सदन का हंगामे की भेंट चढ़ना, लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि सदन का हंगामे की भेंट चढ़कर स्थगित और सार्थक संवाद से विहीन हो जाना लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है। बिड़ला के अनुसार सदन में वाद-विवाद हो, पक्ष-विपक्ष में तर्क हो, बहस हो, संवाद हो, मगर अनावश्यक हंगामे की वजह से सदन स्थगित न हो। हम जनप्रतिनिधियों को सामूहिक रूप से लोकतंत्र के इन मंदिरों की छवि को सुधारना होगा। जनता के भरोसे को बनाए रखना होगा।
लोस अध्यक्ष ओम बिड़ला बुधवार को हरियाणा विधानसभा में विधायकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य रूप से पहुंचे हुए थे और विधायकों को संबोधित कर रहे थे। बहुत ही विश्वास के साथ बिड़ला ने हरियाणा के विधायकों से आह्वान किया कि हरियाणा की ये धरा कर्मयोग, ज्ञानयोग और सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण है, इसलिए मैं चाहता हूं इस तरह की परंपरा की शुरूआत हरियाणा से ही हो और देश के लिए मिसाल बन जाए।
बिड़ला ने कहा कि मुझे यह बात इसलिए महसूस हुई है कि हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने विधानसभा की कार्यप्रणाली को एक रोल मॉडल बनाने के लिए जो इरादा सदन में दिखाया है, उसमें नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का यह कहना कि जनहित के मुद्दों पर हम सभी विधायक एक होकर व दलगत राजनीति से ऊपर उठकर फैसला लेंगे, अपने आप एक महत्वपूर्ण बात है। इसलिए हरियाणा ये ठान ले कि सदन में आज के बाद वाद, विवाद, संवाद, तर्क, विर्तक सब कुछ होगा लेकिन हंगामा कभी नहीं होगा, अनावश्यक सदन स्थगित कभी नहीं होगा।
जन प्रतिनिधियों को हमेशा याद रखना होगा कि जनता जिन विधायकों व सांसदों को पांच वर्ष के लिए चुनती है, वे उनकी आशाओं व अपेक्षाओं के रक्षक होते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि लोकसभा सर्वोच्च सदन है और आज हमारे लिए बड़े ही सौभाग्य की बात है कि वहां के अध्यक्ष हमारी विधानसभा में पधारे हैं।
इससे पहले वर्ष 1987 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी यहां हरियाणा विधानसभा की दर्शक दीर्घा में आए थे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विधानसभा सदस्यों के अलावा सांसद धर्मबीर सिंह, डा. अरविंद शर्मा, बृजेंद्र सिंह, नायब सिंह सैनी, सुनीता दुग्गल, राज्यसभा सांसद डा. डीपी वत्स, उतर प्रदेश विधानसभा परिषद के सदस्य संजय लाठर भी उपस्थित थे।
सीमित होने चाहिए पीठासीन अधिकारियों के अधिकार
बिड़ला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के असीमित अधिकार भी सीमित हों। सभी राज्यों के विधानसभा व विधानमण्डलों के विधायी कार्यों के संचालन एक जैसे हों। इसके लिए नई दिल्ली, देहरादून व लखनऊ में राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्षों व पीठासीन अधिकारियों की तीन-तीन दिवसीय कार्यशालों का आयोजन लोकसभा सचिवालय द्वारा किया जा चुका है।
कई देशों में 140 से 240 दिन चलता है सदन
बिड़ला ने कहा कि वे कई देशों का भ्रमण कर चुके हैं, जहां पर सत्र कहीं तो एक वर्ष में 240 दिन तो कहीं 150 तो कहीं 140 दिन चलते हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में भारत में परिवर्तन करने की आवश्यकता है और हम जनप्रतिनिधि सामूहिक रूप से इस दिशा में प्रयास कर सत्रों की संख्या बढ़ा सकते हैं और पिछले कुछ वर्षों में लोकसभा में ऐसा हुआ भी है।
बिड़ला ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सदन में निबार्ध एवं निष्पक्ष चर्चा करनी चाहिए और सदन में जनहित से जुड़े मुद्दों को ही उठाना चाहिए और सत्र की अवधि संचालन में कभी बाधा नहीं डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र के प्रति लोग जागरूक हैं तथा इस बात का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पिछली वर्षों में जितने आम चुनाव हुए हैं, उनमें मतदान प्रतिशतता में निरंतर वृद्धि हुई है और जनता के इस विश्वास को हम लोकतंत्र के मंदिरों में कानून बनाकर कार्यपालिका के माध्यम से हम पूरा कर सकते हैं।
कटारिया से भाषण सीमित करने का आग्रह
मुख्यातिथि का सदन में पहुंचने का कार्यक्रम थोड़ा लेट हो गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न होने का समय दोपहर डेढ़ बजे था। मगर किसी कारणवश ओम बिड़ला चंडीगढ़ समय पर नहीं पहुंच पाए। सीएम, डिप्टी सीएम, नेता प्रतिपक्ष, केंद्रीय राज्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष उनका इंतजार करते रहे।
बिड़ला शाम 4 बजकर 41 मिनट पर सदन के भीतर में पहुंचे। इस दौरान सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के अतिरिक्त मुख्यमंत्री मनोहर लाल, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता समेत केंद्रीय राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया का भाषण होना था। इसी कड़ी में जब रतनलाल कटारिया ने अपना भाषण शुरू किया, तो थोड़ी ही देर बाद उनसे मैसेज देते हुए भाषण सीमित करने का आग्रह किया। इस पर कटारिया मुस्कराएं और उन्होंने सीमित ही शब्दों में अपना भाषण खत्म कर दिया।