वर्ल्ड कप से स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को करोड़ों का घाटा
क्रिकेट वर्ल्ड कप 2015 का क्रेज इस बार फीका ही साबित हुआ। विश्व प्रसिद्ध जालंधर स्पोर्ट्स मार्केट के छोटे व्यापारियों का कोई बड़ा आर्डर नहीं मिला है।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार क्रिकेट सामान का 20 फीसदी ही सामान निकला है, बाकी सामान व्यापारी गोदाम में रखने को मजबूर हैं।
जालंधर की प्रसिद्ध बस्ती नौ स्पोर्ट्स मार्केट के व्यापारियों ने वर्ल्ड कप की शुरुआत से पहले ही क्रिकेट बैट्स तैयार करवाकर, पैकिंग तक करवा दिए थे। मगर उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
साल 2012 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में मार्केट में काफी तेजी रही, उस साल भारतीय टीम वर्ल्ड कप जीतने में कामयाब हुई और स्पोर्ट्स व्यापार में जमकर तेजी आई थी।
क्रिकेट ड्रेस भी नहीं बिक पाई
क्रिकेट वर्ल्ड कप को लेकर पहले बच्चों में खासी उमंग होती थी, मगर इस बार ऐसा कुछ नहीं है। भारतीय क्रिकेट टीम के क्रिकेटरों की तरह बच्चे क्रिकेट ड्रैस पहनने का शौक रखते थे, लेकिन इस बार क्रिकेट ड्रैस का व्यापार भी ठप ही गया है। स्पोर्ट्स कारोबारी रविंदर धीर का कहना है कि इंडियन क्रिकेट टीम की तर्ज पर बनाई गई ड्रेस अब धूल फांक रही है।
कश्मीरी व्यापारी लगा रहे जालंधर के चक्कर
कभी ऐसा नहीं हुआ कि विलो लकड़ी से बैट तैयार करने वाले कश्मीरी व्यापारियों को जालंधर स्पोर्ट्स मार्केट के चक्कर लगाने पड़े। कश्मीरी व्यापारी फोन पर ही आर्डर लेकर भिजवा देते थे, लेकिन इस बार जालंधर स्पोर्ट्स मार्केट से कश्मीरी विलो बैट्स के आर्डर न आने के कारण व्यापारी खुद जालंधर आकर बस्ती नौ मार्केट के दुकानदारों के चक्कर काट रहे हैं और कम रेट का आफर तक दे रहे हैं।
भारत-पाकिस्तान मैच के बाद भी नहीं बढ़ी सेल
स्पोर्ट्स व्यापारियों की निगाहें 15 फरवरी को हुए भारत और पाकिस्तान के मैच पर टिकी हुई थी। व्यापारियों को लग रहा था कि भारत के जीतने से व्यापार में तेजी आएगी, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। क्रिकेट वर्ल्ड कप को लेकर कोई बड़ा आर्डर नही मिला है।
जालंधर के बस्ती नौ स्थित विशेष स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के व्यापारी ऋषि धीर और अंशु खन्ना ने कहा इस बार क्रिकेट वर्ल्ड कप को लेकर कोई बड़ा आर्डर नहीं मिला है। मंदी की दौर से निकल रही मार्केट में अभी तक कोई तेजी नहीं है।
उन्होंने कहा कि क्रिकेट का महज एक बल्ला बिकने पर कम से कम 15 आइटम की सेल होती है लेकिन इस बार बल्लों की सेल बहुत धीमी रही है।
वहीं आरएनएस स्पोर्ट्स के व्यापारी परविंदर सिंह ने कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए क्रिकेट वर्ल्ड कप ही सेल बढ़ाने का सहारा होता है, मगर इस बार का वर्ल्ड कप फीका ही साबित हुआ है।
पिछले वर्ल्ड कप में सेल बेहतर हुई थी, लेकिन इस बार का वर्ल्ड कप पूरी तरह से रंग नहीं जमा पाया। वहीं खेल उद्योग संघ के रविंदर धीर का कहना है कि तैयार माल से 20 फीसदी माल भी बाजार में बिक नहीं पाया है, हालात काफी बुरे हैं।