हो जाते हैं। अपने अस्तित्व को अपने प्रिय के लिए समर्पित करने पर केवल विश्वासघात पाना । नाव बदल जाती है, लेकिन नदी के किनारे उन प्रेम कहानियों को बताने के लिए रहते हैं जो उनमें पनपी थी और कोई भी प्रेम को परिभाषित नहीं कर पाई। यह दुनिया की अवधारणा से बाहर है। इसमें मुख्य भूमिका गिन्नी बब्बर, शिखा जैन, जतिन शर्मा, राज बहादुर, इनाब खीजरा और जतिन गौर ने निभाई। वहीं बैक स्टेज पर अदनान कोहली, विकास बहारी, मोहित मेहरा, संदीप वर्मा थे। यह नाटक एमेचुर थियेटर ग्रुप जम्मू एंड कश्मीर की ओर से प्रस्तुत किया गया।
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