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चंडीगढ़, नदी जल बंटवारा सब कुछ भूले प्रत्याशी
सुरेंद्र धीमान/अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 06 Apr 2014 02:04 PM IST
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पंजाब में लोकसभा चुनाव का प्रचार रफ्तार पकड़ता जा रहा है। इस दौरान कई नए मुद्दे सामने आ रहे हैं, तो कई जगह स्थानीय मुद्दों पर ही नेताओं का ध्यान केंद्रित है। ऐसे में पंजाब और हरियाणा के के बुनियादी मुद्दे खो से गए हैं।
चंडीगढ़ का हस्तांतरण, नदी जल बंटवारा, पंजाबी भाषी इलाके आदि कहीं पीछे छूट गए हैं। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद), तो हरियाणा मे विभिन्न पार्टियां इन मुद्दों को हमेशा उठाती रही हैं। इन्हें लेकर एक लंबा संघर्ष भी स्थानीय लड़ा जा चुका है।
पिछले विधानसभा सत्र में पंजाब के राज्यपाल के अभिभाषण में भी चंडीगढ़ और नदी जल बंटवारे का विशेष उल्लेख था। यह बात अलग है कि वर्तमान में इन मुद्दों को न तो शिअद के मंचों से उठाया जा रहा है और न ही हरियाणा में इनके हक में कोई आवाज सुनाई दे रही हैं।
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‘अमर उजाला’ ने इन मुद्दों की मौजूदा स्थिति और विभिन्न दलों का इस पर स्टैंड जानने के लिए नेताओं से बात की। प्रस्तुत है इस बातचीत पर आधारित रिपोर्ट :-
मेनिफेस्टो में सब कुछ आएगा: शिअद
शिअद के प्रवक्ता और पार्टी की मेनिफेस्टो कमेटी के सदस्य डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने इस बारे में कहा कि चंडीगढ़, नदी जल बंटवारा और पंजाब भाषी इलाकों के मुद्दे दल के मुख्य एजेंडे में हैं। कुछ ही दिनों में पार्टी का मेनिफेस्टो जारी होगा, उसमें इन सभी का जिक्र होगा। पार्टी ने इन मुद्दो को बिलकुल नहीं छोड़ा है। एनडीए सरकार बनने पर अकाली-भाजपा गठबंधन प्रदेश के सभी मसलों को हल करवाएगा।
शिअद करता है दिखावा: कांग्रेस
पंजाब कांग्रेस विधायक दल के नेता और फिरोजपुर लोकसभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी चौ. सुनील जाखड़ का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में पानी से संबंधित समझौते रद्द करके इस मसले को हल कर दिया था। शिअद बिना वजह वोटों की राजनीति करते हुए लोगों की भावनाओं से खेलती है। शिअद एक तरफ चंडीगढ़, नदी जल बंटवारे और पंजाबी बोलते इलाकों की बात करता है, तो दूसरी तरफ पंजाब के इन हकों को छीनने की कोशिश करने वाले चौटाला परिवार की इनेलो के साथ मिलकर हरियाणा में चुनाव लड़ रहा है। इसके नेताओं को यह दोहरी राजनीति बंद करनी चाहिए। जाखड़ ने कहा कि इन मसलों का हल आपसी बातचीत के जरिए ही संभव है।
राजीव-लौंगोवाल समझौते के तहत हो कार्रवाई: माकपा
माकपा की प्रदेश इकाई के सचिव चरण सिंह विर्दी कहते हैं कि इन सभी मसलों का हल राजीव-लौंगोवाल समझौते के तहत होना चाहिए। यह मुद्दे जब तक अनसुलझे हैं, तब तक पंजाब में स्थायी तौर पर शांति कायम नहीं रह सकती। उन्होंने प्रदेशों को अधिक अधिकारों की वकालत भी की।
बेवकूफ बनाते हैं अकाली: भाकपा
भाकपा की प्रदेश इकाई के सचिव बंत सिंह बराड़ ने कहा है कि अकाली नेता इन मुद्दों पर जनता को बेवकूफ बनाते हैं। जब पहले केंद्र में एनडीए सरकार थी, तब इन्होंने क्यों नहीं मसले हल करवाए? चंडीगढ़ हर हाल में पंजाब को मिलना चाहिए, क्योंकि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश इसमें से ही निकले हैं। इसके लिए यदि हरियाणा को कुछ मुआवजा देना पड़े तो वह भी दे देना चाहिए। कहा कि जल बंटवारे और पंजाबी बोलते इलाकों का मसला सभी पक्षों को बातचीत से हल करना चाहिए।
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चंडीगढ़ का हस्तांतरण, नदी जल बंटवारा, पंजाबी भाषी इलाके आदि कहीं पीछे छूट गए हैं। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद), तो हरियाणा मे विभिन्न पार्टियां इन मुद्दों को हमेशा उठाती रही हैं। इन्हें लेकर एक लंबा संघर्ष भी स्थानीय लड़ा जा चुका है।
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पिछले विधानसभा सत्र में पंजाब के राज्यपाल के अभिभाषण में भी चंडीगढ़ और नदी जल बंटवारे का विशेष उल्लेख था। यह बात अलग है कि वर्तमान में इन मुद्दों को न तो शिअद के मंचों से उठाया जा रहा है और न ही हरियाणा में इनके हक में कोई आवाज सुनाई दे रही हैं।
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‘अमर उजाला’ ने इन मुद्दों की मौजूदा स्थिति और विभिन्न दलों का इस पर स्टैंड जानने के लिए नेताओं से बात की। प्रस्तुत है इस बातचीत पर आधारित रिपोर्ट :-
मेनिफेस्टो में सब कुछ आएगा: शिअद
शिअद के प्रवक्ता और पार्टी की मेनिफेस्टो कमेटी के सदस्य डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने इस बारे में कहा कि चंडीगढ़, नदी जल बंटवारा और पंजाब भाषी इलाकों के मुद्दे दल के मुख्य एजेंडे में हैं। कुछ ही दिनों में पार्टी का मेनिफेस्टो जारी होगा, उसमें इन सभी का जिक्र होगा। पार्टी ने इन मुद्दो को बिलकुल नहीं छोड़ा है। एनडीए सरकार बनने पर अकाली-भाजपा गठबंधन प्रदेश के सभी मसलों को हल करवाएगा।
शिअद करता है दिखावा: कांग्रेस
पंजाब कांग्रेस विधायक दल के नेता और फिरोजपुर लोकसभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी चौ. सुनील जाखड़ का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में पानी से संबंधित समझौते रद्द करके इस मसले को हल कर दिया था। शिअद बिना वजह वोटों की राजनीति करते हुए लोगों की भावनाओं से खेलती है। शिअद एक तरफ चंडीगढ़, नदी जल बंटवारे और पंजाबी बोलते इलाकों की बात करता है, तो दूसरी तरफ पंजाब के इन हकों को छीनने की कोशिश करने वाले चौटाला परिवार की इनेलो के साथ मिलकर हरियाणा में चुनाव लड़ रहा है। इसके नेताओं को यह दोहरी राजनीति बंद करनी चाहिए। जाखड़ ने कहा कि इन मसलों का हल आपसी बातचीत के जरिए ही संभव है।
राजीव-लौंगोवाल समझौते के तहत हो कार्रवाई: माकपा
माकपा की प्रदेश इकाई के सचिव चरण सिंह विर्दी कहते हैं कि इन सभी मसलों का हल राजीव-लौंगोवाल समझौते के तहत होना चाहिए। यह मुद्दे जब तक अनसुलझे हैं, तब तक पंजाब में स्थायी तौर पर शांति कायम नहीं रह सकती। उन्होंने प्रदेशों को अधिक अधिकारों की वकालत भी की।
बेवकूफ बनाते हैं अकाली: भाकपा
भाकपा की प्रदेश इकाई के सचिव बंत सिंह बराड़ ने कहा है कि अकाली नेता इन मुद्दों पर जनता को बेवकूफ बनाते हैं। जब पहले केंद्र में एनडीए सरकार थी, तब इन्होंने क्यों नहीं मसले हल करवाए? चंडीगढ़ हर हाल में पंजाब को मिलना चाहिए, क्योंकि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश इसमें से ही निकले हैं। इसके लिए यदि हरियाणा को कुछ मुआवजा देना पड़े तो वह भी दे देना चाहिए। कहा कि जल बंटवारे और पंजाबी बोलते इलाकों का मसला सभी पक्षों को बातचीत से हल करना चाहिए।