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पंजाब के चुनाव में दम दिखाएंगे एनआरआई
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 09 Apr 2014 01:14 PM IST
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एनआरआई के पंजाब में वोट बेशक न हों पर हर चुनाव में उनकी अहम भूमिका होती है। क्योंकि ज्यादातर एनआरआई ग्रामीण इलाकों से निकल कर विदेश गए। वहां संपन्न होने के बाद उन्होंने अपने गांवों और इलाकों में विकास कार्य करवाए।
सामाजिक और धार्मिक कार्यों में मदद करते हैं। अपने इलाकों में उनका अच्छा रसूख है। जिसे वे अपनी पसंद की पार्टी के हक में वोट बैंक के रूप में बदल सकते हैं। इसके अलावा सबसे बड़ी मदद आर्थिक होती है।
एनआरआईज अपने उम्मीदवार की काफी आर्थिक सहायता करते हैं। साथ ही विदेश में बसे जो लोग चुनाव में नहीं आ सके हैं, वे उनके संदेश भी उनके परिजनों के लिए लाते हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा वोट अपने उम्मीदवार के हक में डलवाए जा सकें। दोनों ही प्रमुख पार्टियां कांग्रेस और शिअद यह महसूस करती हैं। दोनों ने एनआरआईज में सेंध लगाने की पूरी तैयारी की है।
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शिअद ने पहले से ही एनआरआईज को आकर्षित करने की कवायद शुरू कर दी थी। एनआरआई सम्मेलन इसकी अहम कड़ी था। शिअद की तरफ से बिक्रमजीत मजीठिया, सुरजीत रखड़ा, रिंकू अटवाल और मनप्रीत अयाली जैसे नेता एनआरआईज में लॉबिंग के लिए लगाए गए। वहीं, कांग्रेस की अपनी ओवरसीज विंग कई देशों में हैं।
बड़ी संख्या में एनआरआई कैप्टन अमरिंदर सिंह, मोहिंदर सिंह केपी, जस्सी खंगूड़ा जैसे नेताओं से जुड़े हुए हैं। दोनों ही पार्टियों से जुड़े एनआरआई चुनाव प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा एनआरआई दोआबा से हैं, सो वहां की दोनों सीटों पर उनका प्रभाव भी ज्यादा है। दोआबा में ही सबसे ज्यादा एनआरआई एक्टिव हैं।
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सामाजिक और धार्मिक कार्यों में मदद करते हैं। अपने इलाकों में उनका अच्छा रसूख है। जिसे वे अपनी पसंद की पार्टी के हक में वोट बैंक के रूप में बदल सकते हैं। इसके अलावा सबसे बड़ी मदद आर्थिक होती है।
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एनआरआईज अपने उम्मीदवार की काफी आर्थिक सहायता करते हैं। साथ ही विदेश में बसे जो लोग चुनाव में नहीं आ सके हैं, वे उनके संदेश भी उनके परिजनों के लिए लाते हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा वोट अपने उम्मीदवार के हक में डलवाए जा सकें। दोनों ही प्रमुख पार्टियां कांग्रेस और शिअद यह महसूस करती हैं। दोनों ने एनआरआईज में सेंध लगाने की पूरी तैयारी की है।
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शिअद ने पहले से ही एनआरआईज को आकर्षित करने की कवायद शुरू कर दी थी। एनआरआई सम्मेलन इसकी अहम कड़ी था। शिअद की तरफ से बिक्रमजीत मजीठिया, सुरजीत रखड़ा, रिंकू अटवाल और मनप्रीत अयाली जैसे नेता एनआरआईज में लॉबिंग के लिए लगाए गए। वहीं, कांग्रेस की अपनी ओवरसीज विंग कई देशों में हैं।
बड़ी संख्या में एनआरआई कैप्टन अमरिंदर सिंह, मोहिंदर सिंह केपी, जस्सी खंगूड़ा जैसे नेताओं से जुड़े हुए हैं। दोनों ही पार्टियों से जुड़े एनआरआई चुनाव प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा एनआरआई दोआबा से हैं, सो वहां की दोनों सीटों पर उनका प्रभाव भी ज्यादा है। दोआबा में ही सबसे ज्यादा एनआरआई एक्टिव हैं।
लाखों एनआरआई, सिर्फ 138 वोट
पंजाब के लाखों लोग विदेशों में काम कर रहे हैं। जबकि, इस लोकसभा चुनाव सिर्फ 138 एनआरआईज ने ही वोट बनवाने में दिलचस्पी दिखाई। देश भर में सबसे ज्यादा जागरूक केरल के एनआरआई रहे। केरल के 11488 एनआरआईज ने अपने वोट बनवाए।
पंजाब दूसरे और तमिलनाडु तीसरे स्थान पर रहे। फ्रांस में रह रहे पुड्डुचेरी के 56 लोगों ने अपने वोट बनवा लिए, पर बड़े राज्यों के एनआरआई पीछे रहे। एनआरआईज का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने योजना बनाई थी कि एनआरआईज अपने देशों की एंबेसी में जाकर वोट डाल सकेंगे। पर वह सिरे नहीं चढ़ सकी।
एनआरआई सभा के प्रधान जसवीर सिंह गिल कहते हैं कि अगर कोई भी नौ महीने से ज्यादा विदेश में काम कर रहा है तो वह एनआरआई है। पर सिर्फ बड़े देशों में रह रहे पंजाबियों को ही एनआरआई माना जाता है।
मिडिल ईस्ट समेत कई देशों में जो वर्कर रह रहे हैं, वे एनआरआई अकाउंट से पैसे भेजते हैं, उन्हें एनआरआई नहीं मानते। सरकार द्वारा जागरूक न करने के कारण ही इतनी कम संख्या में एनआरआईज वोट बने हैं।
पंजाब दूसरे और तमिलनाडु तीसरे स्थान पर रहे। फ्रांस में रह रहे पुड्डुचेरी के 56 लोगों ने अपने वोट बनवा लिए, पर बड़े राज्यों के एनआरआई पीछे रहे। एनआरआईज का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने योजना बनाई थी कि एनआरआईज अपने देशों की एंबेसी में जाकर वोट डाल सकेंगे। पर वह सिरे नहीं चढ़ सकी।
एनआरआई सभा के प्रधान जसवीर सिंह गिल कहते हैं कि अगर कोई भी नौ महीने से ज्यादा विदेश में काम कर रहा है तो वह एनआरआई है। पर सिर्फ बड़े देशों में रह रहे पंजाबियों को ही एनआरआई माना जाता है।
मिडिल ईस्ट समेत कई देशों में जो वर्कर रह रहे हैं, वे एनआरआई अकाउंट से पैसे भेजते हैं, उन्हें एनआरआई नहीं मानते। सरकार द्वारा जागरूक न करने के कारण ही इतनी कम संख्या में एनआरआईज वोट बने हैं।
पंजाब में इतने हैं एनआरआई वोटर
हलका------पुरुष-----महिला---कुल वोटर
गुरदासपुर ----- 0 --------- 0 ------ 0
अमृतसर ------ 0 --------- 0 ------ 0
खडूर साहिब --- 0 ---------- 12 ----- 12
जालंधर ------- 0 ---------- 13 ----- 13
होशियारपुर ------ 0 --------- 31 ------ 31
आनंदपुर साहिब --- 8 ---------- 1 ------- 9
लुधियाना ------- 26 ---------- 0 ------- 26
फतेहगढ़ साहिब --- 15 ---------- 0 ------- 15
फरीदकोट ------- 14 ----------- 0 ------ 14
फिरोजपुर -------- 4 ------------ 0 ------ 4
बठिंडा ---------- 0 ------------ 0 ------ 0
संगरूर ---------- 14 ----------- 0 ------- 14
पटियाला --------- 0 ------------ 0 ------ 0
कुल ----------- 81 ------------ 57 ---- 138
गुरदासपुर ----- 0 --------- 0 ------ 0
अमृतसर ------ 0 --------- 0 ------ 0
खडूर साहिब --- 0 ---------- 12 ----- 12
जालंधर ------- 0 ---------- 13 ----- 13
होशियारपुर ------ 0 --------- 31 ------ 31
आनंदपुर साहिब --- 8 ---------- 1 ------- 9
लुधियाना ------- 26 ---------- 0 ------- 26
फतेहगढ़ साहिब --- 15 ---------- 0 ------- 15
फरीदकोट ------- 14 ----------- 0 ------ 14
फिरोजपुर -------- 4 ------------ 0 ------ 4
बठिंडा ---------- 0 ------------ 0 ------ 0
संगरूर ---------- 14 ----------- 0 ------- 14
पटियाला --------- 0 ------------ 0 ------ 0
कुल ----------- 81 ------------ 57 ---- 138
ये हैं एनआरआईज के प्रमुख मुद्दे
जमीनों पर कब्जे- ग्रामीण और शहरी इलाकों में रिश्तेदारों और अन्य लोगों ने एनआरआईज की प्रॉपर्टी पर कब्जा कर रखा है। पुलिस कहती है कोर्ट केस करो, जिसमें लंबा समय लगेगा। सरकार ने रेंट एक्ट एमेंडमेंट बिल पास किया पर उस पर स्टे लग लग गया है। एनआरआईज को उम्मीद है कि इसके लागू होने से उनको राहत मिलेगी। साथ ही उनकी मांग है कि इसका दायरा बढ़ा कर ग्रामीण इलाकों में भी किया जाए। क्योंकि वहां भी बहुत सी प्रॉपर्टी पर कब्जा है।
वैवाहिक विवाद- इसमें वर और वधू दोनों पक्षों की तरफ से काफी शिकायतें आती हैं। बहुत से एनआरआई दूल्हे शादी के बाद लड़की को छोड़ कर विदेश चले गए। दूसरी शादी कर ली या पहले से की थी। वहीं, बहुत सी लड़कियों ने धोखे से एनआरआईज को जाल में फंसा कर शादी कर ली। कई एनआरआईज के खिलाफ दहेज प्रताड़ना के झूठे मामले भी दर्ज कराए गए। एनआरआई सभा के पास 972 शिकायतें आई थीं, जिनमें 686 का निपटारा कराया गया है। ऐसे विवादों का आपसी रजामंदी के समझौता कराया जा रहा है।
भगोड़े करार दिए गए- बड़ी संख्या में एनआरआईज पर झूठे छोटे-मोटे मामले दर्ज कराए गए। बहुत से एनआरआईज उनमें अदालतों द्वारा भगोड़ा करार दिए जा चुके हैं।
सुरक्षा- एनआरआईज पंजाब में सुरक्षित माहौल चाहते हैं। वे अगर यहां निवेश करते हैं तो उनकी प्रॉपर्टी सुरक्षित रहे। यह भी आशंका रहती है कि अगर वे चुनाव प्रचार या अन्य कामों से यहां आते हैं तो विरोधी हमला कर सकते हैं, साजिश रच कर फंसा सकते हैं।
वैवाहिक विवाद- इसमें वर और वधू दोनों पक्षों की तरफ से काफी शिकायतें आती हैं। बहुत से एनआरआई दूल्हे शादी के बाद लड़की को छोड़ कर विदेश चले गए। दूसरी शादी कर ली या पहले से की थी। वहीं, बहुत सी लड़कियों ने धोखे से एनआरआईज को जाल में फंसा कर शादी कर ली। कई एनआरआईज के खिलाफ दहेज प्रताड़ना के झूठे मामले भी दर्ज कराए गए। एनआरआई सभा के पास 972 शिकायतें आई थीं, जिनमें 686 का निपटारा कराया गया है। ऐसे विवादों का आपसी रजामंदी के समझौता कराया जा रहा है।
भगोड़े करार दिए गए- बड़ी संख्या में एनआरआईज पर झूठे छोटे-मोटे मामले दर्ज कराए गए। बहुत से एनआरआईज उनमें अदालतों द्वारा भगोड़ा करार दिए जा चुके हैं।
सुरक्षा- एनआरआईज पंजाब में सुरक्षित माहौल चाहते हैं। वे अगर यहां निवेश करते हैं तो उनकी प्रॉपर्टी सुरक्षित रहे। यह भी आशंका रहती है कि अगर वे चुनाव प्रचार या अन्य कामों से यहां आते हैं तो विरोधी हमला कर सकते हैं, साजिश रच कर फंसा सकते हैं।
राज्य सरकार ने उठाए कई कदम
एनआरआईज की लंबे समय से चली आ रही मांगों को देखते हुए राज्य सरकार ने भी कई कदम उठाए हैं। पिछले दो सालों से लगातार एनआरआई सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। जिसमें उनकी समस्या की समीक्षा भी की जाती है। एनआरआईज के हित में कई कदम उठाए जा रहे हैं।
एनआरआई पुलिस स्टेशन- कई जिलों में एनआरआई पुलिस स्टेशन खोले गए हैं, जहां एनआरआई सीधे शिकायत कर सकते हैं। उनके केसों की जांच अलग टीम करती है। हालांकि एनआरआईज अभी इसे उतना कारगर नहीं मान रहे, जितनी उम्मीद थी।
एनआरआई कोर्ट- जालंधर में दो एनआरआई कोर्ट शुरु हो चुकी हैं। जिससे उनके मामलों का निपटारा जल्द होने की उम्मीद बंधी है।
हेल्पलाइन नंबर- विदेश में बैठे हुए विशेष हेल्पलाइन नंबर पर कोई भी शिकायत दे सकते हैं।
ऑनलाइन डाटा- राज्य सरकार ने ज्यादातर विभागों का डाटा ऑनलाइन कर दिया है। जिससे एनआरआईज विदेश में बैठ कर अपनी प्रॉपर्टी का स्टेटस चेक कर सकते हैं। प्रॉपर्टी खरीदनी है तो उसकी असलियत भी जान सकते हैं।
एनआरआई पुलिस स्टेशन- कई जिलों में एनआरआई पुलिस स्टेशन खोले गए हैं, जहां एनआरआई सीधे शिकायत कर सकते हैं। उनके केसों की जांच अलग टीम करती है। हालांकि एनआरआईज अभी इसे उतना कारगर नहीं मान रहे, जितनी उम्मीद थी।
एनआरआई कोर्ट- जालंधर में दो एनआरआई कोर्ट शुरु हो चुकी हैं। जिससे उनके मामलों का निपटारा जल्द होने की उम्मीद बंधी है।
हेल्पलाइन नंबर- विदेश में बैठे हुए विशेष हेल्पलाइन नंबर पर कोई भी शिकायत दे सकते हैं।
ऑनलाइन डाटा- राज्य सरकार ने ज्यादातर विभागों का डाटा ऑनलाइन कर दिया है। जिससे एनआरआईज विदेश में बैठ कर अपनी प्रॉपर्टी का स्टेटस चेक कर सकते हैं। प्रॉपर्टी खरीदनी है तो उसकी असलियत भी जान सकते हैं।