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फतेहगढ़ साहिब : कांग्रेस-पीपीपी गठबंधन से गड़बड़ाया गणित
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 29 Mar 2014 04:09 PM IST
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फतेहगढ़ साहिब लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा कांग्रेसी सांसद सुखदेव सिंह लिबड़ा तथा शिअद के वरिष्ठ नेता चरनजीत सिंह अटवाल को इस बार टिकट न मिलना, पीपीपी का कांग्रेस के साथ आना, शिअद और कांग्रेस के नए प्रत्याशियों के मैदान में उतरने जैसे कारणों से चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।
आंकड़ों की दृष्टि से, शिअद ने पिछले आम चुनाव के मुकाबले 2012 में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, लेकिन यह बढ़त इतनी नहीं है कि शिअद की जीत को तय माना जा सके। इस बार शिअद के कुलवंत सिंह, तो कांग्रेस के साधु सिंह धर्मसोत आमने-सामने हैं।
शिअद ने कुलवंत के रूप में रीयल एस्टेट कारोबारी पर दांव खेला है, तो कांग्रेस ने अपने अनुभव नेता धर्मसोत को मैदान में उतारा है। कुलवंत सिंह मोहाली नगर परिषद (अब नगर निगम) के अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि धर्मसोत तीन बार अमलोह तो एक बार नाभा से विधायक चुने गए हैं। इस वक्त भी वह नाभा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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आंकड़ों की दृष्टि से, शिअद ने पिछले आम चुनाव के मुकाबले 2012 में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, लेकिन यह बढ़त इतनी नहीं है कि शिअद की जीत को तय माना जा सके। इस बार शिअद के कुलवंत सिंह, तो कांग्रेस के साधु सिंह धर्मसोत आमने-सामने हैं।
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शिअद ने कुलवंत के रूप में रीयल एस्टेट कारोबारी पर दांव खेला है, तो कांग्रेस ने अपने अनुभव नेता धर्मसोत को मैदान में उतारा है। कुलवंत सिंह मोहाली नगर परिषद (अब नगर निगम) के अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि धर्मसोत तीन बार अमलोह तो एक बार नाभा से विधायक चुने गए हैं। इस वक्त भी वह नाभा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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पहली बार जीत हुई थी कांग्रेस पर मेहरबान
पिछले आम चुनाव में अस्तित्व में आए फतेहगढ़ साहिब लोकसभा क्षेत्र से पहली जीत कांग्रेस को मिली थी। कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव सिंह लिबड़ा ने शिअद उम्मीदवार चरनजीत सिंह अटवाल को हराया था।
तीन जिलों में फैली इस सीट के चार विधानसभा क्षेत्र पहले रोपड़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा थे। परिसीमन के बाद 2009 में रोपड़ सीट का नाम श्री आनंदपुर साहिब हो गया और इसका स्वरूप भी बदल गया।
इसके तहत आते बस्सी पठाना, फतेहगढ़ साहिब (सरहिंद), अमलोह और समराला विधानसभा क्षेत्र परिसीमन के बाद फतेहगढ़ साहिब में आ गए।
तीन जिलों में फैली इस सीट के चार विधानसभा क्षेत्र पहले रोपड़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा थे। परिसीमन के बाद 2009 में रोपड़ सीट का नाम श्री आनंदपुर साहिब हो गया और इसका स्वरूप भी बदल गया।
इसके तहत आते बस्सी पठाना, फतेहगढ़ साहिब (सरहिंद), अमलोह और समराला विधानसभा क्षेत्र परिसीमन के बाद फतेहगढ़ साहिब में आ गए।
2009 में 34299 वोटों से मिली कांग्रेस को जीत
सुखदेव सिंह लिबड़ा 2004 में शिअद टिकट पर रोपड़ से चुने गए थे, लेकिन बाद में कांग्रेस में चले गए और 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में फतेहगढ़ साहिब से जीत हासिल करने में सफल रहे।
उस चुनाव में कांग्रेस को फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, खन्ना, रायकोट और अमरगढ़ में बढ़त मिली थी। लोकसभा सीट के तहत आते अन्य विधानसभा क्षेत्रों बस्सी पठाना, समराला, साहनेवाल और पायल में शिअद की लीड थी।
कुल वोटों के मामले में सुखदेव सिंह लिबड़ा को 34299 की बढ़त मिली और वह शिअद के चरनजीत सिंह अटवाल को हराने में कामयाब रहे।
उस चुनाव में कांग्रेस को फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, खन्ना, रायकोट और अमरगढ़ में बढ़त मिली थी। लोकसभा सीट के तहत आते अन्य विधानसभा क्षेत्रों बस्सी पठाना, समराला, साहनेवाल और पायल में शिअद की लीड थी।
कुल वोटों के मामले में सुखदेव सिंह लिबड़ा को 34299 की बढ़त मिली और वह शिअद के चरनजीत सिंह अटवाल को हराने में कामयाब रहे।