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Chandigarh: स्कूलों में बच्चों के सिर पर खतरा बन खड़े हैं सफेदे, शिकायतों के बाद भी छंटाई नहीं

कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 10 Jul 2022 10:06 AM IST
सार

पंजाब यूनिवर्सिटी की पर्यावरणविद् डॉ. सुमन मोर ने बताया कि ये गलत धारणा है कि हम किसी पेड़ को काट नहीं सकते हैं। जिस भी परिसर में पेड़ लगा है, वहां के प्रबंधन को यह तय करना चाहिए कि यह पेड़ किसी इंसान के लिए खतरा तो नहीं है।

स्कूलों में खड़े सफेदे के पेड़।
स्कूलों में खड़े सफेदे के पेड़। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में सफेदे के पेड़ बच्चों के सिर पर खतरा बन खड़े हुए हैं। स्कूलों ने कई बार प्रशासन को पत्र लिखकर और निजी तौर पर मुलाकात कर इस समस्या से अवगत भी करवाया है लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन पेड़ों की छंटाई और खतरनाक पेड़ों को हटाने में ढील व लापरवाही बरतता है। पिछले दिनों में बारिश के कारण कई स्कूलों में सफेदे के पेड़ों की टहनियां गिरी हैं, इसके बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन के हॉर्टिकल्चर विभाग की ओर से इनकी छंटाई नहीं करवाई गई है। कई स्कूलों में सफेदे के पेड़ जड़ों से ही खत्म हो रहे हैं। 

कई सफेदे के पेड़ जड़ से खत्म, कई 45 डिग्री पर झुके हुए

जीएमएसएसएस-23 के स्कूल में सफेदे के कई पेड़ जड़ों से ही खत्म हो रहे हैं, इनकी जड़ें बहुत ही कमजोर हैं। लगभग 20 फुटे लंबे सफेदे 45 डिग्री तक झुके हुए हैं, ये किसी भी समय गिर सकते हैं। प्रशासन को कई बार पत्र लिखा गया और निजी तौर पर मुलाकात कर छंटाई और हटाने के लिए कहा गया है। इन पेड़ों के पास ही स्कूल का स्टेज है।  - सीमा, प्राचार्य, जीएमएसएसएस-23   


एक माह पहले मुख्यद्वार गिरी सफेदे की टहनियां

लगभग एक माह पहले जीएमएसएसएस-35 के मुख्य द्वार के बाहर मौसम खराब होने के कारण टहनियां गिरी थीं। उस दौरान गर्मियों की छुट्यिां चल रही थीं और सुबह छह से सात बजे के बीच का समय था, इसलिए जानमाल को कोई क्षति नहीं हुई। स्कूल में लगभग 100 सफेदे के पेड़ हैं, इनकी लंबाई अधिक होने के कारण बारिश में गिरने का खतरा बना रहता है। पेड़ों को काटने की बजाय हॉर्टिकल्चर विभाग को इनकी शेपिंग कर इन्हें छोटा करना चाहिए, जिससे पेड़ और इंसान दोनों सुरक्षित रहे।  - प्रदीप त्रिवेणी, पर्यावरणप्रेमी, जीएमएसएसएस-35 

बारिश और आंधी के समय सफेदे टूटने का लगा रहता है डर

मेरी सेक्टर-20 डी और सेक्टर-22 दोनों के स्कूलों में ड्यूटी होती है। दोनों ही स्कूल पुराने हैं, इसलिए यहां बहुत सारे सफेदे लगे हुए हैं। सफेदों की उचित छंटाई नहीं होने के कारण ये बहुत लंबे है, कच्चे होने के कारण बारिश और आंधी के समय इनके टूटने का डर बना रहता है। स्कूल में ये बेहतर है कि सभी सफेदे दीवारों के पास हैं, वहां बच्चों को नहीं जाने दिया जाता है।  - स्वर्ण सिंह कंबोज, अध्यक्ष, यूटी टीचर्स एंप्लाइज एसोसिएशन 

विशेषज्ञ की राय : हर तीन माह में करें छंटाई, सफेदों के बजाय लगाएं मजबूत पेड़ 

पंजाब यूनिवर्सिटी की पर्यावरणविद् डॉ. सुमन मोर ने बताया कि ये गलत धारणा है कि हम किसी पेड़ को काट नहीं सकते हैं। जिस भी परिसर में पेड़ लगा है, वहां के प्रबंधन को यह तय करना चाहिए कि यह पेड़ किसी इंसान के लिए खतरा तो नहीं है। अगर ऐसा है तो पेड़ की छंटाई की जानी चाहिए, अगर जरूरत पड़े तो उसे पूरी तरह हटा भी सकते हैं। चीजों को बचाए रखने के नाम पर किसी की जान नहीं ली जा सकती है। प्रंबधन को अपने परिसर में मौजूद पेड़ों की हर तीन माह बाद छंटाई करवानी चाहिए। अगर पेड़ की उम्र बहुत ज्यादा हो गई है और अगर पेड़ सफेदे या अशोका का है, जिनकी जड़ें बहुत कमजोर होती है और खराब मौसम में ये गिर जाते हैं तो पर्यावरण विभाग की अनुमति के साथ इन्हें हटाया जा सकता है। इनकी जगह नए मजबूत जड़ों वाले पेड़ लगाए जाने चाहिए। 

इन बातों का रखें खास ध्यान 

1. पीपल, नीम जैसे मजबूत जड़ों के पेड़ लगाएं। 
2. अपने आसपास मौजूद पेड़ों की जिम्मेदारी लें, उनकी हर तीन या छह माह बाद कटाई-छंटाई करवाएं। 
3. सफेदे जैसे लंबे पेड़ों को उचित शेप दी जाए और उन्हें अधिक लंबा नहीं होने दे, पेड़ कमजोर होने पर उन्हें हटवाया जाए। 
4. विभाग पेड़ों का ऑडिट करवाए, बहुत सारे पेड़ों को दीमक लग जाती है, उनका समय-समय पर इलाज करते रहना चाहिए। पेड़ भी जीवित प्राणी है, उसे भी उचित देख-रेख की जरूरत है। 
5. विभाग पेड़ों का रिकॉर्ड मेनटेन करें और कमजोर जड़ों के पेड़ों को तत्काल हटवाकर उनकी जगह नए पेड़ लगाए जाएं। 
6. पेड़ों की जड़ों को कंक्रीट सबसे अधिक कमजोर करती है, जिसके कारण पेड़ बीमार और कमजोर हो जाते हैं। पत्थरों की सुंदरता से पेड़ों बचाने को तरजीह दें।
 

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