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यहां दांव पर लगी है कांग्रेस-भाजपा दोनों की प्रतिष्ठा

Mon, 07 Apr 2014 06:53 PM IST
रजनीश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
रजनीश कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 07 Apr 2014 06:53 PM IST
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Loksabha Election 2014, punjab, Congress, bjp, gurdaspur
गुरदासपुर लोकसभा हलके में कांग्रेस- भाजपा दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। कांग्रेस की ओर से पंजाब प्रधान और मौजूदा सांसद प्रताप बाजवा अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि भाजपा की ओर से तीन बार के सांसद व सिने स्टार विनोद खन्ना अपनी सियासी किस्मत को आजमा रहे हैं।
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वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से पूर्व विधायक सुच्चा सिंह छोटेपुर को गुरदासपुर से उतारने के बार मुकाबला तिकोना हो गया है। छोटेपुर के दोनों कांग्रेस और भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी लगने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे दोनों की दल अपनी सियासी बिसात बिछाने में लगे हैं, लेकिन यह वक्त बताएगा उनकी बिसात किस करवट बैठती है।
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इसके अलावा सीपीएम और सीपीआई (एमएल) लिब्रेशन के संयुक्त उम्मीदवार गुरमीत सिंह बख्तपुर और बहुजन समाज पार्टी की ओर से सुखविंद्र सिंह सुख चुनाव मैदान में हैं। इन सबके बीच मुकाबले कांग्रेस, भाजपा और आप के बीच माना जा रहा है। खैर मतदाताओं का मन किसके लिए उदार होता है, वह आने वाला समय बताएगा।
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ग्राउंड रिपोर्ट
कुल मतदाता-1472397
पुरुष मतदाता-767539
महिला मतदाता-704858

18-19 के बीच के मतदाता
40054
गुरदासपुर लोकसभा के अंतर्गत कुल विधानसभा हलका : 9
कांग्रेस-5
भाजपा-3
शिअद-1

जंग के खिलाड़ी

कांग्रेस
पंजाब में कांग्रेस की सियासत की धुरी माने जाते पंजाब प्रधान प्रताप बाजवा की प्रतिष्ठा वर्तमान चुनाव में दाव पर लगी है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरोधी के रूप में जाना जाता है। 2009 में भाजपा के तीन बार के सांसद विनोद खन्ना को हराकर बाजवा ने कांग्रेसी गढ में दोबारा हाथ को आगे बढ़ाया।

वर्तमान कांग्रेसियों की आपसी गुटबाजी उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। हालांकि अब तक नाराज कांग्रेसियों को मनाकर साथ जोड़ने में बाजवा को कामयाबी हासिल हो सकी है। वहीं पिछले पांच साल में हल्के में कोई वादों के मुताबिक कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं लगने और उनकी गैर मौजूदगी के चलते मतदाताओं को रिझाने में उन्हें खूब एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।

भाजपा-

यहां से तीन बार सांसद रहे सिने स्टार विनोद खन्ना भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल हैं। हल्के खासकर सीमावर्ती नरोट जैमल सिंह और बम्याल को हेडक्वार्टरों से जोड़ने के लिए पुल निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही है। लेकिन, खन्ना पर बाहरी होने और हल्के से ज्यादा समय बाहर बिताने को लेकर सवाल उठते रहे हैं, जोकि उनके लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।

जबकि पार्टी के एक ग्रुप के बीच रहना चुनाव में नई मुसीबत बनकर उबर सकता है। नाराजगी को कम करने के लिए खन्ना ने हल्के में अपना मकान भी बना लिया, लेकिन मतदाताओं के दिलों में जगह बनाने में मेहनत करनी पड़ सकती है। लोगों को साथ जोड़ने के लिए भावनात्मक भाषणबाजी की जा रही है।

आम आदमी पार्टी-

सुच्चा सिंह छोटेपुर धारीवाल विधानसभा हल्के से दो बार विधायक रहे चुके हैं। 2002 में उन्होंने आजाद चुनाव लड़कर शिअद के दिग्गज पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह को हराया था। इससे पहले 1985 में उन्होंने चुनाव जीत चुके हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का खास माना जाता  था, लेकिन उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन नहीं की।


छोटेपुर का गुरदासपुर, धारीवाल, कादियां और फतेहगढ़ चूड़ियां और डेरा बाबा नानक हल्के में अच्छा जनाधार है। उनका आम जनता के बीच अच्छा प्रभाव के साथ साथ लोगों के मुद्दों पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनका आम जनता के बीच अच्छा प्रभाव के साथ साथ लोगों के मुद्दों पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
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